14 अप्रैल 2026 करेंट अफेयर्स

यह 14 अप्रैल 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।

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1. फ्रांस ने अपनी डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने के लिए अपने सरकारी कंप्यूटरों को अमेरिकी कंपनी के Windows से किस ऑपरेटिंग सिस्टम पर स्थानांतरित करने का फैसला किया?
To strengthen its digital sovereignty, onto which operating system did France decide to migrate its government computers from the American company’s Windows?

a. Linux
b. Aurora OS
c. Deepin
d. OpenSUSE

Answer: a. Linux

– फ्रांस सरकार ने अपनी सार्वजनिक क्षेत्र की तकनीकी संरचना (Tech Stack) में एक बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं।
– फ्रांस अपने सरकारी कंप्यूटरों को Windows से Linux (ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम) पर स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है।
– यह कदम अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों पर निर्भरता कम करने और अपनी डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने के वैश्विक रुझान को दर्शाता है।
– यूरोपीय संघ के एक प्रमुख देश के रूप में फ्रांस की तकनीकी स्वायत्तता की दिशा में हालिया पहल वैश्विक भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाती है।

इस बदलाव के पीछे के कारण
– राजनीतिक अस्थिरता: अमेरिका में नेतृत्व परिवर्तन और ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीतियों के चलते यूरोपीय सहयोगियों में यह डर है कि अमेरिकी तकनीक को भू-राजनीतिक हथियार (जैसे प्रतिबंध या टैरिफ) के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
– कानूनी जोखिम: अमेरिकी ‘CLOUD Act’ जैसे कानून अमेरिकी सरकार को अमेरिकी कंपनियों के पास मौजूद डेटा तक पहुँचने की शक्ति देते हैं, भले ही वह डेटा विदेश (जैसे फ्रांस) में स्टोर हो।
– आर्थिक नियंत्रण: निजी कंपनियों द्वारा अचानक कीमतों में वृद्धि (Pricing Power) और अपग्रेड के दबाव से सार्वजनिक बजट को सुरक्षित रखना।

फ्रांस का ‘डिजिटल स्वावलंबन’ मिशन
– फ्रांस की डिजिटल एजेंसी DINUM इस प्रवास (Migration) की शुरुआत करेगी।
– उद्देश्य: अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों (Big Tech) पर निर्भरता कम करना और डेटा, बुनियादी ढांचे तथा रणनीतिक निर्णयों पर नियंत्रण प्राप्त करना।
– फ्रांस की डिजिटल प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा – डिजिटल संप्रभुता कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है।

मुख्य पहल (Key Initiatives)
– Linux स्विचओवर: फ्रांस की डिजिटल एजेंसी (DINUM) अपने वर्कस्टेशन को ‘Windows’ से ‘Linux’ पर ले जा रही है। इसका उद्देश्य अमेरिकी सॉफ़्टवेयर कंपनियों के लाइसेंसिंग मॉडल और “बैकडोर एक्सेस” के जोखिमों को समाप्त करना है।
– स्वदेशी टूल ‘Visio’: गोपनीयता (Privacy) सुनिश्चित करने के लिए ‘Microsoft Teams’ के स्थान पर फ्रांस ने Visio को अपनाया है, जो ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म Jitsi पर आधारित है।
– डेटा संप्रभुता: स्वास्थ्य डेटा प्लेटफॉर्म और अन्य संवेदनशील बुनियादी ढांचे को ‘ट्रस्टेड क्लाउड’ (Trusted Cloud) प्रदाताओं पर स्थानांतरित करने की योजना है, जो यूरोपीय कानूनों के अधीन हों।

आठ रणनीतिक श्रेणियाँ (Strategic Categories)
1) वर्कस्टेशन और OS (Linux की ओर संक्रमण)
2) सहयोगी और संचार उपकरण (Microsoft Teams के स्थान पर स्वदेशी ‘Visio’ का उपयोग)
3) एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ्टवेयर
4) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एल्गोरिदम
5) डेटाबेस और स्टोरेज
6) वर्चुअलाइजेशन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
7) नेटवर्क और दूरसंचार उपकरण
8) स्वास्थ्य डेटा प्लेटफॉर्म का स्थानांतरण

