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क्यों इतना अहम है COP 26 ?
भारत और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे,

COP 26 Summit 2021:-
हमारी आपकी वजह से जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है और बारी अब अभी नहीं तो कभी नहीं और करो या मरो की है।
धरती को बचाने का एक और मौका सामने है बशर्ते उसका इस्तेमाल हो सके।
31 से 12 तारीख तक यूनाइटेड नेशंस कॉप-26 समिट होने जा रही है जिसमें दुनिया के देश एक छत के नीचे जुटेंगे और मिलकर नये, कड़े और असरदार फैसले ले सकते हैं।

– सबसे पहले बात कॉप 26 नाम की । Actually, COP stands for Conference of the Parties अर्थात साझेदारों या सहयोगियों का सम्मेलन।
– साझेदार मतलब सारे देश जो धरती के भूभाग और वातावरण को साझा करते हैं यानी मिलजुल कर उपयोग करते हैं।
– चूंकि ये 26वां सम्मेलन है इसलिए कॉप-26।
– दरअसल, ये पिछला यानी 2020 का सम्मेलन है जो कोविड-19 की वजह से एक साल बाद अब हो रहा है ।
– इस बार का सम्मेलन ब्रिटेन इटली के साथ मिलकर ग्लास्गो में करने जा रहा है
– एक और बहुत इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन कि सम्मेलन के अध्यक्ष हैं आलोक शर्मा जो कि ब्रिटेन के कैबिनेट मंत्री भी हैं। मूल रूप से भारतीय हैं और यूपी के आगरा में जन्मे हैं।
– इस बार भारत की तरफ से स्वयं प्रधानमंत्री जाएंगे और COP 26 के तहत 1-2 नवंबर को 120 देशों के प्रमुखों की बैठक में हिस्सा लेंगे

अब जरा COP के बारे में डिटेल में जानते हैं।
– COP, UNFCCC के अंतर्गत आता है.
– UNFCCC यानी United Nations Framework Convention on Climate Change.
– इसका गठन वर्ष 1994 में किया गया था.

COP का उद्देश्य-
– ग्रीनहाउस गैस सांद्रता (concentrations)को स्थिर करना.
– COP, UNFCCC का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला प्राधिकरण यानी अथॉरिटी है.
– COP का पिछला सम्मेलन 2019 में स्पेन के मैड्रिड में हुआ था.

 

UNFCCC ने सदस्य या साझेदार देशों के लिए ज़िम्मेदारियों की बाकायदा एक लिस्ट तैयार कर रखी है, जिसके मुताबिक…..
– जलवायु परिवर्तन को कम करने के उपाय खोजना.
– जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के अनुकूलन हेतु तैयारी में सहयोग करना.
– जलवायु परिवर्तन से संबंधित शिक्षा, प्रशिक्षण और जन जागरूकता को बढ़ावा देना.

– जिम्मेदारियां तो तय हैं लेकिन प्रश्न उन दायित्वों के ईमानदारी से निर्वहन का है यानी लागू करने का।

कॉप-26 का टारगेट क्या है?

पहला
– 2050 तक ग्लोबल नेट ज़ीरो एमीशन यानी वैश्विक शुद्ध शून्य उत्सर्जन को सुरक्षित करना
– और तापमान 1.5 डिग्री रखना।
– जिसके लिए कोयले के फेज़-आउट में तेज़ी लानास वनों की कटाई को रोकना,
– डीज़ल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग
– और अक्षय ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा शामिल है।

दूसरा
– पारिस्थितिकी तंत्र यानी इकोलॉजिकल सिस्टम की रक्षा एवं पुनर्स्थापना के
– साथ ही घरों, आजीविका और यहाँ तक कि जानमाल के नुकसान से बचने के लिये रक्षा,
– चेतावनी प्रणाली और लचीले बुनियादी ढांचे हेतु मिलकर काम।

तीसरा
– विकसित देशों को प्रतिवर्ष जलवायु वित्त में कम-से-कम 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के अपने वादे को पूरा करना चाहिये।

चौथा
– सभी देश विस्तृत नियमों की एक सूची तैयार करने के लिये मिलकर काम करेंगे जो पेरिस समझौते को पूरा करने में सहायक होगा।

कार्बन न्युट्रैलिटी
– नेट जीरो का आशय कार्बन निरपेक्षता यानी कार्बन न्युट्रैलिटी से है. इसका मतलब ये नहीं है कि उत्सर्जन यानी एमीशन का स्तर शून्य पर ले जाना है बल्कि ये है कि उत्सर्जनों की क्षतिपूर्ति यानी कम्पनसेशन के रूप में ग्रीन – हाउस गैसों को तकनीकी मदद से वायुमंडल में घुलने-मिलने ना देना।
यानी एक तरह के संतुलन की स्थिति।
– हालांकि ये तकनीक थोड़ी महंगी है लेकिन प्राकृतिक उपचार भी हैं जैसे बड़े पैमाने पर जंगल तैयार करना जो ग्रीन हाउस गैसों को सोखने का काम करेंगे।

– अब COP26 से उम्मीद ये है कि अपने लक्ष्य या उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जलवायु परिवर्तन पर 2015 के पेरिस समझौते के नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
– जाहिर है पेरिस समझौते के नियमों को पूरा करने के लिए कठोर उपाय करने का भी सम्मेलन पर दबाव होगा।
– जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के बीच सम्मेलन के माध्यम से एक ठोस कार्ययोजना सामने आने की उम्मीद है।

