यह 17 & 18 अप्रैल 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।
1. 131वां संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए किस तरह के बहुमत की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में लोकसभा में यह खारिज हो गया?
What type of majority was required to pass the 131st Constitutional Amendment Bill—the absence of which led to its rejection in the Lok Sabha?
a. पूर्ण बहुमत
b. विशेष बहुमत
c. साधारण बहुमत
d. इनमें से कोई नहीं
Answer: b. विशेष बहुमत (कुल का 50% + उपस्थित का 2/3)
(नोट – यह विधेयक चूकि राज्यों के प्रतिनिधि को प्रभावित करने वाला था, इसलिए दूसरे चरण में कम से कम आधे से अधिक राज्यों की विधानसभा की भी अनुमति जरूरी थी।)

– परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा 131वें संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिर गया।
– बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े।
– लोकसभा में 489 सांसदों ने वोट डाले।
– चूकि यह संविधान संशोधन बिल था, इसलिए इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 489 का दो तिहाई 326 होता है।
– इस तरह बहुमत नहीं मिलने से ये बिल पास 28 वोट से गिर गया।
– लगभग 12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई।
– इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा था कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। विपक्ष अगर वोट नहीं देगा तो बिल गिर जाएगा। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
– इन संशोधित बिलों पर लोकसभा में 21 घंटे चर्चा हुई।
– 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित न होने पर सरकार ने बाकी दो बिल पटल पर रखने से इनकार कर दिया।
– ये बिल थे “परिसीमन (संशोधन) विधेयक, 2026” और “केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026”
131वें संविधान संशोधन बिल क्या था?

– यह बिल मुख्य रूप से परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लाया गया था। इसके दो मुख्य उद्देश्य थे:
– लोकसभा की सीटों में भारी बढ़ोतरी: बिल में लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था (815 राज्यों से और 35 केंद्र शासित प्रदेशों से)।
– महिला आरक्षण का समय: सरकार चाहती थी कि 2023 में पास हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (33% आरक्षण) को 2029 के चुनावों से ही लागू कर दिया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन करने का प्रस्ताव था।
बिल क्यों लाया गया?

– सीटों का फ्रीज हटाना: 2001 के 84वें संशोधन के अनुसार, लोकसभा सीटों की संख्या 2026 तक के लिए फ्रीज थी। सरकार इस ‘फ्रीज’ को हटाकर जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती थी। दरअसल, 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान यह संशोधन लाया गया था। इसका मुख्य तर्क यह था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण (Family Planning) में अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्हें सीटों की संख्या घटने का नुकसान न हो। इसलिए सीटों के निर्धारण का आधार 1971 की जनगणना को ही बनाए रखा गया। पहली बार इसे इंदिरा गांधी सरकार में 42वां संशोधन अधिनियम, 1976 के जरिए फ्रीज किया गया था।
– महिला आरक्षण में तेजी: पिछला कानून कहता था कि आरक्षण नई जनगणना के बाद ही लागू होगा। इस नए बिल (131वां संशोधन) के जरिए सरकार उस शर्त को बदलकर इसे जल्द लागू करना चाहती थी।
विरोध क्यों हुआ?
– विपक्ष (INDIA गठबंधन) और विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों के दलों ने इसका कड़ा विरोध किया। उनके मुख्य तर्क थे:
– दक्षिण भारत को नुकसान: अगर जनसंख्या के आधार पर सीटें 850 की गईं, तो उत्तर भारतीय राज्यों (जहां जनसंख्या वृद्धि अधिक है) की सीटें बहुत बढ़ जाएंगी, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों (जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण किया है) का राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा।
– संघवाद पर हमला: विपक्ष ने इसे ‘Anti-Federal’ (संघवाद विरोधी) बताया।
– राजनीतिक लाभ: राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का आरोप था कि यह महिला आरक्षण के नाम पर देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है।
अनुच्छेद 368
– संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत, किसी भी संविधान संशोधन बिल को पास करने के लिए ‘विशेष बहुमत’ (Special Majority) की आवश्यकता होती है। इसके दो चरण होते हैं और बिल को इन दोनों शर्तों को एक साथ पूरा करना पड़ता है:

1) कुल सदस्यता का बहुमत (Absolute Majority)
– सदन की जो कुल स्ट्रेंथ है, उसके आधे से ज़्यादा वोट पक्ष में होने चाहिए।
– उदाहरण: मान लीजिए लोकसभा में 543 सीटें हैं। तो बिल को पास होने के लिए कम से कम 272 वोट (543 का आधा + 1) पक्ष में होने ही चाहिए, चाहे उस दिन सदन में कितने भी लोग आए हों।
2) उपस्थित और मतदान करने वालों का दो-तिहाई
– यह वह शर्त है जिस पर बिल (131वां संशोधन) गिर गया। इसका मतलब है कि वोटिंग के समय जितने सांसद सदन में मौजूद हैं, उनमें से 66.6% का समर्थन जरूरी है।
यह बहुमत इतना कठिन क्यों है?
