यह 29 अप्रैल 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।
1. किस प्रमुख तेल उत्पादक देश ने अप्रैल 2026 में ओपेक (OPEC) और ओपेक प्लस (OPEC+) दोनों संगठनों से अलग होने की घोषणा की?
Which major oil-producing country announced its withdrawal from both OPEC and OPEC+ in April 2026?
a. सऊदी अरब
b. कुवैत
c. संयुक्त अरब अमीरात
d. कतर
Answer: c. संयुक्त अरब अमीरात
– संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 28 अप्रैल 2026 को OPEC (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) और OPEC+ से अलग होने का ऐलान कर दिया।
– यह फैसला ऐसे समय आया है जब तेल आपूर्ति पहले से ही Hormuz Strait में तनाव के कारण प्रभावित है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ऊर्जा संकट का दबाव बना हुआ है।
– यूएई का यह फैसला सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस संगठन के लिए एक बड़ा आघात माना जा रहा है।

UAE के अलग होने का मुख्य कारण
– यूएई के इस कदम के पीछे सुरक्षा और कूटनीतिक नाराजगी बड़ी वजह बताई जा रही है।
– यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने अरब देशों और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के हमलों के दौरान इन देशों का रुख राजनीतिक और सैन्य रूप से “ऐतिहासिक रूप से सबसे कमजोर” रहा है।
– सुरक्षा चिंताएं: ईरान के साथ जारी तनाव के बीच यूएई को लगा कि ओपेक के उसके साथी देश (विशेषकर सऊदी अरब) उसकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
– उत्पादन कोटा: पिछले कुछ समय से यूएई अपनी तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहता था, लेकिन ओपेक के कड़े नियमों और कोटे के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहा था।
ट्रम्प की जीत के रूप में देखा जा रहा फैसला:
– यूएई के इस कदम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
– ट्रम्प लंबे समय से ओपेक पर तेल की कीमतें बढ़ाकर दुनिया को “लूटने” का आरोप लगाते रहे हैं।
– उन्होंने खाड़ी देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता को तेल की कीमतों को कम रखने की शर्त से भी जोड़ा था।
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ओपेक (OPEC) क्या है और ओपेक प्लस (OPEC+) क्या है?

ओपेक (OPEC):
– पूरा नाम: पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (Organization of the Petroleum Exporting Countries)।
– स्थापना: 1960 में बगदाद में हुई थी।
– उद्देश्य: सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय करना और उपभोक्ताओं को तेल की कुशल, आर्थिक और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ तेल की कीमतों को स्थिर रखना।
– सदस्य देश : सऊदी अरब (संगठन का अघोषित नेता), इराक, कुवैत, ईरान, नाइजीरिया, अल्जीरिया, लीबिया, गैबॉन, कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, वेनेजुएला
ओपेक प्लस (OPEC+):
– ओपेक प्लस उन देशों का गठबंधन है जो ओपेक के सदस्य तो नहीं हैं, लेकिन तेल उत्पादन और निर्यात में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
– इसमें रूस, कजाकिस्तान, मैक्सिको और ओमान जैसे देश शामिल हैं। जब ओपेक देश रूस जैसे गैर-ओपेक देशों के साथ मिलकर उत्पादन घटाने या बढ़ाने का फैसला लेते हैं, तो उसे ‘ओपेक प्लस’ कहा जाता है।
कतर भी अलग हो चुका है
– कतर ने 1 जनवरी 2019 को ओपेक छोड़ दिया था। कतर का कहना था कि वह अपना ध्यान प्राकृतिक गैस (LNG) के उत्पादन पर केंद्रित करना चाहता है।
– हालांकि, पर्दे के पीछे सऊदी अरब और अन्य पड़ोसी देशों के साथ उसके खराब कूटनीतिक संबंध भी इसकी एक बड़ी वजह थे।
इस फैसले का वैश्विक प्रभाव
– तेल की कीमतों में अस्थिरता: यूएई दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है। इसके अलग होने से अब वह अपनी मर्जी से उत्पादन बढ़ा सकता है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट या अनिश्चितता आ सकती है।
– सऊदी अरब का वर्चस्व कम होना: ओपेक में अब तक सऊदी अरब की बात अंतिम मानी जाती थी। यूएई का बाहर निकलना सऊदी के नेतृत्व को एक खुली चुनौती है।
– ओपेक का कमजोर होना: कतर के बाद अब यूएई के जाने से इस संगठन की एकता खंडित हो गई है। अन्य छोटे देश भी अब अपनी स्वतंत्र नीतियां बना सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजार पर ओपेक का नियंत्रण कम हो जाएगा।
– भू-राजनीतिक बदलाव: यह कदम अमेरिका और यूएई के संबंधों को और करीब ला सकता है, जबकि रूस और सऊदी अरब के प्रभाव को तेल बाजार में कम कर सकता है।
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2. SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में (2026 में जारी), भारत वैश्विक सैन्य व्यय (military spending) में किस स्थान पर है?
