18 & 19 जून 2026 करेंट अफेयर्स – Basic

यह 18 & 19 जून 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।

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1. किन दो राज्‍यों के बांस शिल्प (Bamboo Craft) को जून 2026 में अलग अलग GI टैग मिला?
Bamboo crafts of which two states got separate GI tag in June 2026?

a. असम और झारखंड
b. गुजरात और राजस्‍थान
c. जम्‍मू कश्‍मीर और गुजरात
d. राजस्‍थान और लद्दाख़

Answer: a. असम और झारखंड

– ये जीआई टैग 15 जून 2026 को दिए गए।

असम का बांस शिल्प


– असम का बांस शिल्प राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का एक प्रमुख हिस्सा है।
– बांस को यहाँ “हरा सोना” (Green Gold) कहा जाता है।
– बांस से मुख्य रूप से ‘जापी’ (Japi – पारंपरिक शंक्वाकार टोपी) , ‘खलोई’ (मछली पकड़ने का उपकरण), सजावटी टोकरियाँ, चटाइयाँ, लैंपशेड, फर्नीचर, और दीवार पर टांगने वाली घड़ियाँ बनाई जाती हैं।
– राज्य के पारंपरिक त्योहारों जैसे बिहू में बांस से बनी वस्तुओं का उपयोग होता है।
– यह शिल्प ग्रामीण क्षेत्रों में (विशेषकर कृषि और मछली पकड़ने वाले समुदायों के लिए) आय का एक प्रमुख और स्थायी साधन है।
– 15 जून 2026 तक असम के कुल 45 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है।
– राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने असम के पारंपरिक उत्पादों के लिए GI पंजीकरण प्रक्रिया को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

झारखंड बांस शिल्प
– यह राज्य की प्राचीन और समृद्ध आदिवासी कला है, जो अपनी पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बनावट के लिए जानी जाती है।
– यह कला सदियों पुरानी है और मुख्य रूप से संथाल, गोंड, और पहाड़िया जैसी जनजातियों द्वारा पीढ़ियों से अपनाई जा रही है।
– पारंपरिक रूप से बांस से सूप, टोकरियां, मछली फंसाने के जाल और बहंगी (पारंपरिक बोझ ढोने का उपकरण) बनाई जाती थीं।
– आधुनिक समय में, कुशल कारीगर (विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूह) इससे आकर्षक टेबल लैंप, फूलदान, हैंडबैग, पेन स्टैंड और सजावटी सामान बनाते हैं।
– यह हस्तशिल्प ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
– इसमें ‘लाठी बांस’ और ‘रोपा बांस’ का उपयोग किया जाता है, जिसमें से रोपा बांस डिजाइन और सजावटी सामान बनाने के लिए सबसे उपयुक्त होता है।

GI टैग क्‍या है?
– GI का मतलब Geographical Indication यानि भौगोलिक संकेत।
– GI टैग उन प्रोडक्ट्स पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक संकेत है, जिनका किसी स्पेशल जगह पर उत्पादन किया जाता है। उसका एक खास गुण होता है।
– भारत ने, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य के रूप में वस्तुओं के जियोग्राफिकल इंडिकेशन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 999 कानून पारित किया, जो 5 सितंबर 2003 से देश में लागू है।

GI टैग कौन प्रदान करता है?
– मिनिस्‍ट्री ऑफ कॉमर्स के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्री प्रमोशन एंड इंटरनल ट्रेड की ओर से GI टैग दिया जाता है।
– किसी प्रोडक्‍ट के लिए GI टैग प्राप्‍त करने के लिए चेन्नई स्थित GI डेटाबेस में आवेदन करना होता है।
– यह इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट के अंडर है, जो पूरे देश में सिर्फ चेन्नई में ही होता है।.