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2. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु परिवर्तन सम्मेलन COP33 की मेजबानी करने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया, ये किस वर्ष में होने वाला था?
India withdrew its proposal to host COP33, the UN’s annual climate change conference. In which year was it scheduled to take place?

a. वर्ष 2028
b. वर्ष 2026
c. वर्ष 2027
d. वर्ष 2029

Answer: a. वर्ष 2028

क्या है COP?
– COP यानी ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज’।
– संयुक्त राष्ट्र के जलवायु फ्रेमवर्क (UNFCCC) के तहत होने वाला सबसे बड़ा वार्षिक सम्मेलन है।
– इसमें दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए रणनीति, लक्ष्य और नीतियों पर चर्चा करते हैं।
– हर वर्ष यह सम्मेलन किसी एक देश की मेजबानी में होता है।

भारत ने नाम वापस लिया
– इस बार भारत को वैश्‍विक जलवायु नेता बनने का मौका था, लेकिन 8 अप्रैल 2026 को इससे अपना नाम वापस लिया।
– जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को 2 अप्रैल को संयुक्त सचिव रजत अग्रवाल ने एक पत्र में लिखा था है कि भारत “2028 के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस ले रहा है।
– यह फैसला वैश्विक जलवायु कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
– वर्ष 2023 में दुबई में आयोजित COP28 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच से प्रस्ताव रखा था कि भारत 2028 में COP33 की मेजबानी करेगा।
– प्रधानमंत्री ने तब जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व को रेखांकित करते हुए यह पेशकश की थी।
– भारत इस आयोजन की तैयारियों को लेकर काफी सक्रिय था।
– जुलाई 2025 में, भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने एक ‘COP33 सेल’ का गठन किया था।
– इस सेल का उद्देश्य 2028 के शिखर सम्मेलन के लिए पेशेवर और लॉजिस्टिक (साजो-सामान) संबंधी जरूरतों को पूरा करना था।
– अब भारत COP33 की मेजबानी के अपने प्रस्ताव को वापस ले रहा है।
– भारत के हटने के बाद, दक्षिण कोरिया एकमात्र ऐसा देश है जिसने अब तक COP 33 की मेजबानी में रुचि जताई है।

एनडीसी की घोषणा
– 25 मार्च को, भारत ने अपने अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) की घोषणा की, जिसमें 2035 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने, जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 47% तक कम करने और अपने कार्बन सिंक को 3.5-4 बिलियन टन CO₂ समकक्ष तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई है।

ऐसे तय होती है मेजबानी
– संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की मेजबानी संयुक्त राष्ट्र के पांच क्षेत्रीय समूहों – अफ्रीकी राज्य, एशिया-प्रशांत राज्य, पूर्वी यूरोपीय राज्य, लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन राज्य तथा पश्चिमी यूरोपीय और अन्य राज्य – के बीच बारी-बारी से होती है।
– भारत एशिया प्रशांत समूह का हिस्सा है।
– वर्ष 2026 COP31 की मेजबानी तुर्किये और ऑस्ट्रेलिया मिलकर करेंगे।
– जबकि 2027 का COP सम्मेलन इथियोपिया में आयोजित होगा।
– भारत ने केवल एक बार, 2002 में COP की मेजबानी की है।

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3. भारत के स्‍टेज-2 परमाणु कार्यक्रम ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) ने ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली, यह कहां पर स्‍थापित है?
India’s Stage-2 nuclear program, the ‘Prototype Fast Breeder Reactor’ (PFBR), has achieved ‘criticality’; where is it located?

a. काकरापार (गुजरात)
b. कल्पक्कम (तमिलनाडु)
c. कुडनकुलम (तमिलनाडु)
d. नरोरा (उत्‍तर प्रदेश)