According to a SIPRI report (released in 2026), what is India’s rank in global military spending in 2025?
a. पांचवें
b. चौथे
c. तीसरे
d. दूसरे
Answer: a. पांचवें
– भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है।
– वर्ष 2025 में भारत का सैन्य खर्च 8.9 प्रतिशत बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया।
– स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च 2,887 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
– 2024 में भी भारत पांचवें स्थान पर ही था।
– यह लगातार 11वां वर्ष है जब सैन्य खर्च में वृद्धि दर्ज की गई।

– भारत के रक्षा खर्च में वृद्धि की एक बड़ी वजह मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष बताया गया है।
– जिसमें लड़ाकू विमान, ड्रोन व मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ।
– इसके चलते पाकिस्तान का सैन्य खर्च भी 11 प्रतिशत बढ़कर 11.9 अरब डॉलर हो गया।
– अभी वह 31वें स्थान पर है।
– रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत हथियार खरीद में रूस से पीछे हट रहा है।
– फ्रांस, इजरायल और अमेरिका से ज्यादा खरीद कर रहा है। – लेकिन अभी भी रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है।
– 1 फरवरी, 2026 को सरकार ने बजट में रक्षा के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये अलग रखे।
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3. SIPRI की रिपोर्ट वर्ष 2025 (2026 में जारी) के अनुसार वैश्विक सैन्य व्यय में कौन सा देश प्रथम स्थान पर है?
According to the SIPRI report for the year 2025 (released in 2026), which country ranks first in global military expenditure?
a. चीन
b. अमेरिका
c. फ्रांस
d. रुस
Answer: b. अमेरिका
– संयुक्त राज्य अमेरिका 954 अमेरिकी डॉलर के सैन्य खर्च के साथ पहले स्थान पर है।
– रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का सैन्य खर्च 7.5 प्रतिशत घटकर 954 अरब डॉलर रहा, जिसका कारण यूक्रेन को नई वित्तीय सहायता का न मिलना बताया गया।
– उसके बाद भी वो नंबर वन पर है।
– चीन दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है।
– उसने 2025 में अपना रक्षा बजट 7.4 प्रतिशत बढ़ाकर 336 अरब डॉलर कर दिया।
– दुनिया की बात करें तो यूरोप का खर्च 14% बढ़कर 864 बिलियन डॉलर हो गया है।
– बेल्जियम, स्पेन, नॉर्वे, डेनमार्क, पोलैंड और कनाडा जैसे NATO देशों ने खर्च में भारी बढ़ोतरी की है।
– वैश्विक स्तर पर सैन्य खर्च का बोझ (जीडीपी के अनुपात में) 2.5 प्रतिशत तक पहुंच गया।
– जो 2009 के बाद सबसे अधिक है।
– प्रति व्यक्ति औसतन 352 डॉलर सैन्य खर्च किया गया।

शीर्ष 5 देश (2025)
– अमेरिका (954 अरब डॉलर)
– चीन (336 अरब डॉलर)
– रूस ($190 बिलियन)
– जर्मनी ($114 बिलियन)
– भारत (92.1 अरब डॉलर
SIPRI
– एक ऐसा संस्थान जो यह देखता है कि दुनिया के देश अपनी सेना पर कितना खर्च कर रहे हैं और यह शांति के लिए क्या मायने रखता है?