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2. कार्बी आंगलोंग हथकरघा उत्पाद को GI टैग मिला, यह किस राज्‍य का प्रसिद्ध हस्‍तशिल्‍प है?
Karbi Anglong handloom product got GI tag, it is a famous handicraft of which state?

a. राजस्‍थान
b. असम
c. बिहार
d. आंध्र प्रदेश

Answer: b. असम

– असम के कार्बी आंगलोंग जिले के स्वदेशी बुनकरों, कार्बी आदिवासी समुदाय द्वारा पारंपरिक रूप से बुने जाने वाले वस्त्र हैं।
– यह हस्तशिल्प कार्बी संस्कृति, प्रकृति के प्रति प्रेम और महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा उदाहरण है।
– इन हथकरघा उत्पादों का दैनिक पहनावे के साथ कार्बी समुदाय के पारंपरिक त्योहारों, अनुष्ठानों और सामाजिक आयोजनों में भी किया जाता है।
– इनमें मुख्य रूप से पिनी (स्कर्ट या लपेटने वाला वस्त्र), पेकोक (शॉल), वामकोक और चोई-होंगथोर (पारंपरिक चादरें व तौलिये) शामिल हैं।
– इन वस्त्रों पर प्राकृतिक रंगों, ज्यामितीय आकृतियों और स्थानीय वनस्पतियों-जीवों के मनमोहक डिज़ाइन उकेरे जाते हैं, जो कार्बी जनजाति की लोक कथाओं और प्रकृति से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं।
– यह पूरी तरह से कुटीर उद्योग है।
– कार्बी आंगलोंग के लगभग 90% से अधिक बुनकर महिलाएँ हैं, और यह कार्य उनकी आजीविका का एक प्रमुख साधन है।

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3. किस राज्‍य के वाद्य यंत्र, बिहू पेपा को GI टैग मिला?
Which state’s musical instrument, Bihu Pepa, got the GI tag?

a. सिक्किम
b. नगालैंड
c. असम
d. मेघालय

Answer: c. असम

– असम का बिहू पेपा एक प्रसिद्ध पारंपरिक वाद्य यंत्र है।
– यह भैंस के सींग और बांस के छोटे टुकड़ों से बना एक प्रकार का ‘हॉर्नपाइप’ (wind instrument) है।
– इसे असम के सबसे बड़े त्योहार रोंगाली बिहू के दौरान बजाया जाता है।
– इसका निचला हिस्सा और माउथपीस बांस या बेंत से बने होते हैं।
– और दूर का खुला सिरा भैंस के सींग से ढका होता है।
– इसे एक विशेष ध्वनि (हाई-पिच) उत्पन्न करने के लिए फूंका जाता है।
– यह असम की संस्कृति और आदिवासी विरासत का प्रतीक है।
– इसे बिहू गीतों और नृत्य की आत्मा माना जाता है।
– पेपा आमतौर पर ढोल (ड्रम), गोगोना (एक अन्य पारंपरिक वाद्य) और ताल (मंजीरा) के साथ मिलकर बजाया जाता है।

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4. किस राज्‍य के देउरी हथकरघा उत्पाद को GI टैग मिला, जो देउरी जनजाति द्वारा पीढ़ियों से बुने जाने वाले पारंपरिक हस्तशिल्प हैं?
Deuri handloom products from which state got the GI tag, which are traditional handicrafts woven by the Deuri tribe for generations?

a. छत्तीसगढ़
b. मध्‍य प्रदेश
c. गुजरात
d. असम

Answer: d. असम

– देउरी हथकरघा उत्पाद, असम के देउरी जनजाति द्वारा पीढ़ियों से बुने जाने वाले पारंपरिक हस्तशिल्प हैं।
– अपनी अनूठी और पारंपरिक डिज़ाइन के लिए जाने जाते हैं।
– इन कपड़ों पर हाथों से जटिल और बारीक फूलों के डिज़ाइन (जैसे गामुसा पर) उकेरे जाते हैं, जो देउरी समुदाय की कलात्मक पहचान को दर्शाते हैं।
– इसमें गमछा (गामुसा), चादर, मेखला और अन्य पारंपरिक परिधान शामिल हैं जो मुख्य रूप से सूती या एरी सिल्क से बने होते हैं।

