4 अप्रैल 2026 करेंट अफेयर्स

यह 4 अप्रैल 2026 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।

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1. नासा के आर्टेमिस-II मिशन का लक्ष्‍य क्‍या है?
What is the goal of NASA’s Artemis II mission?

a. चंद्रमा की परिक्रमा करने वाला मानव मिशन
b. चंद्रमा पर लैंड करने वाला मानव मिशन
c. चंद्रमा पर मानव रहित लैंडिंग
d. चंद्रमा पर मानव के लिए वाहन भेजना

Answer: a. चंद्रमा की परिक्रमा करने वाला मानव मिशन

– लॉन्च तिथि: आर्टेमिस-II मिशन 1 अप्रैल, 2026 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। (नोट: पूर्व में यह 2024-25 के लिए निर्धारित था, लेकिन तकनीकी परीक्षणों के कारण इसमें देरी हुई)।
– लॉन्च स्थल: Kennedy Space Center
– लॉन्च व्हीकल: यह नासा के Space Launch System (SLS) रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया, जो दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है।
– स्पेसक्राफ्ट: इस मिशन में ओरियन (Orion) कैप्सूल का उपयोग किया गया है।
– आर्टेमिस नाम : यूनानी पौराणिक कथाएं (Greek Mythology): यूनानी देवताओं में ‘चंद्रमा की देवी’ (Goddess of the Moon) का नाम है।

मिशन की अवधि और यात्रा (Trajectory)
– अवधि: यह लगभग 10 दिनों का मिशन है।
– यात्रा का मार्ग: ओरियन यान पृथ्वी की दो बार परिक्रमा, ताकि प्रणालियों की जांच हो सके। इसके बाद, यह ‘लूनर फ्लाईबाई’ (Lunar Flyby) के लिए चंद्रमा की ओर बढ़ा। यह ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्ट्री’ का उपयोग किया, जिसमें चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण यान को प्राकृतिक रूप से वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा (Slingshot Effect)।
– दूरी: यह चंद्रमा के ‘सुदूर हिस्से’ (Far Side) से लगभग 7,400-10,000 किमी ऊपर से गुजरेगा।

क्रू मेंबर (अन्तरिक्ष यात्री)
1) रीड वाइसमैन (Commander): अमेरिकी नौसेना के अनुभवी पायलट।
2) विक्टर ग्लोवर (Pilot): चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति।
3) क्रिस्टीना कोच (Mission Specialist): चंद्रमा के मिशन पर जाने वाली पहली महिला।
4) जेरेमी हेंसन (Mission Specialist): कनाडा के अंतरिक्ष यात्री और चंद्रमा की कक्षा में जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी।

मिशन के मुख्य उद्देश्य (Objectives)
– भविष्य की नींव: यह मिशन आर्टेमिस-3 (जो चांद पर लैंडिंग करेगा) के लिए एक ‘ड्रेस रिहर्सल’ है।
– प्रणाली सत्यापन: ओरियन यान के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, संचार और नेविगेशन की गहरी अंतरिक्ष (Deep Space) में जांच करना।
– मानव सुरक्षा: यह सुनिश्चित करना कि रेडिएशन और अत्यधिक तापमान में मानव सुरक्षित रह सकें।

50+ वर्षों के बाद ही क्यों? (Why Now?)
– अपोलो 17 (1972) के बाद से मानव चांद पर नहीं गया। अब दोबारा लॉन्चिंग के पीछे कई कारण हैं:
– तकनीकी विकास: अब अधिक उन्नत कंप्यूटिंग, 3D प्रिंटिंग और स्वायत्त प्रणालियाँ हैं।
– स्थायी उपस्थिति: अपोलो केवल ‘जाने और वापस आने’ के लिए था, जबकि आर्टिमिस का लक्ष्य वहां स्थायी बेस (Base Camp) बनाना है।
– संसाधन खोज: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ (पानी) की खोज करना, जिसका उपयोग ऑक्सीजन और ईंधन बनाने में किया जा सकता है।
– मंगल की तैयारी: चांद को मंगल ग्रह (Mars) तक जाने के लिए एक ‘स्टॉपओवर’ (Gateway) के रूप में उपयोग करना।