मुख्यालय: स्टॉकहोम (स्वीडन)
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4. एक दशक बाद चौथा भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन किस शहर में 28 से 31 मई 2026 तक आयोजित होगा?
In which city will the 4th India-Africa Forum Summit be held from May 28 to 31, 2026—a decade later?
a. लुआंडा (अंगोला)
b. नैरोबी (केन्या)
c. कंपाला (युगांडा)
d. नई दिल्ली (भारत)
Answer: d. नई दिल्ली (भारत)
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5. चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की थीम क्या है?
What is the theme of the 4th India-Africa Forum Summit?
a. IA SPIRIT – नवाचार, लचीलापन और समावेशी परिवर्तन के लिए भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी
b. IA भारत अफ्रीका
c. भारत अफ्रीका एक्शन
d. वन वर्ल्ड वन स्प्रिट
Answer: a. IA SPIRIT – नवाचार, लचीलापन और समावेशी परिवर्तन के लिए भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी (IA SPIRIT – India Africa Strategic Partnership for Innovation, Resilience and Inclusive Transformation)
– भारत-अफ्रीका फोरम समिट’ (IAFS-IV) आगामी 28 से 31 मई तक नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है।
– एक दशक से अधिक समय के इंतजार के बाद हो रहे इस शिखर सम्मेलन की तैयारियां चल रही हैं।
– विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 अप्रैल को चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS-IV) का लोगो, थीम और वेबसाइट लॉन्च किया।
– विदेश मंत्री ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत-अफ्रीका साझेदारी के अगले चरण को तय करेगा, जो अधिक महत्वाकांक्षी, समावेशी और भविष्य-उन्मुख होगा। इसके माध्यम से दोनों पक्ष आपसी अनुभव साझा करेंगे और साझा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

क्या है भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन?
– भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन को अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी का सर्वोच्च संस्थागत मंच माना जाता है।
– इसकी शुरुआत 2008 में हुई थी।
– इसमें व्यापार, निवेश, विकास सहयोग और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे शामिल हैं।
– इसमें अफ्रीकी संघ (African Union) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो अफ्रीका के 55 देशों का प्रतिनिधित्व करता है।
कब और कहां सम्मेलन हुआ?
– पहला सम्मेलन (2008, नई दिल्ली): दिल्ली घोषणा और सहयोग ढांचा अपनाया गया
– दूसरा सम्मेलन (2011, अदीस अबाबा): निवेश और ऋण प्रवाह पर जोर
– तीसरा सम्मेलन (2015, नई दिल्ली): सभी अफ्रीकी देशों की भागीदारी, वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुख
– चौथा सम्मेलन (2026): नई दिल्ली में आयोजन होगा। (इससे पहले 2020 में कोविड-19 के कारण स्थगित हो गया था, उसके बाद अब आयोजन हो रहा है)
वर्तमान भारत-अफ्रीका संबंध
– भारत और अफ्रीका के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। भारत आज अफ्रीका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है।
– 2015 में व्यापार: लगभग 75 अरब डॉलर
– 2025 में व्यापार: लगभग 103 अरब डॉलर
– भारत का निर्यात: 45 अरब डॉलर
– आयात: 58 अरब डॉलर
– भारत से प्रमुख निर्यात में ईंधन, ऑटोमोबाइल और दवाएं शामिल हैं, जबकि अफ्रीका से कच्चा तेल, हीरे, तांबा और खनिज आयात किए जाते हैं।
– इसके अलावा, भारत और अफ्रीका ने कई वैश्विक पहलों में भी साथ काम किया है, जैसे: इंटरेनशनल सोलर अलायंस (ISA), आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure), इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस
वैश्विक अनिश्चितता के बीच महत्व
– यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर कई संघर्ष और आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।
– अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अफ्रीकी देशों पर व्यापारिक दबाव और नीतिगत विवाद भी सामने आए हैं।
– अफ्रीका में भारत के लगभग 30 लाख प्रवासी रहते हैं, जो इस संबंध को आर्थिक ही नहीं बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं।
– यह समिट रक्षा, तकनीक और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों का गवाह बन सकता है।
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6. कैश कांड में महाभियोग प्रक्रिया झेल रहे किस जज ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया?