– संविधान निर्माताओं ने इसे कठिन इसलिए बनाया ताकि कोई भी सरकार केवल अपनी सनक या कम बहुमत के दम पर देश के बुनियादी ढांचे (Constitution) को न बदल सके। इसके लिए विपक्ष की सहमति या बहुत बड़ा जनादेश होना जरूरी है।
बहुमत के प्रकार (एक नज़र में)

बहुमत का प्रकार : कहाँ इस्तेमाल होता है? : क्या है नियम?
– साधारण बहुमत : नए राज्य बनाना, सामान्य कानून : उपस्थित लोगों का 50% + 1
– विशेष बहुमत : संविधान संशोधन (Art. 368), जज को हटाना : कुल का 50% + उपस्थित का 2/3
(नोट – यह विधेयक चूकि राज्यों के प्रतिनिधि को प्रभावित करने वाला था, इसलिए दूसरे चरण में कम से कम आधे से अधिक राज्यों की विधानसभा की भी अनुमति जरूरी थी।)
दो तिहाई का आंकड़ा नहीं जुटा पाई
– 131वां बिल इसलिए गिरा क्योंकि सरकार ‘उपस्थित और मतदान करने वालों का दो-तिहाई’ का आंकड़ा नहीं छू पाई।
– भले ही उनके पास 298 वोट थे (जो कि 272 के सामान्य बहुमत के आंकड़े से ज्यादा थे), लेकिन विशेष बहुमत के नजरिए से 489 की उपस्थिति के हिसाब से उन्हें 326 वोट चाहिए थे।
– यही वह ‘संसदीय गणित’ है जिसे अमित शाह भांप गए थे और इसीलिए उन्होंने जिम्मेदारी विपक्ष पर डाली थी। क्या आप यह जानना चाहेंगे कि किन राज्यों के विरोध ने इस गणित को सबसे ज्यादा प्रभावित किया?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) और संविधान संशोधन बिल में क्या फर्क था
– इसने सिर्फ यह नियम बनाया कि संसद में 33% महिलाएं होंगी। लेकिन यह नहीं बताया कि लोकसभा में कुल सीटें कितनी होंगी। इसमें एक ‘शर्त’ थी कि आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) होगा। इसके लागू होने की कोई निश्चित तारीख नहीं थी। यह भविष्य की जनगणना पर निर्भर था।
– 131वां संशोधन बिल (2026): यह बिल उस परिसीमन को करने के लिए लाया गया था। इसने प्रस्ताव दिया कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 कर दी जाएं। सरकार का तर्क था कि जब सीटें बढ़ेंगी, तभी पुरुषों की सीटें घटाए बिना महिलाओं को 33% आरक्षण देना आसान होगा। सरकार चाहती थी कि 2029 के आम चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू हो जाए। इसके लिए उन्होंने 2011 की पुरानी जनगणना को ही आधार मानकर परिसीमन करने की कोशिश की थी, जिसे विपक्ष ने ‘असंवैधानिक’ बताया।
– ‘उत्तर बनाम दक्षिण’ का विवाद : 2023 के बिल पर लगभग सभी दल सहमत थे क्योंकि वह सिर्फ एक ‘सिद्धांत’ था। जबकि 2026 के बिल में जब 850 सीटों की बात आई, तो दक्षिण भारतीय राज्य भड़क गए। उनका कहना था कि यदि जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ीं, तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सीटें बहुत बढ़ जाएंगी और दक्षिण भारत (जिसने जनसंख्या नियंत्रण किया है) की राजनीति में आवाज कम हो जाएगी।
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2. संयुक्त राष्ट्र की किस एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष से भारत में 25 लाख लोगों के गरीबी में जाने का खतरा है?