चुनौतियाँ (Challenges)
– रेडिएशन: पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर जाने पर अंतरिक्ष यात्रियों को हानिकारक ब्रह्मांडीय किरणों का सामना करना पड़ता है।
– हीट शील्ड: पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के समय ओरियन की गति लगभग 40,000 किमी/घंटा होगी, जिससे उत्पन्न घर्षण और गर्मी को सहना बड़ी चुनौती है।
– लागत: आर्टिमिस प्रोग्राम की लागत अरबों डॉलर ($90 बिलियन+) है, जिसके लिए निरंतर राजनीतिक और आर्थिक समर्थन की आवश्यकता होती है।

चंद्रमा पर मानव मिशनों की सूची (Manned Moon Missions)
वर्ष, मिशन, उपलब्धि
1968 : अपोलो 8 : चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने वाला पहला मानव मिशन (लैंडिंग नहीं)
1969 : अपोलो 10 : चंद्रमा पर उतरने का अंतिम अभ्यास (फ्लाईबाई)
1969 : अपोलो 11 : ऐतिहासिक: नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चांद पर उतरने वाले पहले मानव बने।
1969 : अपोलो 12 : दूसरी सफल लैंडिंग
1971 : अपोलो 14 : चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग
1971 : अपोलो 15 : पहली बार ‘लूनर रोवर’ (वाहन) का उपयोग
1972 : अपोलो 16 : चंद्रमा के पहाड़ी क्षेत्रों का अध्ययन
1972 : अपोलो 17 : अंतिम मानव मिशन; यूजीन सरनन चांद पर चलने वाले आखिरी व्यक्ति थे
2026 : आर्टेमिस 2 : 50 साल बाद चंद्रमा की कक्षा में मानव की वापसी (वर्तमान मिशन)

आर्टेमिस
– आर्टेमिस 1: यह एक मानव रहित परीक्षण उड़ान थी जिसने SLS रॉकेट और ओरियन कैप्सूल की सफलता को साबित किया। (2022 में संपन्न)
– आर्टेमिस 2: यह चंद्रमा की परिक्रमा करने वाला पहला मानव मिशन है, जो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ प्रणालियों की जांच करेगा। (अप्रैल 2026 में लॉन्च)
– आर्टेमिस 3: यह मिशन चंद्रमा की कक्षा में ‘स्टारशिप’ और नए स्पेससूट्स का परीक्षण कर लैंडिंग की नींव रखेगा। (संभावित 2027)
– आर्टेमिस 4: इस ऐतिहासिक मिशन के तहत 50 साल बाद इंसान फिर से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा। (संभावित 2028)
– आर्टेमिस 5: इसमें ‘लूनर टेरेन व्हीकल’ (चंद्र वाहन) भेजा जाएगा और चंद्रमा पर स्थायी आधार बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। (संभावित 2029)
– अन्य (आर्टेमिस 6-11): ये मिशन ‘लूनर गेटवे’ अंतरिक्ष स्टेशन का विस्तार करेंगे और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए ट्रेनिंग ग्राउंड का काम करेंगे।

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2. किस प्रोजेक्‍ट के तहत निर्मित स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘INS तारागिरी’ का इंडियन नेवी में शामिल किया गया?
Under which project was the stealth guided-missile frigate ‘INS Taragiri’ constructed and commissioned into the Indian Navy?

a. प्रोजेक्ट 34
b. प्रोजेक्ट 25A
c. प्रोजेक्ट 18
d. प्रोजेक्ट 17A

Answer: d. प्रोजेक्ट 17A (यह नीलगिरि-क्लास का युद्धपोत है)

– INS तारागिरी 3 अप्रैल 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में इंडियन नेवी में शामिल किया गया।
– इसे मझगांव डॉक शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार किया है।
– वॉरशिप में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, MF-Star (रडार), मीडियम रेंज सर्फेस टु एयर मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम लगा हुआ है।
– यह 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम के साथ एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो से भी लैस है।