Which judge, currently facing impeachment proceedings in connection with the ‘Cash Scandal,’ has submitted his resignation to the President?
a. राकेश शर्मा
b. जयंती बोस
c. यशवंत वर्मा
d. राकेश दास
Answer: c. यशवंत वर्मा
– कैश कांड की वजह से चर्चा में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने 24 अप्रैल 2026 को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया।
– यह इस्तीफा उस समय आया है जब उनके खिलाफ संसद में महाभियोग (Impeachment) की कार्यवाही अंतिम चरणों में थी।

क्या है ‘कैश कांड’ का मुख्य मामला?
– जस्टिस यशवंत के कार्यकाल के दौरान उन पर ‘कैश फॉर जजमेंट’ (पैसों के बदले फैसला) के गंभीर आरोप लगे थे।
– आरोप: दरअसल, 14 मार्च 2025 को दिल्ली में उनके सरकारी आवास पर आग लग गई थी। जब फायर ब्रिगेड और पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां जली हुई और आधी जली ₹500 की नोटों की गड्डियां मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार बहुत बड़ी रकम (कई करोड़ रुपये) मौके पर मौजूद थी।
– जांच: नकदी एक स्टोर रूम/आउटहाउस में रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी ने कहा कि जज का उस जगह पर “प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण” था। इस कैश का कोई वैध स्रोत नहीं बताया गया। कमेटी ने इसे “मिसकंडक्ट (दुराचार)” माना और कार्रवाई की सिफारिश की।
– बचाव : जस्टिस यशवंत वर्मा आरोपों से साफ इनकार किया। कहा कि ह घटना के समय दिल्ली में नहीं थे। दावा किया कि न्हें इस पैसे के बारे में कोई जानकारी नहीं इसे उन्होंने “साजिश” बताया।
संसद में महाभियोग की कार्यवाही
– भारत के संविधान के अनुसार, किसी न्यायाधीश को हटाना एक जटिल प्रक्रिया है। न्यायमूर्ति यशवंत के मामले में संसद ने कड़ा रुख अपनाया था:
– जांच समिति: राज्यसभा के सभापति द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने आरोपों को सही पाया था।
– संसदीय बहस: संसद के सत्र के दौरान उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए नोटिस दिया गया था। सांसदों का तर्क था कि ऐसे गंभीर आरोपों के बाद उनका पद पर बने रहना न्यायपालिका की छवि को धूमिल कर रहा है।
– इस्तीफे का समय: जानकारों का मानना है कि संसद में वोटिंग के जरिए हटाए जाने की ‘जिल्लत’ से बचने के लिए उन्होंने वोटिंग से ठीक पहले अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया।
इस्तीफे का प्रभाव और आगे क्या?
– संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया उनके इस्तीफे के बाद तकनीकी रूप से रुक सकती है, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में आपराधिक जांच जारी रह सकती है।
– न्यायिक शुचिता: यह मामला फिर से जजों की नियुक्ति और उन पर निगरानी रखने वाली कोलेजियम प्रणाली पर बहस छेड़ सकता है।
– कानूनी कार्रवाई: खबरों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई (CBI) अब उनके वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर सकती हैं, क्योंकि अब उन्हें न्यायाधीश के रूप में मिलने वाली सुरक्षा (Immunity) प्राप्त नहीं होगी।
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7. किस अफ्रीकी देश में आतंकी और विद्रोहियों के एकसाथ हमले व हिंसा की वजह से भारत सरकार ने अप्रैल 2026 में वहां अपने नागरिकों को घरों में रहने की एडवाइजरी जारी की?