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5. झारखंड के किस जिले की प्रसिद्ध पारंपरिक ‘भगैया साड़ी एवं फैब्रिक’ को GI टैग मिला?
Which district of Jharkhand’s famous traditional Bhagaiya saree and fabric got the GI tag?

a. गोड्डा
b. बोकारो
c. चतरा
d. देवघर

Answer: a. गोड्डा

– 13 जून 2026 को GI टैग दिया गया।
– गोड्डा जिले का भगैया गांव अपनी हैंडलूम रेशम (तसर सिल्क) बुनाई के लिए ‘रेशम नगर’ के रूप में जाना जाता है।
– यह प्रीमियम तसर सिल्क से बनती है और अपनी बेजोड़ प्राकृतिक चमक, मुलायम बुनावट और लंबे समय तक चलने वाले स्थायित्व के लिए जानी जाती है।
– इसके फैब्रिक को पूरी तरह से हाथों और पैरों से चलने वाले पारंपरिक करघों (Handloom) पर बुना जाता है, जो इसे विशेष हस्तशिल्प की श्रेणी में रखता है।
– यह कपड़ा विशेष रूप से झारखंड के गोड्डा जिले (विशेषकर भगैया क्षेत्र) में ही पीढ़ियों से बसे स्थानीय बुनकरों द्वारा बनाया जाता है।
– इसका फैब्रिक हल्का और सांस लेने योग्यहोता है, जिस कारण इसे गर्मियों और सर्दियों दोनों मौसमों में आसानी से पहना जा सकता है।

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6. झारखंड के किस जिले की ‘कुचाई सिल्क साड़ी’ को GI टैग मिला?
Kuchai Silk saree from which district of Jharkhand got GI tag?

a. गोड्डा
b. सरायकेला-खरसावां
c. चतरा
d. देवघर

Answer: b. सरायकेला-खरसावां

– कुचाई सिल्क सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई क्षेत्र में उत्पादित होने वाला एक प्रसिद्ध प्राकृतिक टसर सिल्क है।
– अपनी विशिष्ट चमक, मजबूती और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया के लिए कुचाई सिल्क की साड़ियां लोकप्रिय हैं।
– यह सिल्क ‘तसर’ के कीड़ों से प्राप्त किया जाता है, जो मुख्य रूप से स्थानीय साल (Sal) और अर्जुन (Arjun) के पेड़ों पर पलते हैं।
– इस सिल्‍क का प्राकृतिक रंग और बनावट बेहद आकर्षक होती है।
– यह सिल्क अन्य क्षेत्रों (जैसे भागलपुर या वाराणसी) के सिल्क की तुलना में अधिक मजबूत और सख्त होता है।
– यह फैब्रिक काफी हल्का, और त्वचा के अनुकूल (eco-friendly) होता है।
– कुचाई गांव से शुरू हुई यह बुनाई कला अब पूरे झारखंड में फैल चुकी है।
– हजारों ग्रामीण, विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं को रोजगार देती है।

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7. किस राज्‍य के टसर सिल्क साड़ी उत्‍पाद को GI टैग मिला?
Tussar silk saree product of which state got GI tag?

a. आंध्र प्रदेश
b. पश्चिम बंगाल
c. झारखंड
d. बिहार

Answer: c. झारखंड

– झारखंड टसर सिल्क का भारत में सबसे बड़ा उत्पादक है।
– यहाँ के जंगलों में अर्जुन और आसन के पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पले रेशम के कीड़ों से यह शानदार और टिकाऊ रेशम तैयार किया जाता है।
– अपनी सुनहरी चमक और मजबूत बुनावट के लिए प्रसिद्ध, यह साड़ियां पर्यावरण-अनुकूल और बेहद आकर्षक होती हैं।
– यह अन्य रेशम (मलमल या शहतूत रेशम) की तुलना में थोड़ा खुरदरा, मोटा और छिद्रपूर्ण (porous) होता है, जो इसे सभी मौसमों में पहनने के लिए आरामदायक बनाता है।
– टसर साड़ियों पर पत्तियों, पेड़ों, फूलों और आदिवासी ज्यामितीय डिज़ाइनों का उत्कृष्ट काम होता है।
– इन साड़ियों पर पारंपरिक रूप से बाटिक , मधुबनी पेंटिंग और ब्लॉक प्रिंटिंग की जाती है, जिससे इनकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।