जलवायु परिवर्तन क्या है?
– जलवायु एक लंबे समय में या कुछ सालों में किसी स्थान का औसत मौसम है और जलवायु परिवर्तन उन्हीं औसत परिस्थितियों में बदलाव है।
– 19वीं सदी की तुलना में धरती का तापमान लगभग 1.2 डिग्री अधिक बढ़ चुका है

– और वातावरण में CO2 की मात्रा में भी 50% तक वृद्धि हुई है.
– वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस सदी के अंत तक धरती का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है
– इसीलिये ग्लोबल वार्मिंग को इस सदी के अंत तक हर हाल में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बनाए रखने की ज़रूरत है
– अगर ग्लोबल वॉर्मिंग 4 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो गई तो कहीं भयानक हीट-वेव या सूखे होगा तो कहीं अत्यधिक वर्षा होगी या समुद्र का जलस्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।
– अनुमान ये भी जताये गये हैं कि इस सदी के अंत तक पूरी दुनिया में समुद्र का औसत जल स्तर 48 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा जिससे लाखों करोड़ों लोग बेघर हो सकते हैं।
– ऐसा हुआ तो जीव-जंतुओं की कई प्रजाति हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी।

भारत और COP 26

– भारत भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रयास कर रहा है।
– चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जक है।
– भारत 2030 तक हरित ऊर्जा यानी ग्रीन एनर्जी की क्षमता बढ़ाकर 450 गीगावॉट करने की ओर बढ़ रहा है।
– यहां पहले ही 100 गीगावॉट से ज्यादा नवीनीकृत यानी रिनेवेबल एनर्जी की क्षमता स्थापित हो चुकी है।
– COP-26 बैठक से पहले भारत ने अमीर देशों से पर्यावरण को पहुंचाए नुकसान के बदले मुआवजे की मांग की है। पर्यावरण मंत्रालय के सचिव रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा है कि…….

– “नुकसान के लिए मुआवजा होना चाहिए और विकसित देशों को इसकी भरपाई करनी चाहिए। भारत इस मुद्दे पर गरीब और विकासशील देशों के साथ खड़ा है।”
– चूंकि भारत 10 बड़े उत्सर्जक देशों में शामिल रहा है इसलिए अगर मुआवजा लिया जाता है तो उसे भी देना पड़ सकता है।
– “अगर ऐसा होता है तो भारत को जितना मुआवजा देना होगा, उससे अधिक उसे मिल जाएगा। अगर वो भारत को शामिल करना चाहते हैं तो हम तैयार हैं।”
– दरअसल, 2015 के पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में ‘हानि और क्षति’ loss और depreciation का जिक्र था मगर किसकी देनदारी होगी और इसकी क्‍या प्रक्रिया होगी, यह साफ नहीं था।

अमीर देशों को वादे याद दिलाएगा भारत
– भारत की शिकायत ये रही है कि बड़े देश पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों और गरीब देशों की मदद के वादे से पीछे हटे हैं
– इसमें 2050 की कार्बन न्युट्रैलिटी का काम भी शामिल है और बड़े देश तो चुप रहेंगे लेकिन विकासशील देशों को नसीहत देंगे कि त्याग वो करें ।
– पेरिस सम्मेलन में क्लाइमेट फाइनेंस को लेकर अहम वादा किया गया था, भारत उस पर भी ज्यादा कार्रवाई चाहता है।
– इसके साथ ही जो देश कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए काम कर रहे हैं उन्हें कार्बन क्रेडिट मिलना चाहिए।
– पर हां, भारत पर वर्ष 2050 तक नेट ज़ीरो एमीशन यानी उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने का वैश्विक दबाव तो है ही।

……और अब इस विषय इस थीम के आधार पर आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कई वैकल्पिक प्रश्न बनते हैं, उन्हें देखते हैं जवाब के साथ।

UNFCCC का फुल फॉर्म बतायें?
Ans: United Nations Framework Convention on Climate Change

UNFCCC महासचिव कौन हैं?
Ans: पैट्रीशिया एस्पीनोसा

Cop26 जलवायु सम्मेलन का अध्यक्ष कौन हैं ?
Ans: आलोक शर्मा

Cop26 का आयोजन कहां हो रहा है?
Ans: ग्लास्गो( ब्रिटेन)

Cop25 का आयोजन कहां हुआ था?
Ans: मैड्रिड (स्पेन)

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस सदी के अंत तक धरती का तापमान कितने डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है?
Ans: 2 डिग्री सेल्सियस

रही बात विस्तृत यानी डिस्क्रिप्टिव क्वेश्चन की तो वो इस सम्मेलन के होने के बाद यानी इसमें लिये गये फैसलों पर आधारित हो सकते हैं, इसलिए अभी हम उन्हें नहीं ले रहे हैं।

वैज्ञानिकों की चैतावनी को अनदेखा किया गया तो जलवायु परिवर्तन ऐसे लेवल पर पहुंच जाएगा जहां उसे रोकना असंभव हो जाएगा। Unfortunately, we are heading towards climate disaster. WE SHOULD SAVE OUR EARTH AS THERE IS NO PLANET B. ऐसे में COP 26 एक उम्मीद की किरन की तरह है, बस फैसले कितने भी बड़े और कड़े हों, इसको बराबरी और इच्छाशक्ति के साथ लागू करना सुनिश्चित होना चाहिए।


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