In which African country did the Government of India issue an advisory in April 2026, urging its citizens to stay indoors, due to simultaneous attacks by terrorists and rebels?
a. दक्षिण अफ्रीका
b. माली
c. लीबिया
d. मोजांबिक
Answer: b. माली

– पश्चिम अफ्रीकी देश माली में हालिया सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए सतर्कता सलाह (advisory) जारी की।
– भारतीय दूतावास, बमाको ने वहां रह रहे भारतीयों से अत्यधिक सावधानी बरतने और घरों के अंदर रहने की अपील की है।
क्या हुआ माली में
– 25 अप्रैल 2026 की सुबह देश के कई शहरों—बमाको, काटी, गाओ, मोप्ती, सेवारे में एक साथ हमले हुए।
– इसमें माली के रक्षा मंत्री कर्नल सादियो कैमारा की भी मौत हो गई।
– यह कोई सामान्य हिंसा नहीं, बल्कि देशभर में एक साथ कोऑर्डिनेटेड आतंकी + विद्रोही हमले थे।
– काटी (Kati) जो राजधानी के पास मुख्य सैन्य बेस है, वहां भारी धमाके और गोलीबारी हुई।
– हमलावरों ने माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा के घर पर कार बम से हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई।
किसने हमला किया
– हमले के पीछे मुख्य रूप से JNIM (अल-कायदा से जुड़ा आतंकी संगठन)
तुआरेग अलगाववादी (FLA), इन दोनों ने मिलकर हमला किया। यह अपने आप में बड़ा और खतरनाक संकेत है।
हमला कितना बड़ा था
– यह माली के हाल के इतिहास के सबसे कोऑर्डिनेटेड हमलों में से एक माना जा रहा है।
– कई जगहों पर सैन्य ठिकाने कब्जे में लिए गए, कुछ शहरों/इलाकों पर अस्थायी नियंत्रण भी कर लिया गया, ड्रोन, कार बम और भारी हथियारों का इस्तेमाल हुआ।
– माली में लगभग अर्ध-आपात स्थिति जैसा माहौल।
– कई शहरों में लड़ाई चल रही है — इसलिए हालात बेहद गंभीर हैं।
माली
– राजधानी – बामाको
– सैन्य सरकार: अगस्त 2020 और मई 2021 में तख्तापलट के बाद, कर्नल अस्सिमी गोइता की अगुवाई में सैन्य सरकार (नेशनल कमेटी फॉर साल्वेशन ऑफ पीपल) देश का शासन चला रही है।
– राष्ट्रपति : सैन्य अधिकारी अस्सिमी गोइता
– प्रधानमंत्री : अब्दौले माइगा (अंतरिम)
विशेषज्ञ की राय
– वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश के रे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है –
– माली में राष्ट्रवादी क्रांतिकारी सैनिक शासन आने के बाद फ़्रांस के सैनिकों की वापसी हुई है और फ़्रांस का नियंत्रण ख़त्म हुआ है, लेकिन इसके साथ ही, अल-क़ायदा गिरोहों के हमले बढ़े हैं.
– ज़ाहिर है, हमेशा की तरह इस्लाम के नाम पर चल रहे आतंकी गिरोहों का इस्तेमाल पश्चिमी देश कर रहे हैं.
– तीन साल पहले माली से फ़्रांसीसी और संयुक्त राष्ट्र के सैनिकों की वापसी हो चुकी है. इस्लामिक आतंक रोकने के बहाने यह सब सैनिक तैनाती असल में संसाधनों की लूट का बहाना होती हैं.
– इसे सरल शब्दों में ऐसे समझा जाए. माली पर सदियों तक फ़्रांस का दख़ल रहा. अन्य उपनिवेशों की तरह स्वतंत्रता के बाद भी माली में फ़्रांस का दबदबा बना रहा. इसका कारण यह है कि लूट जारी रहे.
– दुनिया में सबसे अधिक सोने का रिज़र्व अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ़्रांस और रूस के पास है.
– इस मामले में चौथे स्थान पर स्थित फ़्रांस के पास बीते दो दशकों में औसतन 26 सौ टन से अधिक सोना है. दिलचस्प यह है कि फ़्रांस में केवल एक जगह मामूली मात्रा में सोने की खुदाई होती है और कुछ बाहर के उसके औपनिवेशिक द्वीपों पर खुदाई होती है.
– अब सवाल यह है कि इसके बाद भी उसके पास इतना सोना कैसे है. इसका उत्तर यह है कि इसका अधिकांश माली का लूटा हुआ सोना है. माली में सोने के सैकड़ों खदान हैं, जो सालाना 50 टन से अधिक सोना पैदा करते हैं.