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8. झारखंड के किस जिले की पंची / पंचो साड़ी एवं फैब्रिक को GI टैग मिला?
Panchi/Pancho saree and fabric of which district of Jharkhand got GI tag?

a. दुमका
b. लातेहर
c. पलामू
d. बोकारो

Answer: a. दुमका

– पंची साड़ी एवं फैब्रिक, संथाल परगना क्षेत्र, विशेष रूप से दुमका जिले से संबंधित उत्पाद है।
– यह संथाल जनजाति की पारंपरिक पोशाक और बुनाई कला है।
– पंची (ऊपरी वस्त्र) और पारहन (निचला वस्त्र) संथाल महिलाओं की पारंपरिक पोशाक हैं।
– इसमें पारंपरिक संथाली आकृतियाँ, धारियाँ और सांस्कृतिक प्रतीक दिखाई देते हैं।
– स्थानीय कारीगर पारंपरिक तकनीकों से इसका निर्माण करते हैं।

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9. झारखंड के किस जिले की मिठाई ‘केसरिया कलाकंद’ को GI टैग मिला?
Which district of Jharkhand’s sweet ‘Kesariya Kalakand’ got the GI tag?

a. चतरा
b. गिरिडीह
c. कोडरमा (झुमरी तिलैया)
d. धनबाद

Answer: c. कोडरमा (झुमरी तिलैया)

– केसरिया कलाकंद झारखंड के कोडरमा (झुमरी तिलैया) की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई है।
– ये शुद्ध दूध, विशेष विधि से तैयार खोया और केसर की सुगंध से बनी ये मिठाई अन्‍य क्षेत्रों के कलाकंद से इसे अलग पहचान दिलाती है।
– यह झारखंड की पहली मिठाई है जिसे GI टैग प्राप्त हुआ है।
– GI टैग मिलने से इसकी ब्रांड वेल्‍यू बढ़ेगी।

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10. किस राज्‍य की लुप्तप्राय होती हस्‍तशिल्‍प कला ‘डोकरा क्राफ्ट’ को GI टैग मिला?
Which state’s endangered handicraft art ‘Dokra Craft’ got the GI tag?

a. असम
b. पश्चिम बंगाल
c. बिहार
d. झारखंड

Answer: d. झारखंड

– ये प्राचीन आदिवासी कला 4000 वर्ष पुरानी है।
– डोकरा एक अत्यंत प्राचीन ‘बेल मेटल’ (कांस्य) हस्तशिल्प है, जिसे लॉस्ट वैक्स कास्टिंग (खोई हुई मोम विधि) से बनाया जाता है।
– यह सिंधु घाटी सभ्यता (मोहनजो-दड़ो की ‘डांसिंग गर्ल’) के समय से चली आ रही दुनिया की अनूठी कला है।
– डोकरा की हर आकृति हाथ से बनाई जाती है और इन कलाकृतियों में कोई भी जोड़ या वेल्डिंग नहीं होती।
– इसे बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सांचे को केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसके कारण हर वस्तु यूनिक होती है।
– यह कला झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली का प्रतीक है।
– GI टैग मिलने से इस लुप्तप्राय होती कला को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

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11. झारखंड के किस जनजाति की पारंपरिक कठपुतली कला ‘चादर बादोनी’ और परिधान ‘दुमका चादर’ को GI टैग मिला?
Which tribe of Jharkhand’s traditional puppetry art ‘Chadar Badoni’ and costume ‘Dumka Chadar’ got the GI tag?

