रेलवे आरआरबी परीक्षा में कंप्यूटर हैक कर एग्जाम दिलाने वाला गिरोह पकड़ा गया

ऑनलाइन रेलवे भर्ती परीक्षा में शेयरिंग सॉफ्टवेयर (एएमएमवाईवाई) के जरिए सेंध लगाई जा रही थी। एसटीएफ नोएडा ने आगरा में चल रहे इस खेल का खुलासा करते हुए सॉल्वर लेकर आने वाले शातिर और एक कॉलेज के प्रिंसिपल सहित छह लोग पकड़े हैं। फर्जीवाड़े में प्रिंसिपल शामिल: बताया गया कि सेंटरों के प्रिंसिपल मिले हुए थे। पेपर अभ्यर्थी की कंप्यूटर स्क्रीन पर खुलता था, लेकिन उसे हल दूसरे कंप्यूटर पर बैठा सॉल्वर करता था। बायोमैट्रिक्स के बाद अभ्यर्थी तक बदले जा रहे थे। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से दो लग्जरी गाड़ियां, आठ मोबाइल, लैपटॉप, 130 प्रवेशपत्र और 1.08 लाख रुपये बरामद हुए हैं।

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एसटीएफ नोएडा आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि रेलवे भर्ती बोर्ड ने सॉफ्टवेयर कंपनी आरआरबी से अनुबंध किया है। ऐसे स्कूल कॉलेज सेंटर बनाए गए हैं जहां डेस्कटॉप कंप्यूटर अधिक लगे हैं। सॉफ्टवेयर कंपनी परीक्षा केंद्रों पर अपना एक प्रतिनिधि भेजती है। बायोमैट्रिक्स के बाद अभ्यर्थी को प्रवेश मिलता है। निश्चित समय पर प्रश्नपत्र कंप्यूटर पर अपलोड किया जाता है। यूजर नेम और पासवर्ड दिए जाते हैं। समय सीमा समाप्त होते ही डाटा हट जाता है। कॉलेज संचालकों की मिलीभगत से ही खेल चल रहा था।शेयरिंग सॉफ्टवेयर से सेंधएसपी एसटीएफ ने बताया कि एएमएमवाईवाई शेयरिंग सॉफ्टवेयर है। यह कंप्यूटर पर अपलोड किया जाता है। इसके अपलोड होने के बाद कंप्यूटर स्क्रीन पर चल रहे पेज को दूसरा व्यक्ति भी देख सकता है। इसी तकनीक के जरिए सॉल्वर पेपर हल करते थे। परीक्षा शुरू होते ही सॉल्वर अपना लैपटॉप ऑन कर लेता था। परीक्षा केंद्र से उसे यूजर नेम और पासवर्ड मिल जाता था। सॉल्वर का लैपटॉप शेयरिंग सॉफ्टवेयर के जरिए उस डेस्कटॉप से जुड़ जाता था जिस पर उनका अभ्यर्थी बैठा होता था। अभ्यर्थी सिर्फ प्रश्नपत्र पढ़ने में समय व्यतीत करता था और सॉल्वर उसे हल करता था।

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एसटीएफ नोएडा यूनिट को गिरफ्तार राहुल गोस्वामी की वर्ष 2015 से तलाश थी। उस समय उसने एसएससी की परीक्षा में सेंध लगाई थी। स्लीकॉन क्लोन के जरिए बायोमैट्रिक्स का तोड़ा खोजा था। जिस अभ्यर्थी द्वारा आवेदन किया जाता था उसके अंगूठे की निशानी पहले ही ले ली जाती थी। सॉल्वर जब पेपर देने जाता था तो अंगूठे की निशानी मिलने पर ही उसे प्रवेश दिया जाता था। इसके लिए राहुल गोस्वामी आवेदक के अंगूठे की निशानी स्लीकॉन पर लेता था। उसकी पतली परत सॉल्वर के अंगूठे पर चिपका दी जाती थी। बायोमैट्रिक्स के समय वह कभी पकड़ा नहीं जाता था। स्लीकॉन क्लोन में आवेदक के अंगूठे की निशानी छपी होती थी।

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Updated: May 2, 2016 — 3:00 pm

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