Answer: b. कल्पक्कम (तमिलनाडु)

– भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
– तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली है।
– इसका अर्थ है कि रिएक्टर में परमाणु प्रतिक्रिया सुरक्षित रूप से आत्मनिर्भर हो गई है और बिजली उत्पादन करने की दिशा में अग्रसर है।
– कलपक्कम में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी-BHAVINI) का 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) अब कमर्शियल उत्पादन लिए तैयार है।
– इस रिएक्टर का डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR- Indira Gandhi Centre for Atomic Research) ने तैयार किया है।
– सरकार द्वारा 2003 में एक परियोजना के रूप में औपचारिक रूप से मंजूरी दिए जाने के बाद से, इस स्तर तक पहुंचने में दो दशकों से अधिक का समय लग गया है।
– इसी के साथ भारत स्‍टेज-2 परमाणु कार्यक्रम तक पहुंच गया है।
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अप्रैल, 2026 को इस संबंध में X पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया।
– इस प्रोजेक्ट में 80% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है। अभी सिर्फ रूस और चीन के पास फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। अगर भारत इसे पूरी तरह तैयार कर लेता है, तो ऐसा करने वाला तीसरा देश बन जाएगा। हालांकि कॉमर्शियल लेवेल पर रूस सबसे आगे है।

‘क्रिटिकलिटी’ का अर्थ


– परमाणु रिएक्टर के संदर्भ में ‘क्रिटिकलिटी’ वह अवस्था है जब परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया (Nuclear Chain Reaction) आत्मनिर्भर (Self-sustaining) हो जाती है।
– इसका अर्थ है कि विखंडन (Fission) से निकलने वाले न्यूट्रॉन अन्य नाभिकों के विखंडन (Nuclear Fission) के लिए पर्याप्त हैं, जिससे ऊर्जा का निरंतर उत्पादन संभव होता है।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम (Three-Stage Programme)
– होमी जे. भाभा द्वारा तैयार इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करके ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

स्‍टेज : रिएक्टर का प्रकार : ईंधन : उद्देश्य
स्‍टेज-1 : दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) : प्राकृतिक यूरेनियम (PHWR) : प्लूटोनियम उत्पादन
स्‍टेज-2 : फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR-सोडियम) : प्लूटोनियम + यूरेनियम (FBR) : अधिक ऊर्जा + अधिक प्लूटोनियम
स्‍टेज-3 : थोरियम आधारित रिएक्टर : थोरियम आधारित : ऊर्जा आत्मनिर्भरता

तीनों का रोल अलग है:
– पहला चरण → आज की बिजली, साथ में प्लूटोनियम-239 बनना
– दूसरा चरण → ज्यादा बिजली + भविष्य का ईंधन
– तीसरा चरण → भविष्य की स्थायी बिजली (थोरियम) {प्लूटोनियम की मदद से थोरियम को ईंधन (यूरेनियम-233) में बदलता है}

नोट
– प्लूटोनियम प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता, बल्कि इसे परमाणु रिएक्टर में यूरेनियम से कृत्रिम रूप से बनाया जाता है। जबकि थोरियम को प्‍लूटोनियम की मदद से यूरेनियम बनाया जाता है। तीनों स्‍टेज एक चक्र है, जिससे ज्‍यादा ऊर्जा प्राप्‍त कर सकते हैं।
भारत में प्राकृतिक यूरेनियम सीमित है, इसलिए हम उसे केवल स्टेज-1 और स्टेज-2 में उपयोग करते हैं ताकि हम प्लूटोनियम का पर्याप्त भंडार बना सकें। एक बार जब हमारे पास पर्याप्त प्लूटोनियम हो जाता है, तो हम स्टेज-3 में प्रवेश करते हैं।