a. संथाल (Santhal)
b. मुंडा (Munda)
c. उरांव (Oraon)
d. हो (Ho)

Answer: a. संथाल (Santhal)

– झारखंड की उप-राजधानी दुमका और बड़े हिस्‍से में कहें तो संथाल परगना प्रमंडल का एक प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक केंद्र है।
– यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट आदिवासी (संथाल) कला और संस्कृति के लिए जाना जाता है।
– झारखंड में नाबार्ड (NABARD) और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों के प्रयासों से इन अनूठे उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) की मान्यता दी गई है।

चादर बदोनी

– इसे चादर बादर भी कहा जाता है, संथाल जनजाति की एक अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ कठपुतली (Puppetry) कला है।
– इसमें लकड़ी की छोटी-छोटी कठपुतलियों को रस्सी और लीवर के माध्यम से मांदर, ढोल और बांसुरी की थाप पर नचाया जाता है।
– यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि सामाजिक संदेश, त्योहारों की कहानियाँ और लोक-कथाएँ सुनाने का माध्यम भी है।
– यह कला विलुप्त होने की कगार पर है, जिसे अब सरकारी और गैर-सरकारी स्तरों पर संरक्षित किया जा रहा है।

संताल समुदाय के वस्त्र ‘दुमका चादर’
– यह संताल परगना क्षेत्र (विशेषकर दुमका जिला) के आदिवासी समुदाय का एक पारंपरिक परिधान (वस्त्र) है।
– विशेषता: इसे पारंपरिक करघों (Handlooms) पर बुना जाता है। इस चादर की बनावट, धागों का चयन और इस पर की जाने वाली बुनाई संताल संस्कृति के पारंपरिक डिज़ाइनों को प्रदर्शित करती है।
– महत्त्व: इसे स्थानीय स्तर पर रोज़मर्रा के जीवन के साथ-साथ विशेष सांस्कृतिक त्योहारों और सामाजिक उत्सवों में ओढ़ा जाता है।

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12. मुंडा आदिवासी समुदाय द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक शिल्पकला के लिए विश्व प्रसिद्ध किस राज्‍य के ‘मुंडा आभूषण’ को GI टैग मिला?
Munda jewellery from which state, world famous for its traditional handicrafts worn by the Munda tribal community, got the GI tag?

a. पश्चिम बंगाल
b. झारखंड
c. बिहार
d. ओडिशा

Answer: b. झारखंड

– मुंडा आभूषण अपनी अनूठी डिजाइन, प्रकृति-प्रेरित रूपांकनों (फूल, पत्ते, बीज) और पारंपरिक शिल्पकला के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
– यह मुंडा जनजाति की विशिष्ट पारंपरिक शिल्पकला का प्रतिनिधित्व करता है और इसकी पहचान किसी अन्य क्षेत्र के आभूषणों से अलग है।
– ये हस्तनिर्मित आभूषण चांदी, तांबे और अन्य धातुओं के होते हैं।
– मुंडा आभूषणों में बाल संवारने वाले खोंस, बाजूबंद और मनके वाली मालाएं शामिल हैं।
– मुंडा आभूषणों को उनकी प्रकृति-प्रेरित अनूठी डिजाइन, पारंपरिक जनजातीय शिल्पकला और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के लिए GI टैग दिया गया।

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13. किस राज्‍य की प्राचीन आदिवासी चित्रकला परंपरा, जादुपटुआ (या जादोपतिया) को GI टैग मिला?
Jadupatua (or Jadopatia), an ancient tribal painting tradition from which state, got the GI tag?

a. उत्‍तर प्रदेश
b. गुजरात
c. झारखंड
d. राजस्‍थान

Answer: c. झारखंड (यह चित्रकला संथाल जनजाति से संबंधित है)

