Taliban clamoring recognition, World View by Vijay Sharma, What is Taliban clamoring recognition, India-Taliban video

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मान्यता के लिए छटपटाता तालिबान.
भारत से फ्लाइट, स्कॉलरशिप बहाली की अपील.
तालिबान आजमा रहा कूटनीतिक पैंतरे.

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– तालिबान ने अब दुनिया के देशों की मान्यता जुटाने के लिए कूटनीतिक पैंतरे आजमाने शुरू कर दिये हैं।
– भारत को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें दोनों देशों के बीच फ्लाइट्स बहाल करने यानी शुरू करने की अपील की गई है।
– इसके अलावा हाल ही में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने भारत सरकार द्वारा अफगान छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति को भी बहाल करने की बात कही थी।

– चिट्ठी में क्या-क्या लिखा है, किसकी बात का क्या मतलब है, मान्यता से इसका क्या-लेना देना हो सकता है, अर्थव्यवस्था और व्यापार के इससे क्या सरोकार हैं और सबसे अहम सवाल कि क्या भारत इस अपील को मानेगा?

तालिबान क्‍या चाहता है?
1. तालिबान सिर्फ फ्लाइट्स ही नहीं, अफगानी छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप की भी बहाली चाहता है।
2. अमारुल्लाह सालेह होंगे अफगानिस्तान की निर्वासित सरकार के प्रमुख, खुद को बताया असली सरकार।
3.काबुल में तालिबानी लड़ाकों ने महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान की हवाई फायरिंग, स्कूल खोलने की कर रही थी मांग।

चिट्ठी में क्या-क्या लिखा-
– चलिये देखते हैं, ये है वो चिट्ठी, जो काबुल से आई है । इसमें इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के लेटरहेड पर भारत के डीसीजीए यानी डायेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एवियेशन के प्रमुख अरूण कुमार को वहां के कार्यकारी उड्डयन मंत्री अल्हाज हमीदुल्लाह अखुंज़ादा की तरफ से लिखा गया है।
– लेटर 7 सितंबर का है जो अब अब सामने आया है । पहले इसमें डीजीसीए को कॉम्प्लीमेंट्स दिये गए हैं यानी उसके प्रति शुभकामना व्यक्त की गई है।
– दूसरे पैरा में लिखा है कि “ जैसा कि आपको पता है कि काबुल हवाई अड्डे को अमेरिकी सैनिकों ने अमेरिका लौटने से पहले तहस-नहस और निष्क्रिय कर दिया था।
– फिर कतर के हमारे भाइयों की मदद से एयरपोर्ट एक बार फिर से चालू हो गया है और 6 सितंबर को ही इसे लेकर सभी एयरपोर्ट कर्मियों को नोटाम (नोटिस टू एयरमैन) जारी कर दिया गया।”

– आगे लेटर में कहा गया, “इस चिट्ठी का मकसद यह है कि दोनों देशों के बीच यात्रियों की आवाजाही को फिर से बहाल किया जा सके और हमारी राष्ट्रीय विमान सेवा यानी एरियाना अफगान एयरलाइन और कैम एयर अपनी फ्लाइट्स को दोबारा शुरू करवा पाए। – अफगानिस्तान का इस्लामिक अमीरात इस मामले में भारत को पूरी तरह निश्चिंत करना चाहता है।”
– गौर कीजिये, सबसे इंपॉर्टेंट लाइन यहां पर है कि “The civil aviation of Islamic Emirate of Afghanistan avails its highest assurance,” मतलब भारत को पूरी तरह निश्चिंत किया गया है कि उसे किसी तरह की शंका नहीं होनी चाहिए।
– भारत सरकार की एक संस्था को तालिबान की कथित सरकार की ओर से मिला ये पहला ऑफिशियल लेटर है।
– तालिबान की कथित सरकार का आधिकारिक पत्र।

– कथित यानी पर्पोर्टिड्ली (purportedly ) या SO CALLED इसलिए क्योंकि भारत ने अभी इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान को मान्यता नहीं दी है और तालिबान के सामने अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद अब यही सबसे बड़ी चुनौती है।
– क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो अलग-थलग पड़ जाएगा।
– इसके बिना सब बेकार है।

Not only to form the government, it is also necessary to look and act like the government.

– तालिबान ने बाहरी दुनिया से संपर्क की शुरुआत कब्जे से पहले ही कर दी जब जुलाई में उसके कुछ नेताओं ने चीन के विदेश मंत्री से बीजिंग में मुलाकात की थी।

– चीन ही क्यों, इसकी एक अलग कहानी है, इस पर वर्ल्ड व्यू का 14 सितंबर का पूरा वीडियो है, आप देख सकते हैं ।

– अब चीन ने अफगानिस्तान में 31 मिलियन डॉलर की मदद की पहली किश्त पहुंचा दी है. उधर पाकिस्तान तो है ही तालिबान के साथ।
– इसी तरह जब सरकार के शपथ लेने यानी OATH TAKING CEREMONY की बात आई तो चीन, पाकिस्तान, कतर और ईरान को INVITE किया गया था लेकिन रूस ने आने से मना कर दिया और बाद में इस आयोजन को ही रद्द कर दिया गया।
– IMPORTANT बात ये है कि ये सब 9/11 की बरसी पर होना था और रद्द होने की वजह बताई गई फिजूलखर्ची ।

– संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें अधिवेशन में हिस्सा लेने का उसका सपना भी अधूरा रहा।
– न्यू यॉर्क में इसी अधिवेशन के मौके पर  25 सितंबर को होने वाली सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भी रद्द हो गई थी।
– क्योंकि पाकिस्तान तालिबान के प्रतिनिधि को शामिल करवाना चाहता था।
– सार्क में शामिल देशों ने इस मांग को विचार लायक भी नहीं समझा । लेकिन पाकिस्तान ने अभी उसे जैसे-तैसे मान्यता दिलाने की जिद नहीं छोड़ी है।

– चीन से भी तालिबान के हाथ मिलाने में एक बड़ी शर्त अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में साथ देना है ।

– अब आप समझ सकते हैं कि ये चिट्ठी तालिबान की सरकार ने भारत क्यों लिखी।
– और स्कॉलरशिप की बहाली की मांग क्यों की?
– तालिबान ने कहा है कि 2021 सेशन के लिए भारतीय छात्रवृत्ति पाने वाले अफगान छात्रों को देश की यात्रा करने की अनुमति दी जाए।

– दरअसल, ये उसकी कूटनीतिक कोशिशों से जुड़ा है क्योंकि भारत पहले ही संकेत दे चुका है कि उसे तालिबान को मान्यता पर फैसला लेने की कोई जल्दी नहीं है।
– फ्लाइट्स शुरू होने का मतलब ही है, उसकी सरकार, उसकी EXISTENCE को मानना।
– और फिर एक बार ऐसा हुआ तो तालिबान के लिए ये दूसरे देशों से संबंध बनाने में मददगार साबित होगा।
– वैसे भी भारत एक बड़ा और प्रभावशाली देश है।
– इससे पहले का अफगानिस्तान उसका दोस्त रहा है।
– भारत ने वहां बहुत काम किया है।
– अफगानियों में भारत को लेकर काफी सम्मान और RESPECT है । – ऐसे में तालिबान की किसी मांग को एक झटके में मान लेना संभव नहीं दिखता।

– अब उड़ानें शुरू करने के प्रस्ताव की मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एवियेशन समीक्षा कर रहा है।
– भारत और अफगानिस्तान के बीच 15 अगस्त से ही कमर्शियल फ्लाइट्स पर रोक लगी हुई हैं।

– 30 अगस्त को अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था. हालांकि, वहां के बिगड़े हालात के बीच अपने नागरिकों को निकालने के लिए 21 अगस्त तक कुछ फ्लाइट्स जरूर काबुल गई थीं लेकिन उसके बाद से फ्लाइट्स ठप्प हैं।

– वैसे भारत और तालिबान के प्रतिनिधि पहले भी मिल चुके हैं जब कतर में भारतीय राजदूत और तालिबानी नेता में बातचीत हुई थी।
– 31 अगस्त को कतर में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई से मुलाकात की थी।
– लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि भारत अफगानिस्तान में तालिबानी शासन को आधिकारिक रूप से मान्यता देता है।

– विदेश मंत्री एस जयशंकर के पिछले स्टेटमेंट का हवाला लें तो उन्होंने कहा था कि भारत तालिबान की नई सरकार को एक व्यवस्था यानी डिस्पन्सेशन (Dispensation) से ज्यादा कुछ नहीं मानता है। नहीं महज एक व्यवस्था कहा गया था ।
– दुनिया से CONNECTION कटने या यूं कहें कहें कि काटने के बाद, काटने इसलिए क्योंकि तालिबान ने ही विदेशी नागरिकों को अपने देश जाने का फरमान सुनाया था।
– तो विश्व समुदाय से संपर्क कटने के बाद अफगानिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर होती जा रही है।
– व्यापार ठप हो गया है जिसमें पहले भारत एक बड़ा साझेदार था।
साल 2019-20 में भारत और अफगानिस्तान के बीच करीब 11 हजार करोड़ का व्यापार हुआ था।
– भारत, अफगानिस्तान से बड़ी मात्रा में ड्राई फ्रूट्स और हर्बल दवाएं मंगवाता था जबकि भारत से अफगानिस्तान को चाय, कॉफी, काली मिर्च, कॉटन और खिलौने निर्यात किये जाते थे।

– तो इस तरह से चिट्ठी कूटनीति यानी LETTER DIPLOMACY के जरिये तालिबान ने गेंद भारत के पाले में डाल दी है।
– भारत को इसे ठोंक-बजा कर देखना होगा क्योंकि तालिबान अब भी अफगानियों और दुनिया के लोगों का भरोसा नहीं जीत सका है।
– रोज वहां कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है, जो दुनिया से जुड़ने में तालिबान के लिए खुद दिक्कत बनेगा।
– दुनिया चाहती है कि वहां एक समावेशी सरकार यानी COLLECTIVE या INCLUSIVE REGIME हो यानी जिसमें अफगानिस्तान के विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व हो।
– महिलाओं की शिक्षा न रोकी जाए, मानवाधिकारों का हनन न हो और सबसे बड़ी मांग कि अफगानी ज़मीन का इस्तेमाल आंतकवाद के लिए न हो।
– आज के लिए इतना ही नमस्कार।


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