नीलगिरि-क्लास का चौथा वॉरशिप
– भारत की नीलगिरी क्लास (Project 17A) में कुल 7 स्टील्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं।
– तारागिरी इस क्लास का चौथा वॉरशिप है।
– ‘तारागिरी’ उसी नाम के पुराने वॉरशिप का एडवांस्ड वर्जन है, जिसने 1980 से 2013 तक नेवी में 33 सालों तक सेवा दी थी।
– इस वॉरशिप को वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
– प्रोजेक्ट 17-ए के युद्धपोत में पिछली पी-17 (शिवालिक) क्लास की तुलना में अधिक आधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं।

खासियत
– इसका वजन 3510 टन और लंबाई 149 मीटर है।
– इसकी चौड़ाई 17.8 मीटर है।
– ये 52 किमी/ घंटा के स्‍पीड से चलता है।
– रडार से आसानी से पकड़ में नहीं आता है।
– दुश्‍मन की गतिविधि पहले ही पकड़ने की क्षमता।
– हवा, पानी और पनडुब्‍बी, तीनों से लड़ने में सक्षम।
– जहाज का 75% हिस्सा स्वदेशी रूप से निर्मित है।
– यह पोत कई दिनों तक समुद्र में रह सकता है और विशाल क्षेत्रों को कवर कर सकता है।
– इसका इंजन गैस और डीजल दोनों से चलता है।
– साथ ही इसमें कामोव से लेकर MH-60R तक किसी भी कंपनी के कम से कम एक हेलीकॉप्टर को ले जाने की क्षमता है।

प्रोजेक्ट 17A :
– प्रोजेक्ट 17, अल्फा फ्रिगेट्स (P-17A) को भारतीय नौसेना द्वारा वर्ष 2019 में स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट की एक शृंखला के निर्माण के लिये लॉन्च किया गया था।
– इनका निर्माण वर्तमान में दो कंपनियों – मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) {मुंबई} और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) {कोलकाता} द्वारा किया जा रहा है।
– इन गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स का निर्माण एक विशिष्ट स्टील्थ डिज़ाइन के साथ किया गया है, जिसमें रडार से बचने की तकनीक शामिल है जो इसे दुश्मन की नज़रों से बचाता है।
– प्रोजेक्ट 17A के तहत लॉन्च किया गया पहला स्टील्थ शिप नीलगिरि था, जिसे वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया था।
– सभी के नाम हिमालय की एक पहाड़ी शृंखला के नाम पर रखा गया है।
– ये हैं, ‘नीलगिरि’, ‘उदयगिरि’, ‘हिमगिरि’, ‘तारागिरि’ और ‘दुनागिरि’ और छठा युद्धपोत है ‘विंध्यगिरि’।

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3. भारत की तीसरी न्‍यूक्लियर से संचालित सबमरीन का नाम बताएं, जो नौसेना में शामिल हुई?
What is the name of India’s third nuclear-powered submarine inducted into the Navy?

a. INS अरिघात
b. INS पास
c. INS अरिहंत
d. INS अरिदमन

Answer: d. INS अरिदमन

– इंडियन एक्‍सप्रेस न्‍यूजपेपर के अनुसार इसे गुप्त रखा गया है और जलावतरण गुप्त रूप से किया गया है।
– INS अरिदामन के चालू होने पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
– रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एक संक्षिप्त पोस्ट में लिखा: “शब्द नहीं, शक्ति है ‘अरिदमन’” – “अरिदमन सिर्फ एक शब्द नहीं, शक्ति है।”

भारत के पास 3 परमाणु पनडुबबी
1) INS अरिहंत को जुलाई 2009 में लॉन्च किया गया था, जिसे 2016 में नेवी में शामिल किया गया।
2) INS अरिघात, अगस्त 2024 में कमीशन की गई।
3) INS अरिदमन, अप्रैल 2026 में नेवी में शामिल हुआ
4) (प्रस्‍तावित पनडुब्‍बी)