– झारखंड के दुमका क्षेत्र में केंद्रित प्राचीन आदिवासी चित्रकला परंपरा है।
– जादुपटुआ नाम का अर्थ है “जादुई चित्रकार”। ये संथाल जनजाति से संबंधित हैं और वे पारंपरिक रूप से गांव-गांव घूमकर अपने हस्तलेख लेकर कहानियां सुनाते हैं, बीमारियों का इलाज करते हैं या आत्माओं को परलोक का मार्ग दिखाते हैं।
– कलाकार छोटी दो-पंक्ति वाली तुकबंदी (या पद्य ) के साथ ऊर्ध्वाधर स्क्रॉल कथाओं (पटा पेंटिंग) का उपयोग करते हैं।
– इनमें पूरी तरह से स्थानीय पत्तियों, फूलों, मिट्टी और कोयले से निकाले गए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है।

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14. किस राज्‍य की बरोनी पेंटिंग को जीआई टैग प्रदान किया गया?
Baroni painting of which state was given GI tag?

a. बिहार
b. गुजरात
c. झारखंड
d. राजस्‍थान

Answer: c. झारखंड

– यह मुख्य रूप से झारखंड की संताल (Santhal) और मुंडा (Munda) जनजातियों की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं से जुड़ी हुई है।
– यह चित्रकला झारखंड की जनजातीय विरासत, उनके रहन-सहन और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को बहुत ही खूबसूरती से कैनवास या दीवारों पर उकेरती है।
– इस चित्रकला में मुख्य रूप से स्थानीय रीति-रिवाज, आदिवासी सांस्कृतिक परंपराएं, घने जंगल, वन्यजीव और लोक देवी-देवताओं को दर्शाया जाता है। यह झारखंड के जनजातीय समाज के दैनिक जीवन और उनके लोकदर्शन का एक जीवंत दस्तावेज है।
– प्राकृतिक रंगों का उपयोग: सोहराई और जादोपटिया की तरह, पारंपरिक बरोनी पेंटिंग में भी रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक पिगमेंट (जैसे विभिन्न प्रकार की रंगीन मिट्टी, पत्तों का रस, पिसे हुए पत्थर, छाल और फूलों के अर्क) का इस्तेमाल किया जाता है।
– शैली (Style): इसकी शैली बेहद सरल लेकिन काफी प्रभावपूर्ण होती है, जिसमें रेखाचित्रों (Line Art) और स्थानीय लोक-प्रतीकों का भरपूर उपयोग किया जाता है।

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15. बिहार के किस जिले की सदियों पुरानी हस्‍तकरघा कला ‘बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक’ को GI टैग प्रदान किया गया?
The centuries-old handloom art ‘Bawan Buti Saree-Fabric’ of which district of Bihar was granted GI tag?

a. समस्‍तीपुर
b. सीतामढ़ी
c. पटना
d. नालंदा

Answer: d. नालंदा

– नालंदा के बसवान बीघा और निकटवर्ती क्षेत्रों की एक प्रसिद्ध हथकरघा वस्त्र-कला है।
– इस विशिष्ट वस्त्रकला में कपड़े पर 52 प्रकार के पारंपरिक बौद्ध एवं सांस्कृतिक प्रतीकों (बूटियों) को हाथकरघे पर बारीकी से बुना जाता है।
– इस कला का मुख्य केंद्र जिले का बसवन बिगहा और उसके आसपास का क्षेत्र है।
– यहां पीढ़ियों से बुनकर परिवार इस परंपरा को सहेजते आ रहे हैं।
– GI टैग मिलने से अब कोई भी बाहरी व्यक्ति नकली कपड़े को ‘बावन बूटी’ बताकर नहीं बेच सकेगा।

कपिलदेव प्रसाद को श्रेय
– बावन बूटी कला को राष्ट्रीय पटल पर लाने का सबसे बड़ा श्रेय बसवन बिगहा के रहने वाले बुनकर दिवंगत कपिलदेव प्रसाद को जाता है।
– वह 60 सालों से सूत कताई और बावन बूटी साड़ी निर्माण से जुड़े थे।
– भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया था।