– यह भी कहना ज़रूरी है कि माली में फ़्रांसीसी और संयुक्त राष्ट्र के सैनिकों की तैनाती के बाद वहाँ हिंसक घटनाएँ बेतहाशा बढ़ी थीं.
– फिर भी सोने के उत्पादन पर असर नहीं हुआ था. ठीक उसी तरह, जैसे इराक़ में इस्लामिक स्टेट के दौर में भी वहाँ से भारी मात्रा में तेल बेचा जाता रहा. ऐसा ही लीबिया में होता रहा है.
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8. किस देश में किस अफ्रीकी देश में अप्रैल 2026 में आतंकी और विद्रोहियों ने एकसाथ हमले व हिंसा करके कई सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया, इस दौरान वहां के रक्षा मंत्री की हत्या हो गई?
In which African country did terrorists and rebels launch simultaneous attacks and acts of violence in April 2026, seizing control of several military bases—an event during which the country’s Defense Minister was assassinated?
a. दक्षिण अफ्रीका
b. माली
c. लीबिया
d. मोजांबिक
Answer: b. माली
– रक्षा मंत्री कर्नल सादियो कैमारा की हत्या
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9. भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA समझौता हुआ, इसके तहत पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करके कितना करने का लक्ष्य है?
An FTA agreement has been signed between India and New Zealand; under this agreement, what is the target for bilateral trade after doubling it over a period of five years?
a. 1 अरब अमेरिकी डॉलर
b. 3 अरब अमेरिकी डॉलर
c. 5 अरब अमेरिकी डॉलर
d. 15 अरब अमेरिकी डॉलर
Answer: c. 5 अरब अमेरिकी डॉलर

– भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
– इसका उद्देश्य बाजार पहुंच का विस्तार करके, शुल्क कम करके और वस्तुओं, सेवाओं और श्रम गतिशीलता में सहयोग बढ़ाकर पांच वर्षों में व्यापार को दोगुना करके 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।
– दोनों देशों में सभी घरेलू प्रक्रियाओं के पूरा होने और अनुमोदन के बाद यह मुक्त व्यापार समझौता लागू होगा।
100% टैरिफ मुक्त व्यापार
– भारत-न्यूजीलैंड FTA 100% शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, लघु एवं मध्यम उद्यमों, सेवाओं और आवागमन को बढ़ावा देता है, और इसमें 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है, जिससे व्यापार और आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।
– यह भारत-प्रशांत सहयोग को बढ़ाता है और भारत के वैश्विक व्यापार में अपनी उपस्थिति का विस्तार करता है।
प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
भारतीय निर्यात के लिए बाजार पहुंच:
– यह FTA न्यूजीलैंड में भारतीय निर्यात को 100% शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों और कपड़ा, चमड़ा और इंजीनियरिंग सामान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा मिलता है ।
– यह पहले के शुल्कों (10% तक) को हटाता है और समान अवसर सुनिश्चित करता है।
– भारत को लकड़ी, कोकिंग कोयला और धातु के स्क्रैप जैसे प्रमुख इनपुट पर शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होती है, जिससे लागत कम होती है और विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलता है।
– न्यूजीलैंड के लिए संतुलित बाजार पहुंच: भारत ने 70.03% टैरिफ लाइनों (द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के लगभग 95% को कवर करते हुए) पर टैरिफ उदारीकरण की पेशकश की है।
– इनमें से 30% लाइनों पर शुल्क तत्काल समाप्त कर दिया जाएगा, जबकि शेष लाइनों पर 3 से 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से शुल्क में कटौती की जाएगी।
संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों का संरक्षण
– घरेलू किसानों और उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए, भारत ने 29.97% टैरिफ लाइनों को बहिष्करण सूची (exclusion list) में रखा है।