According to a report by which United Nations agency, military conflict in West Asia poses a risk of pushing 2.5 million people in India into poverty?
a. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
b. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)
c. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
d. विश्व बैंक (WB)
Answer: a. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
UNDP की रिपोर्ट का नाम
– मिलिट्री एस्केलेशन इन द मिडिल ईस्ट: ह्यूमन डेवलपमेंट इम्पैक्ट्स अक्रॉस एशिया एंड द पैसिफिक
– रिपोर्ट 14 अप्रैल, 2026 को जारी की गई है।
UNDP रिपोर्ट के तथ्य

– पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष से भू-राजनीतिक तनाव पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मानव विकास और आजीविका पर भारी दबाव डाल रहा है।
वैश्विक स्तर पर 88 लाख लोगों के गरीबी में जाने का जोखिम है।
– एशिया-प्रशांत क्षेत्र को 299 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
– भारत की गरीबी दर 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 प्रतिशत हो जाएगी।
– भारत में गरीबी लगभग 4,00,000 से बढ़कर 25 लाख होने की आशंका है।
– भारत को अपने मानव विकास सूचकांक (HDI) की प्रगति में भी 0.03 से 0.12 वर्ष का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भारत ऊर्जा आयात पर निर्भर है
– भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात (import) पर निर्भर है।
– देश अपनी कुल तेल जरूरतों का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है।
– इसमें 40 प्रतिशत क्रूड ऑयल और 90 प्रतिशत एलपीजी पश्चिम एशिया से आता है।
– रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य संकट के कारण माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि हुई है।
– इसका सीधा असर भारत के 48 अरब डॉलर के गैर-तेल निर्यात पर पड़ रहा है।
– जिस निर्यात में बासमती चावल, चाय, रत्न और आभूषण तथा परिधान हैं।
महंगे आयात के कारण व्यापार बंद होने का जोखिम
– भारत का लगभग 90 प्रतिशत रोजगार असंगठित क्षेत्र में है।
– महंगे आयात और आपूर्ति की कमी के कारण खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण सामग्री और रत्न निर्माण से जुड़े छोटे उद्योगों में लागत बढ़ रही है।
– इससे काम के घंटे कम होने, छंटनी होने और व्यापार बंद होने का जोखिम है।
– होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधान के कारण चिकित्सा उपकरणों के लिए कच्चे माल की लागत 50 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है।
– वहीं, दवाओं की थोक कीमतों में पहले ही 10-15 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है।
– भारत अपना 45 प्रतिशत से अधिक उर्वरक आयात पश्चिम एशिया से करता है।
– रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि यह व्यवधान जून में शुरू होने वाले खरीफ सीजन (मानसून की फसल) तक जारी रहता है, तो कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा।
– हालांकि अभी 61.14 लाख टन यूरिया का बफर स्टॉक कुछ राहत दे सकता है।
– खाड़ी देशों में काम करने वाले 93.7 लाख भारतीय देश के कुल रेमिटेंस का 38-40 प्रतिशत हिस्सा भारत भेजते हैं।
– वहां आर्थिक मंदी के कारण इन प्रवासियों की आय प्रभावित होने का अनुमान है।
– जिसका सीधा असर भारत में उनके परिवारों की घरेलू आय पर पड़ेगा।
IMF ने भी जताई चिंता
– IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष के कारण संस्था द्वारा इस वर्ष के वैश्विक आर्थिक विकास के पूर्वानुमान में कटौती की जाएगी।
– इस कड़े भू-राजनीतिक झटके ने विश्व स्तर पर तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है।
– इससे ऊर्जा आयातकों और कम आय वाले देशों पर असमान प्रभाव पड़ा है।
UNDP अध्यक्ष: अलेक्जेंडर डी क्रू
मुख्यालय: न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका)
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3. FIDE विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला कौन बनीं?
Who became the first Indian woman to win the FIDE Women’s Candidates Tournament 2026 title?
a. बिबिसारा असौबायेवा
b. कैटरिना लग्नो
c. वैशाली रमेशबाबू
d. कोनेरू हम्पी
Answer: c. वैशाली रमेशबाबू
– उन्होंने 15 अप्रैल को साइप्रस के कैप सेंट जॉर्ज होटल में खेले गए फाइनल राउंड में ये खिताब अपने नाम किया। – वैशाली ने फाइनल राउंड में सफेद मोहरों से खेलते हुए रूस की अनुभवी खिलाड़ी कैटरिना लग्नो को हराया।
– 24 वर्ष की वैशाली कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
– अब वे वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीन की मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जू वेनजुन को चुनौती देंगी।
– वैशाली टूर्नामेंट में सबसे कम रेटिंग वाली खिलाड़ी थीं। – पहले चार मुकाबले ड्रॉ रहे और पांचवें में हार मिली।
– इसके बाद उन्होंने लगातार बेहतर खेल दिखाते हुए वापसी की और खिताब जीत लिया।
– वर्ष 2016 से विमेंस वर्ल्ड चैंपियनशिप पूरी तरह से चीनी खिलाड़ियों के कब्जे में रही है।
गुकेश ने जीता था पिछला टूर्नामेंट
– वर्ष 2025 में भारत के डी गुकेश ने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था।
– तब गुकेश कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी बने थे।
– 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने 1995 में पहली बार कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था।
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट क्या है?
– कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया का सबसे अहम इवेंट माना जाता है, क्योंकि यही तय करता है कि वर्ल्ड चैंपियन को अगला चैलेंजर कौन होगा।
– इसे वर्ल्ड चैंपियनशिप का सेमीफाइनल भी कहा जाता है।
– विजेता को सीधे वर्ल्ड चैंपियन से खेलने का मौका मिलता है।
– यह शतरंज का सबसे बड़ा क्वालिफाइंग टूर्नामेंट है।
– ये टूर्नामेंट हर दो वर्ष में होता है।
– इसमें दुनिया के टॉप 8 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं।
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4. किस भारतीय एथलीट ने 42.195 किमी की मैराथन को मात्र 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड में पूरा कर 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा?
Which Indian athlete broke a 48-year-old national record by completing a 42.195 km marathon in just 2 hours, 11 minutes, and 58 seconds?
a. संजीवनी
b. सावन बरवाल
c. कार्तिक विजेता
d. निर्माबेन ठाकुर
Answer: b. सावन बरवाल
– भारतीय एथलीट और सेना के जवान ‘सावन बरवाल’ प्रतिष्ठित 501 FSE ग्रुप (बंगाल इंजीनियर ग्रुप) का हिस्सा हैं, जिसे “Five Zero One, the Only One” के नाम से जाना जाता है।
– उन्होंने 12 अप्रैल 2026 को नीदरलैंड्स में आयोजित NN Marathon Rotterdam में फुल मैराथन (42.195 किमी) को मात्र 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड में पूरा किया.
– इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने 1978 में महान एथलीट ‘शिवनाथ सिंह’ द्वारा बनाए गए 2:12:00 के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
– यह रिकॉर्ड पूरे 17,486 दिनों तक कायम रहा।
– जो भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास का सबसे लंबा चलने वाला रिकॉर्ड था।
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5. हिमाचल प्रदेश दिवस (स्थापना दिवस) कब मनाया जाता है?
When is Himachal Pradesh Day (Foundation Day) celebrated?
a. 12 अप्रैल
b. 13 अप्रैल
c. 14 अप्रैल
d. 15 अप्रैल
Answer: d. 15 अप्रैल
– 15 अप्रैल 2026 को 79वें हिमाचल प्रदेश दिवस है।
– 15 अप्रैल 1948 को इस राज्य को आधिकारिक तौर पर ‘चीफ़ कमिश्नर प्रांत’ के रूप में गठित किया गया था।
– भारत को आज़ादी मिलने के बाद, लगभग 28 से 30 छोटी रियासतों, जिनमें चंबा, मंडी और सिरमौर शामिल थीं!
– इन सभी को मिलाकर एक एकल प्रशासनिक इकाई का गठन किया गया।
– वर्ष 1950 में, यह एक केंद्र-शासित प्रदेश बन गया।
– 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
– और यह भारत का 18वाँ राज्य बन गया।
– 25 जनवरी को ‘हिमाचल प्रदेश राज्यत्व दिवस’ के रूप में अलग से मनाया जाता है।
– लेकिन 15 अप्रैल का दिन इसकी राजनीतिक पहचान की शुरुआत के तौर पर विशेष महत्व रखता है।
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6. भारत में मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर कितनी रही?
What was the retail inflation rate in India in March 2026?
a. 1.25%
b. 1.33%
c. 3.4%
d. 2.75%
Answer: c. 3.4%
– पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण मार्च 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति मामूली रूप से बढ़कर 3.4% हो गई, जबकि पिछले महीने यह 3.21% थी।
– मार्च माह के दौरान सोने और चांदी के आभूषणों, नारियल (कोपरा), टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में भारी मुद्रास्फीति देखी गई।
– नए आधार वर्ष पर आधारित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के तहत महंगाई बढ़ी है, लेकिन नियंत्रण में है।
– कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का नया आधार वर्ष (बेस ईयर) 2024 है।
खुदरा महंगाई दर की रिपोर्ट कौन जारी करता है?