जितना ईंधन खर्च करता है, उससे ज्यादा पैदा करता है


– फास्ट ब्रीडर रिएक्टर एक खास तरह का परमाणु रिएक्टर है, जिसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ईंधन (MOX) का इस्तेमाल होता है।
– इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना ईंधन खर्च करता है, उससे ज्यादा प्‍लूटोनियम ईंधन पैदा कर सकता है।
– यह स्‍टेज-1 से प्राप्त ‘Spent Fuel’ का उपयोग करता है, जिससे यूरेनियम की उपयोगिता दक्षता 1% से बढ़कर 10% से अधिक हो जाती है।
– यह तकनीक भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन के लिए भी रास्ता तैयार करती है, जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

तकनीकी चुनौती: लिक्विड सोडियम (Coolant)


– PFBR में साधारण जल के बजाय तरल सोडियम का उपयोग शीतलक के रूप में किया जाता है।
– लाभ: सोडियम तेजी से गर्मी सोखता है, न्यूट्रॉन की गति को धीमा नहीं करता (जो ‘फास्ट’ रिएक्टर के लिए जरूरी है) और इसे उच्च दबाव की आवश्यकता नहीं होती।
– जोखिम: सोडियम हवा के संपर्क में आने पर जलता है और पानी के साथ हिंसक प्रतिक्रिया करता है। जापान (Monju) और फ्रांस (Superphénix) में इसके रिसाव के कारण परियोजनाएं बंद करनी पड़ी थीं।

भारत के लिए क्यों जरूरी
– बिजली की बढ़ती मांग: सोलर और विंड एनर्जी मौसम पर निर्भर हैं, जबकि न्यूक्लियर प्लांट लगातार बिजली देते हैं। एक रिएक्टर लाखों घरों की जरूरत पूरी कर सकता है।
– थोरियम का भंडार: भारत के पास यूरेनियम कम है, लेकिन थोरियम का दुनिया में सबसे बड़ा भंडार है। (भारत में केरल के चवारा तट, तमिलनाडु तट खासकर कलपक्कम के आसपास, ओडिशा तट, आंध्र प्रदेश तट पर रेत में है) फास्ट ब्रीडर रिएक्टर थोरियम को यूरेनियम-233 में बदल सकता है।
– पर्यावरण: भारत ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। कोयले के मुकाबले न्यूक्लियर एनर्जी साफ (क्लीन) मानी जाती है।
– कम जमीन में ज्यादा बिजली: न्यूक्लियर प्लांट, सोलर प्लांट की तुलना में बहुत कम जमीन में उतनी ही बिजली पैदा कर सकते हैं।

स्‍टेज थ्री भी सफल होना जरूरी


– चूँकि भारत के पास दुनिया का लगभग 25% थोरियम भंडार है, इसलिए स्टेज-3 के सफल होने का मतलब है कि भारत को बिजली बनाने के लिए कभी भी दूसरे देशों से यूरेनियम आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम अगले 400-500 सालों के लिए ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएंगे।

जोखिम
– जब हम परमाणु ऊर्जा की बात करते हैं, तो यह सिर्फ तकनीकी प्रगति नहीं है, बल्कि इसके साथ ‘अस्तित्वगत जोखिम’ (Existential Risks) भी जुड़े हैं।
– यूरोप के कई देशों, विशेष रूप से जर्मनी और इटली ने परमाणु ऊर्जा से पूरी तरह किनारा कर लिया है या इसे कम कर रहे हैं।
– हालांकि फ्रांस अपनी 70% बिजली परमाणु से बनाता है और उसका तर्क है कि ‘नेट-जीरो’ (Net-Zero) और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए परमाणु ऊर्जा ही एकमात्र स्थिर विकल्प है।