– इसमें सभी दुग्ध उत्पाद (दूध, पनीर, दही आदि), संवेदनशील कृषि उत्पाद (प्याज, मटर, मक्का), हथियार और गोला-बारूद, और विशिष्ट रत्न और आभूषण शामिल हैं।
भारी निवेश प्रतिबद्धता:
– न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की बाध्यकारी प्रतिबद्धता जताई है ।
सेवा क्षेत्र:
– न्यूजीलैंड 118 सेवा क्षेत्रों (आईटी, शिक्षा, वित्त, पर्यटन, आदि) में बाजार पहुंच प्रदान करता है, साथ ही 139 उप-क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) प्रतिबद्धताएं भी प्रदान करता है, जिससे भारतीय पेशेवरों, महिलाओं और युवाओं के लिए अवसरों को बढ़ावा मिलता है।
गतिशीलता (मोबिलिटी) और रोजगार के अवसर
– एफटीए ने आईटी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा (3 साल तक) के साथ भारतीयों के लिए नए रास्ते बनाए हैं।
– यह भारतीय छात्रों पर लगी सीमा को हटाता है, अध्ययन के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने की अनुमति देता है, अध्ययन के बाद 3-4 साल तक काम करने का अधिकार प्रदान करता है , और इसमें वर्किंग हॉलिडे वीजा शामिल है, जिससे वैश्विक अनुभव और कौशल गतिशीलता को बढ़ावा मिलता है।
कृषि उत्पादकता एवं किसान सहायता / MRA:
– यह FTA उत्कृष्टता केंद्रों, बेहतर रोपण सामग्री, अनुसंधान और तकनीकी सहायता के माध्यम से कृषि विकास को बढ़ावा देता है ताकि उत्पादकता, आपूर्ति श्रृंखला और किसानों की आय में सुधार हो सके।
– सेब, कीवी, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसे आयात को मूल्य सुरक्षा उपायों के साथ टैरिफ दर कोटा के माध्यम से विनियमित (Regulate) किया जाएगा, जिससे घरेलू किसानों की सुरक्षा के साथ-साथ बाजार तक पहुंच सुनिश्चित होती है।
– यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) साझा मानकों (ऑस्ट्रेलिया के माध्यम से) पर आधारित पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (MRA – Mutual Recognition Arrangement ) को सक्षम बनाता है, जिससे न्यूजीलैंड को बासमती चावल, चाय और तिलहन जैसे भारतीय ऑर्गेनिक प्रोडक्ट के निर्यात को बढ़ावा मिलता है।
– MRA के तहत, एक देश का नियामक प्राधिकरण दूसरे देश की प्रयोगशालाओं या निरीक्षण निकायों की रिपोर्टों पर भरोसा करता है।
– भारत 80 से अधिक ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का निर्यात करता है, जिसमें न्यूजीलैंड को निर्यात 2,401.53 मीट्रिक टन है और MRA के तहत इसमें और वृद्धि होने की उम्मीद है, विशेष रूप से बासमती चावल, चाय, अलसी के बीज और इसबगोल जैसी वस्तुओं का।
बौद्धिक संपदा अधिकार:
– न्यूजीलैंड 18 महीनों के भीतर अपने भौगोलिक संकेत (GI) कानून में संशोधन करेगा ताकि भारतीय वस्तुओं को शराब और स्पिरिट के अलावा अन्य वस्तुओं का भी संरक्षण मिल सके।
– इससे उसके बाजार में प्रतिष्ठित भारतीय GI टैग वाले उत्पादों का रजिस्ट्रेशन संभव हो सके।
– मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वास्तविक मूल्यवर्धन सुनिश्चित करने के लिए सख्त, ‘उत्पाद-विशिष्ट उत्पत्ति नियम’ (PSRs – Product Specific Rules of Origin) स्थापित करता है, जो दुरुपयोग को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन तंत्र और सुरक्षा उपायों द्वारा समर्थित है कि लाभ प्रामाणिक भारतीय निर्यातकों तक पहुंचे।
व्यापार सुविधा एवं सीमा शुल्क:
– FTA 24-48 घंटे में कार्गो क्लीयरेंस, पेपरलेस सिस्टम और अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर तंत्र के माध्यम से तेज और पारदर्शी व्यापार को सक्षम बनाता है।
– इसके साथ ही निर्यात मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंपोर्ट प्रोसेसिंग को तेज करता है, जिससे MSME को बढ़ावा मिलता है और दक्षता बढ़ती है।
सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान सहयोग:
– FTA में आयुष, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, ऑडियो-विजुअल और रचनात्मक उद्योगों, खेल और पर्यटन को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय नवाचार को मजबूत करने की बात है।
भारत-न्यूजीलैंड संबंध कैसे हैं?