INS अरिदमन के बारे में
– इसे सबमर्सिबल बैलिस्टिक न्यूक्लियर (SSBN) पनडुब्बी कहेंगे।
– इसे विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना के शिप बिल्डिंग सेंटर (SBC) में बनाया गया।
– इसका वजन करीब 6,000 टन (60 हजार क्विंटल) है।
– पूरी तरह जलमग्न होने पर वजन बढ़कर 7,000 टन। (क्योंकि इसमें पानी भर जाता है)।
– पानी के भीतर करीब 44 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली अरिदमन का पता लगाना काफी मुश्किल है।
– K-15 और K-4 जैसी घातक बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है।
– करीब 95 से 100 कर्मियों का दल इसे संचालित करता है।
– संचालन में 83 मेगावाट के छोटे परमाणु रिएक्टर (न्यूक्लियर इंजन) का इस्तेमाल।
– यह तकनीक तमिलनाडु के कलपक्कम में विकसित पुराने नौसैनिक रिएक्टर पर आधारित।

न्‍यूक्लियर सबमरीन और डीजल सबमरीन में क्‍या फर्क है?
– डीजल से चलने वाले पनडुब्‍बी के इंजन को ऑक्‍सीजन की आवश्‍यकता होती है। इस ऑक्‍सीजन के लिए समुद्र की सतह तक आना पड़ता है। इसकी वजह से यह लंबे समय तक छिपकर नहीं रह सकता है।
– जबकि परमाणु पनडुब्‍बी के रिएक्‍टर को ऑक्‍सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिए यह लंबे समय तक समुद्र के नीचे छिपकर रह सकता है। दुश्‍मन इसका पता नहीं लगा सकते हैं। हां, फूड आइटम और पनडुब्‍बी में मौजूद सैनिकों के ऑक्‍सीजन के लिए बाहर आना पड़ता है, लेकिन लंबे समय तक इसे स्‍टोर करने का लंबे समय का इंतजाम परमाणु पनडुब्‍बी में व्‍यवस्‍था होती है।

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4. किस देश ने अपने रक्षा बजट में 42% की वृद्धि करके $1.5 ट्रिलियन करने का प्रस्‍ताव अपनी संसद को भेजा, जिससे दुनिया में हथियारों की होड़ शुरू होने की आशंका जताई जा रही है?
Which country has submitted a proposal to its parliament to increase its defense budget by 42% to $1.5 trillion, raising fears of a global arms race?

a. रूस
b. चीन
c. यूएसए
d. फ्रांस

Answer: c. यूएसए

– ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच ट्रम्प ने अमेरिकी संसद से रक्षा बजट में 1.5 ट्रिलियन डॉलर की भारी बढ़ोतरी की मांग की है।
– ट्रम्प पहले से ही अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य खर्च बढ़ाने की बात करते रहे हैं।
– फिलहाल अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 839 बिलियन डॉलर (करीब 70 लाख करोड़ रुपए) है।
– अमेरिका द्वारा 1.5 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा बजट मांगना वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
– यह न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे को भी प्रभावित करेगा।

द्वितीय विश्‍वयुद्ध के बाद सबसे बड़ी बढ़ोत्‍तरी
– ऐतिहासिक वृद्धि: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह रक्षा खर्च में सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि (लगभग 42%) है।
– ईरान युद्ध का प्रभाव: बजट में भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण ईरान के साथ चल रहा संघर्ष और उससे जुड़ी परिचालन लागतें हैं।
– ‘गन बनाम बटर’ (Gun vs. Butter) बहस: गैर-रक्षा और विवेकाधीन खर्चों (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा) में 10% की कटौती कर रक्षा में $500 बिलियन जोड़ना यह दर्शाता है कि अमेरिका ‘कल्याण’ के बजाय ‘सैन्य शक्ति’ को प्राथमिकता दे रहा है।

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अमेरिका का टोटल बजट
– अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए वित्त वर्ष 2027 के बजट प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका का कुल अनुमानित बजट लगभग $7 ट्रिलियन (7 लाख करोड़ डॉलर) के आसपास रहने की संभावना है।

यहाँ बजट के मुख्य घटकों का विवरण दिया गया है:

1. कुल अनुमानित खर्च (Total Outlays)
कुल बजट: अमेरिका का वार्षिक संघीय खर्च आमतौर पर $7 ट्रिलियन के करीब रहता है। (2026 में यह लगभग $7.4 ट्रिलियन था)।

बजट का स्वरूप: अमेरिकी बजट का लगभग दो-तिहाई (2/3) हिस्सा ‘अनिवार्य खर्च’ (Mandatory Spending) जैसे सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर और मेडिकेड पर खर्च होता है, जो ‘ऑटोपायलट’ पर चलता है। बाकी हिस्सा ‘विवेकाधीन खर्च’ (Discretionary Spending) होता है, जिसमें रक्षा और अन्य विभाग आते हैं।

2. रक्षा बजट (Defence Budget)
– प्रस्तावित राशि: $1.5 ट्रिलियन।
– वृद्धि: यह 2026 के $1 ट्रिलियन के रक्षा बजट से 42% (लगभग $445 बिलियन) की भारी वृद्धि है।
– कारण: ईरान के साथ युद्ध (War in Iran) के कारण बढ़ते सैन्य खर्च और हथियारों की कमी को पूरा करना।

3. गैर-रक्षा विवेकाधीन खर्च (Non-Defence Spending)
कटौती: राष्ट्रपति ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की भरपाई के लिए गैर-रक्षा खर्चों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण) में 10% की कटौती (लगभग $73 बिलियन) का प्रस्ताव दिया है।
– रणनीति: प्रशासन का लक्ष्य कई संघीय कार्यक्रमों की जिम्मेदारी राज्य और स्थानीय सरकारों को सौंपना है।

4. अन्य महत्वपूर्ण आवंटन
न्याय विभाग (DOJ): $40.8 बिलियन (13% की वृद्धि), मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए।
– अनुभवी मामले (Veterans Affairs): कुल $483 बिलियन का अनुरोध।

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चीन, रूस और भारत पर प्रभाव

1. चीन (The Peer Competitor)
अमेरिका का इतना बड़ा बजट चीन के लिए एक ‘आर्म्स रेस’ (हथियारों की होड़) शुरू कर सकता है। चीन अपनी ‘Symmetric (सिमेट्रिक) Warfare’ रणनीति के तहत अपनी नौसेना और मिसाइल तकनीक में निवेश बढ़ाएगा। हालांकि, अमेरिका और चीन के रक्षा बजट में अब लगभग 4-5 गुना का अंतर हो जाएगा।

2. रूस (The Defensive Realist)
रूस वर्तमान में पहले से ही अपनी जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च कर रहा है। अमेरिका की इस वृद्धि से रूस पर अपने ‘परमाणु निवारक’ (Nuclear Deterrent) को और आधुनिक बनाने का दबाव बढ़ेगा, भले ही उसकी अर्थव्यवस्था पर इसका बोझ पड़े।

3. भारत (The Strategic Partner)
भारत के लिए यह स्थिति मिश्रित है:
– चुनौती: वैश्विक स्तर पर हथियारों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
– अवसर: अमेरिका के साथ रक्षा साझेदारी (जैसे iCET) के तहत भारत को उन्नत तकनीक मिल सकती है। भारत को अपने ‘पड़ोस’ में स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने रक्षा बजट और ‘थिएटर कमांड’ पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

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5. अंतरराष्ट्रीय खदान जागरुकता और खनन कार्य सहायता दिवस कब मनाया जाता है?
When is the International Mine Awareness and Mining Work Assistance Day observed?

a. 5 अप्रैल
b. 4 अप्रैल
c. 3 अप्रैल
d. 2 अप्रैल

Answer: b. 4 अप्रैल

– लोगों को लैंडमाइंस की वजह से पैदा हुए खतरे से सुरक्षा देने, स्वास्थ्य और जीवन से सम्बंधित परेशानियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ये दिवस मनाया जाता है।
– 8 दिसंबर 2005 को जनरल असेंबली (UN) ने 4 अप्रैल को यह दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी।
– यह पहली बार 4 अप्रैल, 2006 को मनाया गया था।
– इस वर्ष, UNMAS ने “माइन एक्शन कैन नॉट वेट” अभियान के तहत इस दिन को स्वीकार करने का निर्णय लिया है