परमाणु दुर्घटनाओं का डर (The Shadow of Past Disasters)
– इतिहास की तीन बड़ी घटनाओं ने परमाणु ऊर्जा के प्रति वैश्विक नजरिया बदल दिया:
– चेरनोबिल (1986, यूक्रेन): मानवीय भूल और डिजाइन की कमी के कारण हुए इस विस्फोट ने पूरे यूरोप में रेडियोधर्मी बादल फैला दिए थे।
– फुकुशिमा दाइची (2011, जापान): सुनामी के कारण रिएक्टर की कूलिंग फेल हो गई और ‘मेल्टडाउन’ हुआ। इसके बाद जर्मनी ने अपने सभी परमाणु रिएक्टरों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला लिया (Energiewende नीति)।
– थ्री माइल आइलैंड (1979, अमेरिका): इस दुर्घटना ने परमाणु सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए। सौभाग्य से, चेरनोबिल की तरह यहाँ कोई बड़ा विस्फोट नहीं हुआ और न ही कोई तुरंत मारा गया। लेकिन रेडियोधर्मी गैस निकलने की खबर से लाखों लोगों में भगदड़ मच गई। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इलाका छोड़ने की सलाह दी गई।

रेडियोधर्मी अपशिष्ट का निपटान (The 100,000-Year Problem)
– परमाणु ऊर्जा का सबसे बड़ा ‘सिरदर्द’ उसका कचरा (Spent Fuel) है।
– स्थायित्व: यह कचरा हजारों सालों तक घातक रूप से रेडियोधर्मी (radioactive) रहता है।
– समाधान का अभाव: दुनिया में अभी तक एक भी ऐसा ‘डीप जियोलॉजिकल रिपॉजिटरी’ (जमीन के नीचे गहरा सुरक्षित भंडार) पूरी तरह चालू नहीं हुआ है जो इस कचरे को सुरक्षित रख सके। फिनलैंड का Onkalo प्रोजेक्ट एकमात्र ऐसा प्रयास है जो अभी तैयार हो रहा है।

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Q. ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) द्वारा ‘क्रिटिकैलिटी’ (Criticality) हासिल करने के संदर्भ में, इस शब्द का सही अर्थ क्या है?
In the context of the ‘Prototype Fast Breeder Reactor’ (PFBR) achieving ‘criticality’, what is the correct meaning of this term?

a. रिएक्टर का अपनी पूर्ण विद्युत उत्पादन क्षमता (500 MW) पर पहुँच जाना
b. परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया का सुरक्षित रूप से आत्मनिर्भर (Self-sustaining) हो जाना
c. रिएक्टर द्वारा थोरियम का उपयोग करके व्यावसायिक बिजली उत्पादन शुरू करना
d. रिएक्टर के कोर का अत्यधिक गर्म होकर पिघल जाना

Answer: b. परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया का सुरक्षित रूप से आत्मनिर्भर (Self-sustaining) हो जाना

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Q. ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) का डिजाइन किसने तैयार किया?
Who designed the ‘Prototype Fast Breeder Reactor’ (PFBR)?

a. DRDO
b. ISRO
c. IGCAR
d. HAL

Answer: c. IGCAR

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Q. PFBR में शीतलक (Coolant) के रूप में ‘तरल सोडियम’ के उपयोग का प्राथमिक लाभ क्या है?
What is the primary advantage of using ‘liquid sodium’ as a coolant in the PFBR?

a. यह न्यूट्रॉन की गति को धीमा (Moderate) कर देता है।
b. यह भारी जल की तुलना में बहुत सस्ता और आसानी से उपलब्ध है।
c. यह उच्च तापमान पर भी कुशलता से गर्मी सोखता है और इसे उच्च दबाव की आवश्यकता नहीं होती।
d. यह हवा और पानी के संपर्क में आने पर पूरी तरह निष्क्रिय रहता है।

Answer: c. यह उच्च तापमान पर भी कुशलता से गर्मी सोखता है और इसे उच्च दबाव की आवश्यकता नहीं होती।

(सोडियम न्यूट्रॉन को ‘फास्ट’ रखता है और इसकी हीट ट्रांसफर क्षमता बहुत अधिक होती है।)

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4. इंडियन नेवी ‘कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026’ का पहले संस्करण कहां आयोजित हुआ?
Where was the first edition of the Indian Navy ‘Commanders’ Conference 2026′ held?