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16. बिहार के किस जिले की पत्थरकट्टी पत्थर शिल्प को GI टैग मिला?
Pattharkatti stone craft of which district of Bihar got GI tag?

a. मोतिहारी
b. गया जी
c. मुजफ्फरपुर
d. सिवान

Answer: गया जी

– बिहार के गया जी जिले के पत्थरकट्टी गाँव की पाषाण शिल्प (पत्थर कला) अपनी अद्वितीय विरासत के लिए जानी जाती हैं।

पत्थरकट्टी पत्थर शिल्प

– इस कला की शुरुआत लगभग 1720 ईस्वी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा राजस्थान से बुलाए गए गौड़ परिवार को बसाने के साथ हुई थी।
– यहाँ के कलाकार मुख्य रूप से पहाड़ियों से निकलने वाले विशेष प्रकार के काले ग्रेनाइट और ‘कसौटी’ पत्थरों का उपयोग करते हैं। यह पत्थर बेहद मजबूत और मौसम-प्रतिरोधी होते हैं।
– स्थानीय नीले-काले ग्रेनाइट पत्थरों को तराश कर भगवान बुद्ध, महावीर, देवी-देवताओं की मूर्तियां और खरल (दवा कूटने का बर्तन) व अन्य सजावटी सामान बनाए जाते हैं।
– पत्थर की मूर्तियां इतनी मजबूत होती हैं कि सदियों तक मौसम की मार झेल सकती हैं।

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17. बिहार के किस जिले की प्राचीन लोककला ‘पीड़िया पेंटिंग’ को GI टैग मिला?
The ancient folk art Pidiya painting of which district of Bihar got the GI tag?

a. मोतिहारी
b. गया जी
c. भोजपुर
d. सिवान

Answer: c. भोजपुर

– पीड़िया पेंटिंग को GI टैग मिलना, सिर्फ भोजपुरी के एक कला शैली नहीं, बल्कि भोजपुरी अस्मिता, लोक परंपरा और भोजपुरी विरासत का एक बड़ा सम्मान है।
– पीड़िया भोजपुरी अंचल की पुरानी और बेहद महत्वपूर्ण पारंपरिक लोककला और भित्ति चित्र है।
– पीड़िया त्‍योहार भी है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और पारिवारिक संबंधों का प्रतीक मानी जाती है।
– यह परंपरा गोवर्धन पूजा में गोधन कुटने के दिन से शुरू होकर एक महीने तक चलती है। – गांव की लड़कियां व महिलाएं विशेष स्थान ( गौशाला, दालान, कोहबर, घर की दीवारों ) पर पीड़‍िया उकेरती हैं।
– गोबर, रंगनी के कांटे (टुंगल) व प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके लोक संस्कृति, प्रकृति और सामाजिक जीवन की झलक को उतारा जाता है।
– वे पारंपरिक गीत गाती हैं।

पहली बार रोहतास की बेटी ने दिलाया था पीड़िया को राष्ट्रीय पहचान
– रोहतास के दिनारा की बेटी और दावथ के डेढगांव की बहु विनीता ने शिल्प संग्रहालय, नई दिल्ली के मुख्य दरवाजे पर 10 फीट लंबा व छह फीट चौड़ा इस पीड़िया का भित्ति चित्र उकेर राष्ट्रीय पहचान दिलाई थी।
– उस समय इस भोजपुरी लोककला की उपस्थिति पहली बार देश की राजधानी में हुई थी।

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जून 2026 में GI टैग की लिस्‍ट

असम
– बांस शिल्प : असम
– कार्बी आंगलोंग हथकरघा उत्पाद : कार्बी आंगलोंग जिला, असम
– बिहू पेपा (वाद्य यंत्र) : असम
– देउरी हथकरघा : असम

