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क्यों टूटा रूस-NATO का नाता?
बदलेंगे अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीतिक समीकरण?

रूस ने नाटो से बचा-खुचा संबंध में तोड़ लिया है और दोनों में बुरी तरह से ठन गई है। बात इतनी बढ़ गई है कि रूस ने नाटो मुख्यालय में अपना मिशन बंद करने के बाद मॉस्को में नाटो के दफ्तर को भी बंद करने के आदेश दिए हैं । ये सब कोई रातों-रात नहीं हुआ है बल्कि इसकी अटकलें, सुगबुगाहट और संभावनाएं पहले से थीं।
क्यों बिगड़े रूस-नाटों के संबंध, क्या है इसके पीछे असली विवाद,
इससे कितना बदलेगा अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिदृश्य और सबसे अहम बात की नाटो के बनते वक्त केंद्र में क्यों था रूस? आगे पूरी जानकारी, पूरे तथ्य और पूरा विश्लेषण होगा।

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रूस-NATO के कुछ न्यूज अपडेट्स- 
1. NATO प्रमुख ने रूस के सामने ताजा विवाद से जुडे हर मुद्दे पर बातचीत का प्रस्ताव दिया है लेकिन रूस ने इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
2. इससे पहले रूस ने नाटो के मुख्यालय से अपने राजदूत हटाये और मॉस्को में काम कर रहे नाटो के सैन्य दफ्तर को बंद करने का आदेश दिया था।
3. क्या नाटो और रूस का टकराव और बढ़ेगा, दोनों ने डायलॉग का एक खुला चैनल रखने की कोशिशें तो कीं लेकिन एक दूसरे का नहीं जीत सके हैं भरोसा।

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क्या है ताजा विवाद
– दरअसल इस विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब इसी महीने नाटो ने बेल्जियम के ब्रसेल्स शहर के अपने मुख्यालय में काम कर रहे 8 राजनयिकों यानी डिप्लोमेट्स को 6 अक्टूबर को निकाल दिया था।
– नाटो का कहना था कि ये रूसी अधिकारियों की शक्ल में रूसी जासूस थे।
– इसके साथ ही नाटो ने अपने हेडक्वार्टर में मॉस्को के अफसरों की संख्या 20 से घटाकर आधी कर दी थी।
– आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि नाटो के मुख्यालय में उसके सदस्य देशों के राजदूत और उनके स्टाफ भी तैनात हैं।
– इससे आप समझ सकते हैं कि ये कितना सक्रिय सैन्य संगठन यानी मिलेट्री एलायंस है।
– खैर, रूस ने अब उसी घटनाक्रम यानी नाटों की उसकी अधिकारियों पर कार्रवाई का बदला लिया है और देखना ये होगा कि ये तनाव आगे क्या रूप लेगा क्योंकि ये कोई मामूली घटना नहीं है।
– इस बीच नाटो के जनरल सेक्रेट्री जेन्स स्टॉल्टेनबर्ग (Jens Stoltenberg) जो कि नाटो के प्रमुख भी हैं, उन्होंने रूस से सभी मुद्दों पर बातचीत की पेशकश की है लेकिन लगता नहीं है कि रूस अभी आसानी से राजी होगा ।

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नाटो प्रमुख का बयान
“We strongly believe that, especially when tensions are high and things are difficult, it is important to have dialogue. NATO will also continue to assess how we can further strengthen our deterrence and defense.
—Jens Stoltenberg, NATO Chief

“हम दृढ़ता से मानते हैं कि, विशेष रूप से जब तनाव अधिक होता है और चीजें कठिन होती हैं, तो बातचीत करना महत्वपूर्ण होता है. नाटो यह भी आकलन करना जारी रखेगा कि हम अपनी प्रतिरक्षा और रक्षा को और कैसे मजबूत कर सकते हैं।“

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रूस ने क्या कहा?
– सबसे पहले तो रूस ने जासूसी के आरोपों को गलत बताते हुए नाटो पर उसकी सीमाओं के पास उकसाने वाली सैन्य गतिविधियां चलाने का आरोप लगाया है
– रूस ने कहा है कि नाटो की बातचीत और मिलकर काम करने में कोई रुचि नहीं है और अगर उन्हें अब कोई बात करनी है तो वो बेल्जियम में हमारे देश के दूत से बात करे।

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NATO ने क्या कहा?
– उधर नाटो ने रूस की जवाबी कार्रवाई को भी अफसोसनाक कहा है साथ ही कहा है कि रूस की आक्रामक कार्रवाइयों के जवाब में हम एकजुट हैं।
– ये भी कहा गया है कि नाटो-रूस काउंसिल के जरिये बातचीत के रास्ते खुले रहेंगे
– वैसे पिछला इतिहास देखें तो रूस और नाटो के खट्टे-मीठे रिश्ते कोई नई बात नहीं है ।
– शीतयुद्ध के खत्‍म होने के बाद से ही दोनों के बीच संबंध सबसे खराब स्थिति में रहे हैं ।
– नाटो का गठन ही पहले के सोवियत संघ के खिलाफ उत्तर अटलांटिक देशों को सामूहिक सुरक्षा दिलाने के लिये की गई थी।

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रूस-नाटो संबंध
– हाल के सालों की बात करें तो रूस द्वारा 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया प्रायद्वीप को अलग करने के बाद ही नाटो ने व्यावहारिक रूप से रूस के साथ सहयोग खत्म कर दिया था।
– हालांकि तब भी डायलॉग का एक चैनल खोलकर रखा गया था। यानी नाटो और रूस काउंसिल का प्लेटफॉर्म खुला हुआ था लेकिन ये बात और है कि इनकी मीटिंग कभी-कभार और कामचलाऊ तरीके से ही हुईं।

– चूंकि नाटो एक सैन्य संगठन है तो रूस के साथ सेनाओं के समन्वय का रास्ता खुला रहा।
– लेकिन इस नये घटनाक्रम से अब सिर्फ डिप्लोमेट टू डिप्लोमेट का प्लेटफॉर्म बचा है, जैसा कि रूस ने साफ कहा है कि अगर कोई बात करनी हो बेल्जियम में उसके राजदूत से बात कर लें।
– नाटो-रूस काउंसिल का रूस ने नाम भी नहीं लिया।

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क्या है NATO?
– अब जरा एक नजर नाटो पर डाल लेते हैं । इसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को अमेरिका के वॉशिंगटन डी॰ सी॰ में हुई। इसीलिए इसे ‘वाशिंगटन संधि’ यानी ट्रीटी भी कहा जाता है।
– नाटो का पूरा नाम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन अर्थात North Atlantic Treaty Organization है।
– इस समय इसके सदस्य देशों की संख्या करीब 30 है।

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NATO का मकसद
– वहीं उद्देश्यों की बात करें तो एक या अधिक सदस्यों पर आक्रमण सभी सदस्य देशों पर आक्रमण माना जाता है।
– इसके अलावा उत्तर अटलांटिक क्षेत्र में लोकतांत्रिक शांति व्यवस्था बनाए रखना।
– नाटो अमेरिका के नेतृत्व वाला दुनिया सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन है!

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प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु प्रश्न
रूस और नाटो के बीच कथित जासूसी कांड के बाद उपजे विवाद का विस्तार से वर्णन करें । इस घटनाक्रम का अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
Describe in detail the ongoing dispute between Russia and NATO after the alleged spy scandal. What could be the impact of this development on the international geopolitical scenario?

– इसके साथ ही ये सेशन भी खत्म होता है । धन्यवाद.


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