a. पश्चिम बंगाल
b. नई दिल्ली
c. केरल
d. बेंगलुरू

Answer: b. नई दिल्ली

– ‘कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026’ का पहला संस्करण नई दिल्ली में 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक हुआ।
– इसमें नेवी के टॉप कमांडर्स समुद्री सुरक्षा, परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक दिशा तय की।

इन मुद्दों पर होगी चर्चा
– ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीखे गए ऑपरेशनल सबकों की समीक्षा
– कॉन्फ्रेंस में ब्लू-वॉटर क्षमताओं के विस्तार, आधुनिक प्रशिक्षण, मानव संसाधन प्रबंधन, प्लेटफॉर्म्स की युद्धक तैयारियों पर चर्चा
– साथ ही, बिना चालक वाले सिस्टम्स और उन्नत तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर

Navy
स्थापना: 26 जनवरी, 1950
मुख्यालय: नौसेना भवन, नई दिल्ली
चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (CNS): एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी

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5. भारतीय मूल के किस वैज्ञानिक को अमेरिका में प्रतिष्ठित रिसर्च पद ‘Governor’s Chair’ के लिए चुना गया?
Which scientist of Indian origin was selected for the prestigious research position of ‘Governor’s Chair’ in the United States?

a. डॉ. स्वाति मोहन
b. अमित क्षत्रिय
c. दीप जरीवाला
d. गुरतेज संधू

Answer: c. दीप जरीवाला

– दीप जरीवाला 2027 से ये पद संभालेंगे।
– अभी वह अमेरिका के पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं।
– उन्‍हें UT-ORNL Governor’s Chair for Quantum Devices के लिए चुना गया है।
– यह पद अमेरिका के दो बड़े संस्थानों, टेनेसी विश्वविद्यालय और ओक रिज राष्ट्रीय प्रयोगशाला के संयुक्त सहयोग से संचालित होता है।
– ‘Governor’s Chair’ प्रोग्राम अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पदों में से एक माना जाता है।
– नई जिम्मेदारी में जरीवाला छात्रों को पढ़ाने के साथ गाइड करेंगे।
– साथ ही एडवांस रिसर्च को लीड करेंगे।
– यह नियुक्ति अमेरिका की Quantum Technology Strategy का हिस्सा मानी जा रही है।
– इसके जरिए अमेरिका का लक्ष्य वैज्ञानिक प्रतिभा को मजबूत करना, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना और वैश्विक टेक्नोलॉजी रेस में आगे रहना है।

जरीवाला का रिसर्च इन क्षेत्रों में है:-
– Quantum Materials
– Microelectronics
– Future Computing Technologies

उनकी उपलब्धियाँ:
180+ रिसर्च पेपर्स
कई पेटेंट
उच्च स्तर के वैश्विक सिटेशन

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6. सुसान कॉयल किस देश की सेना की पहली महिला प्रमुख बनीं?
Susan Coyle became the first female chief of which country’s army?

a. पूर्वी तिमोर
b. इंडोनेशिया
c. न्यूजीलैंड
d. ऑस्ट्रेलिया

Answer: d. ऑस्ट्रेलिया

– ऑस्ट्रेलिया के 125 वर्ष के इतिहास में पहली बार एक महिला को सेना प्रमुख बनाने का फैसला किया है।
– कब से – लेफ्टिनेंट जनरल सुसान कॉयल जुलाई 2026 से सेना प्रमुख
– 55 वर्षीय कॉयल 1987 में सेना में शामिल हुई थीं।
– ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस फोर्स में फिलहाल महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 21% है।
– और 2030 तक इसे 25% करने का लक्ष्य रखा गया है।

(ऑस्ट्रेलिया)
राजधानी: कैनबरा
प्रधानमंत्री: एंथनी अल्बनीज
मुद्रा: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर
भाषा: अंग्रेजी
आबादी: 2.84 करोड़
पड़ोसी देश: इंडोनेशिया, पूर्वी तिमोर, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप, वानुअतु न्यू कैलेडोनिया, न्यूजीलैंड।