झारखंड
– बांस शिल्प : झारखंड –
– भोया / भगैया साड़ी एवं फैब्रिक : गोड्डा, झारखंड –
– कुचाई सिल्क साड़ी : सरायकेला-खरसावां, झारखंड –
– टसर सिल्क साड़ी : झारखंड –
– पंची / पंचो साड़ी एवं फैब्रिक : दुमका, झारखंड –
– केसरिया कलाकंद : कोडरमा (झुमरी तिलैया), झारखंड –
– डोकरा क्राफ्ट : झारखंड –
– मुंडा आभूषण : झारखंड –
– कठपुतली कला ‘चादर बादोनी’ और संताल समुदाय के वस्त्र ‘दुमका चादर’ : झारखंड
– जादुपटुआ / जादोपतिया : झारखंड
– बरोनी पेंटिंग : झारखंड

बिहार
– बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक : नालंदा, बिहार
– पत्थरकट्टी पत्थर शिल्प : गया जी, बिहार
– पीड़िया पेंटिंग : भोजपुर, बिहार

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18. हेट स्पिच का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है?
When is the International Day for Countering Hate Speech observed?

a. 21 जून
b. 20 जून
c. 19 जून
d. 18 जून

Answer: d. 18 जून

– यह दिवस संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा घोषित है।
– संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, हेट स्पीच किसी भी प्रकार का भाषण या लेखन है, जो धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता, नस्ल, रंग, वंश, लिंग, या किसी अन्य पहचान कारक के आधार पर किसी व्यक्ति या समूह पर हमला करता है।

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19. राष्ट्रीय पठन दिवस कब मनाया जाता है?
When is National Reading Day celebrated?

a. 21 जून
b. 20 जून
c. 19 जून
d. 18 जून

Answer: c. 19 जून

क्‍यों मनाया जाता है यह दिवस
– केरल में पुस्‍तकालय आंदोलन के जनक और प्रसिद्ध शिक्षक पुथुवयिल नारायण पणिक्कर (PN पणिक्‍कर) को सम्‍मान देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
– 19 जून 1995 को उनका निधन हो गया था।
– 1996 में पहली बार उनकी पुण्यतिथि पर केरल रीडिंग डे मनाया गया था।
– 2017 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को राष्ट्रीय पठन दिवस (National Reading Day) के रूप में घोषित किया।

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20. संघर्ष में यौन हिंसा उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है?
When is the International Day for the Elimination of Sexual Violence in Conflict observed?

a. 21 जून
b. 20 जून
c. 19 जून
d. 18 जून

Answer: c. 19 जून

– संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 19 जून, 2015 को इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी।
– संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिन मनाया जाता है।

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21. विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस कब मनाया जाता है?
When is World Sickle Cell Awareness Day observed?

a. 18 जून
b. 19 जून
c. 20 जून
d. 21 जून

Answer: b. 19 जून

वर्ष 2026 की थीम
– जीवन रक्षा अंतर को कम करना: सिकल सेल रोग में समानता।
– Closing the Survival Gap: Equity in Sickle Cell Disease

– संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2008 को इस दिवस की घोषणा की थी।

सिकल सेल रोग क्‍या होता है?
– सिकल सेल रोग (एससीडी) या सिकल सेल एनीमिया लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की एक प्रमुख वंशानुगत असामान्यता (जेनेटिक इंबैलेंस) है।
– जिसमें इन लाल रक्त कोशिकाएं का आकार अर्धचंद्र/हंसिया(सिकल) जैसा हो जाता है।
– लाल रक्त कोशिकाएं कठोर और चिपचिपी हो जाती हैं।
– खून, नसों में फंस जाती हैं, जिससे शरीर के कई हिस्सों में ब्‍लड और ऑक्सीजन का फ्लो कम या रुक जाता है।
– बॉडी के ऑर्गन को परेशानी होती है।
– इससे एनीमिया या कहें तो खून की कमी हो जाती है।


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