– औपचारिक राजनयिक संबंध 1952 में स्थापित हुए थे। दोनों राष्ट्र राष्ट्रमंडल के सदस्य होने, जीवंत लोकतंत्र होने, सामान्य कानून प्रथाओं का पालन करने और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के समर्थक होने के नाते समानताओं को साझा करते हैं।
– व्यापार: वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 2024 में 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत न्यूजीलैंड से ऊन, लोहा और इस्पात, फल और मेवे तथा एल्युमीनियम आयात करता है, जबकि फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, वस्त्र तथा कीमती पत्थर और धातुएं निर्यात करता है।
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10. अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस कब मनाया जाता है?
When is International Dance Day celebrated?
a. 25 अप्रैल
b. 27 अप्रैल
c. 28 अप्रैल
d. 29 अप्रैल
Answer: d. 29 अप्रैल
– नृत्य के मूल्य और महत्व का जश्न मनाया जाता है।
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11. एक्टर भरत कपूर का निधन 27 अप्रैल 2026 को हो गया, बतौर विलेन उनकी पहली मूवी कौन सी थी?
Actor Bharat Kapoor passed away on April 27, 2026. What was his first movie?
a. बाजार
b. आखिरी रास्ता
c. नूरी
d. राम बलराम
Answer: c. नूरी
– 80 वर्षीय भरत कपूर का निधन मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण हुआ।
– उन्होंने 1972 में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी।
– वर्ष 1979 में रिलीज हुई नूरी साल की सातवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी।
– बतौर विलेन भरत कपूर को सिनेमा में पहचान मिली।
– फिल्म नूरी में उन्होंने बशीर खान नाम के विलेन का रोल प्ले किया था।
ये मूवीज रहीं खास
– राम बलराम (1980), लव स्टोरी (1981), बाजार (1982), गुलामी (1985), आखिरी रास्ता (1986), सत्यमेव जयते (1987), स्वर्ग (1990), खुदा गवाह (1992), रंग (1993), बरसात (1995), साजन चले ससुराल (1996) और मीनाक्षी: अ टेल ऑफ थ्री सिटीज (2004)।
इन टीवी शोज में किया काम
– कैम्पस, परंपरा, राहत, सांस, अमानत, तारा, चुनौती और कहानी चंद्रकांता।
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12. शोधकर्ताओं ने भारत में कूदने वाली मकड़ियों की दो नई प्रजातियों की खोज की, इनका क्या नाम है?
Researchers have discovered two new species of jumping spiders in India; what are their names?
a. मोग्रस
b. मोग्रस शुश्का
c. मोग्रस पुणे
d. b और c
Answer: d. b और c
– ये मकड़ियां राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में पाई गईं।
– यूरोपियन जर्नल ऑफ टैक्सोनॉमी में प्रकाशित अनुसंधान के माध्यम से इस खोज की पुष्टि की गई।
– जिसका शीर्षक था “दो नई मोग्रस प्रजातियों (अरानेए: साल्टिसिडे) की खोज और भारत से उल्लेखनीय रिकॉर्ड”।
– वैज्ञानिकों ने प्रजनन संरचनाओं पर स्टडी कर, इन मकड़ियों को “मोग्रस” जीनस की अन्य निकट संबंधी प्रजातियों से अलग किया।
-“मोग्रस शुष्का” की खोज राजस्थान और गुजरात के शुष्क और बंजर क्षेत्रों में हुई, जो उच्च तापमान और कम नमी के लिए जाने जाते हैं। -“मोग्रस पुणे” महाराष्ट्र के शहरी जैव विविधता पार्कों में पाया गया।
– दोनों मकड़ियां एक ही कूदने वाली मकड़ी परिवार से संबंधित हैं, – मुख्य अंतर इनके प्रजनन अंगों में है।
– एक प्रजाति में नर का प्रजनन अंग त्रिकोणीय आकार का होता है।
– जबकि दूसरी में घुमावदार या हृदय के आकार का होता है।