– NSO (नेशनल स्टैटिस्टकल ऑफिस) {राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय}
– यह Ministry of Statistics and Programme Implementation (सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियांवयन मंत्रालय) के अंतर्गत है।
कैसे तय होती है खुदरा महंगाई दर
– यह कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से तय होता है।
– इसमें खाद्य सामग्री, फल, कपड़े, जूते, घर, ईंधन, बिजली और अन्य की महंगाई की गणना की जाती है।
– एनएसओ सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हुए चयनित 1,407 शहरी बाजारों (ऑनलाइन बाजारों सहित) और 1,465 गांवों से वास्तविक समय के मूल्य डेटा एकत्र करता है।
– एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है।
RBI द्वारा तय महंगाई सीमा
– RBI द्वारा निर्धारित महंगाई सीमा कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आधार पर 4 प्रतिशत है। हालांकि इसमें दो प्रतिशत घट या बढ़ सकता है।
– इस तरह 2 प्रतिशत से कम महंगाई और 6 प्रतिशत से अधिक महंगाई देश के आर्थिक विकास के लिए ठीक नहीं है।
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7. मार्च 2026 में थोक महंगाई दर कितनी रही?
What was the wholesale inflation rate in March 2026?
a. 0.83%
b. 1.81%
c. 2.13%
d. 3.88%
Answer: d. 3.88%
– भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI – Wholesale Price Index) आधारित महंगाई फरवरी 2026 में 3.88% रही।
– पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन, बिजली और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के चलते थोक मूल्य मुद्रास्फीति मार्च में लगातार पांचवें महीने बढी।
– थोक महंगाई पिछले महीने 2.13% थी और पिछले साल मार्च में 2.25% थी।
– 28 फरवरी को संकट शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है।
– सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईंधन खुदरा विक्रेता कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालें।
वृद्धि के कारण
– कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों में वृद्धि, आगे और महंगाई बढ़ने की आशंका
– गैर-खाद्य वस्तुएं (Non-food articles) महंगी
– खाद्य पदार्थों (Food items) की कीमतों में वृद्धि
– यह आगे चलकर यह CPI (Retail inflation) को भी प्रभावित कर सकता है
थोक महंगाई दर की रिपोर्ट किसने जारी की
– Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT)
– यह Ministry of Commerce and Industry के अंतर्गत है।
(नोट – खुदरा महंगाई दर NSO जारी करता है।)
थोक महंगाई दर क्या होती है?
– यह महंगाई दर, थोक मूल्य सूचकांक (WPI – होलसेल प्राइस इंडेक्स) के आधार पर तैयार होती है।
– होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) या थोक मूल्य सूचकांक का मतलब उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।
– ये कीमतें थोक में किए गए बिजनेस से जुड़ी होती हैं।
(नोट – खुदरा महंगाई दर, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स से तय होता है)
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8.
विश्व कला दिवस कब मनाया जाता है?
When is World Art Day celebrated?
a. 14 अप्रैल
b. 15 अप्रैल
c. 16 अप्रैल
d. 17 अप्रैल
Answer: b. 15 अप्रैल
2026 की थीम
– अभिव्यक्ति का उद्यान: कला के माध्यम से समुदाय का पोषण
– A Garden of Expression: Cultivating Community Through Art
– वर्ष 2019 में यूनेस्को के सामान्य सम्मेलन के 40वें सत्र में घोषित किया गया था।
– इस दिवस को, कला के विकास, प्रसार और आनंद को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।
– हर साल 15 अप्रैल को विश्व कला दिवस समारोह कलात्मक रचनाओं और समाज के बीच संबंधों को मजबूत करने में मदद करता है।
– कलात्मक अभिव्यक्तियों की विविधता के बारे में अधिक जागरूकता को प्रोत्साहित करता है।
– और सतत विकास के लिए कलाकारों के योगदान को उजागर करता है।
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9. विश्व आवाज दिवस कब मनाया जाता है?
When is World Voice Day celebrated?
a. 14 अप्रैल
b. 15 अप्रैल
c. 16 अप्रैल
d. 17 अप्रैल
Answer: c. 16 अप्रैल
– वर्ल्ड वॉइस डे का उद्देश्य मुख्य रूप से मानव आवाज की उचित देखभाल और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है!
– इस दिवस की शुरुआत 1999 में ब्राजील में हुई थी. ब्राजील में आवाज स्वास्थ्य पेशेवरों के ग्रुप ने ही लोगों को जागरूक करने के लिए इस खास दिन की शुरुआत की थी।
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10. मार्क मोबियस का 15 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, वह क्यों जाने जाते थे?
Mark Mobius passed away on April 15, 2026. What was he known for?
a. सिंगर
b. पेंटर
c. वैश्विक निवेशक
d. शेयर बाजार विशेषज्ञ
Answer: c. वैश्विक निवेशक
– 89 वर्ष के मार्क मोबियस सिंगापुर में रहते थे।
– मोबियस के निवेश दृष्टिकोण के कारण उन्हें ” उभरते बाजारों का इंडियाना जोन्स” उपनाम मिला।
– एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप समेत 100 से अधिक देशों का दौरा किया।