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7. जलियांवाला बाग नरसंहार दिवस कब मनाया गया?
When was Jallianwala Bagh Massacre Day observed?

a. 13 अप्रैल
b. 14 अप्रैल
c. 12 अप्रैल
d. 15 अप्रैल

Answer: a. 13 अप्रैल

– इस नरसंहार ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था।
– 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों की संख्या में लोग जमा हुए थे।
– जनरल डायर ने इस दिन कर्फ्यू लगाया हुआ था।
– उसने सैनिकों के साथ पहुंचकर गोली चलवा दी।
– फायरिंग के वक्त वहां करीब 25 हजार लोग मौजूद थे।
– यहां से निकलने को एक ही रास्‍ता था, जहां से गोलियों की बौछार हो रही थी।
– ब्रिटिश अनुमानों के अनुसार, मरने वालों की कुल संख्या लगभग 291 थी।
– इसके विपरीत, 500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
– और 1000 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।
– गोलीबारी तभी रोकी गई जब सैनिकों के पास मौजूद सारा गोला-बारूद खत्म हो गया।

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8. कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स (CWG) 2030 में इनमें से किन खेलों को शामिल किया जाएगा?
Which of these sports will be included in the 2030 Commonwealth Games (CWG)?

a. फुटबॉल और बास्केटबॉल
b. हॉकी और क्रिकेट
c. वॉलीबॉल और क्रिकेट
d. हैंडबॉल और क्रिकेट

Answer: b. हॉकी और क्रिकेट (2030 गेम्‍स का मेजबान शहर अहमदाबाद होगा)

– केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया 2026 ग्लास्गो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी, निशानेबाजी, स्क्वाश, टेबल टेनिस और कुश्ती जैसे नौ मुख्य खेलों को हटा दिया गया है।
– जबकि 2030 के कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में क्रिकेट, हॉकी रहेंगे।
– इसमें एथलेटिक्स, स्विमिंग, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग पहले ही कन्फर्म हो चुके हैं।
– इसके अलावा भारतीय पारंपरिक खेलों कबड्डी, योगासन, खोखो और मलखम्ब में से किन्‍हीं दो खेलों को भी शामिल किया जाएगा।
– 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 17 खेल होने की संभावना है।
– 2030 गेम्‍स का मेजबान शहर अहमदाबाद होगा।
– भारत ने इससे पहले 2010 में कॉमनवेल्थ का सफल आयोजन किया था।
– कॉमनवेल्थ गेम्स अध्यक्ष डोनाल्ड रूकारे की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल ने अप्रैल 2026 में तैयारियों का निरीक्षण किया।

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9. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) शौर्य दिवस कब मनाया जाता है?
When is Central Reserve Police Force (CRPF) Valour Day celebrated?

a. 10 अप्रैल
b. 9 अप्रैल
c. 8 अप्रैल
d. 7 अप्रैल

Answer: b. 9 अप्रैल

– 9 अप्रैल 1965 को CRPF की टुकड़ी ने गुजरात के कच्छ में स्थित सरदार पोस्ट में पाकिस्तानी सेना को हराया था।
– CRPF ने 34 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और चार को जिंदा पकड़ लिया।
– इस युद्ध में 6 CRPF कर्मी शहीद हो गए थे।
– CRPF भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (Armed Police Forces) है।
– यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधिकार के तहत कार्य करता है।

CRPF का मुख्यालय- नई दिल्ली
गठन: 27 जुलाई 1939
आदर्श वाक्य: सेवा और वफादारी।

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10. मानव अंतरिक्ष उड़ान का अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है?
When is the International Day of Human Space Flight celebrated?

a. 11 अप्रैल
b. 12 अप्रैल
c. 13 अप्रैल
d. 14 अप्रैल

Answer: b. 12 अप्रैल

– इसी दिन 12 अप्रैल 1961 को, सोवियत नागरिक यूरी गगारिन द्वारा पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की थी।
– वह अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले व्‍यक्ति बने थे।
– संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिवस घोषित किया हुआ है।


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