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6. उचराल न्याम-ओसोर किस देश के प्रधानमंत्री बने?
Ukhnaagiin Nyamaa became the Prime Minister of which country?

a. मंगोलिया
b. उत्तर कोरिया
c. कजाकिस्तान
d. ताइवान

Answer: a. मंगोलिया

– मंगोलिया की संसद ने उचराल न्याम-ओसोर को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
– वह मंगोलियाई पीपुल्स पार्टी (एमपीपी) से जुड़े हैं, उन्हें 107 सांसदों में से 88 वोट मिले।
– 39 वर्ष के उचराल पहले उप प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल सदस्य और संसद अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं।
– साथ ही एमपीपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

मंगोलिया
राष्ट्रपति: खानागीन खुरेलसुख
राजधानी: उलानबातर
भाषा: मंगोलियाई
मुद्रा: मंगोलियाई तुगरिक
आबादी: 35 लाख
पड़ोसी देश: रूस और चीन।

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7. किस राज्‍य की पुलिस बल को उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति ध्वज से सम्मानित किया गया?
The police force of which state was honored with the President’s Colours for meritorious service?

a. बिहार पुलिस
b. ओडिशा पुलिस
c. तेलंगाना पुलिस
d. पश्चिम बंगाल पुलिस

Answer: b. ओडिशा पुलिस

– ओडिशा पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस कलर से सम्मानित किया गया है।
– ये भारत में किसी भी पुलिस बल या सैन्य इकाई को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।
– यह घोषणा उत्कल दिवस 1 अप्रैल को ओडिशा के 90वें पुलिस स्थापना दिवस के अवसर पर की गई है।
– गृह मंत्रालय द्वारा किए गए मूल्यांकन के बाद ओडिशा पुलिस को यह पुरस्कार मिला है।
– पुलिस बल ने अपराध रोकथाम, आधुनिक पुलिसिंग तकनीक, नागरिक-केंद्रित पहल और प्रभावी माओवादी-विरोधी अभियानों सहित कई क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है।

राष्ट्रपति के पुलिस ध्वज का महत्व
– राष्ट्रपति का पुलिस ध्वज भारत में पुलिस संगठनों के लिए सर्वोच्च संस्थागत सम्मान का प्रतीक है।
– यह अनुशासन, वीरता, व्यावसायिकता और सार्वजनिक सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान जैसे मापदंडों के आधार पर प्रदान किया जाता है। – यह सम्मान किसी इकाई के वर्षों के अनुकरणीय सेवा रिकॉर्ड का प्रतीक है।
– ओडिशा पुलिस की स्थापना 1936 में हुई थी।
– इसने 2026 में 90 वर्ष पूरे किए।

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8. संयुक्त राष्ट्र द्वारा मार्च 2026 में घोषित ’20 Cities Towards Zero Waste’ सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय शहर कौन-सा है?
Which is the only Indian city included in the ’20 Cities Towards Zero Waste’ list announced by the United Nations in March 2026?

a. इंदौर
b. सूरत
c. वर्कला
d. मैसूर

Answer: c. वर्कला (केरल)

– संयुक्त राष्ट्र (UN) ने दुनिया के उन 20 चुनिंदा शहरों की घोषणा की है, जो कचरा प्रबंधन और ‘Zero Waste’ की दिशा में वैश्विक रोल मॉडल बनकर उभरे हैं।
– इस अंतरराष्ट्रीय सूची में भारत के केरल राज्य के ‘वर्कला’ (Varkala) शहर को शामिल किया गया है।
– यह केरल का तटीय शहर है।
– यह पहल दुनिया भर के उन शहरों को मान्यता देती है जो कचरे को कम करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं।
– क्यों चुना गया वर्कला?: यह शहर कचरे को कम करने, ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (कचरे से संसाधन बनाना) और समावेशी रीसाइक्लिंग मॉडल को लागू करने में अग्रणी रहा है।
– प्रमुख सहयोगी: इस पहल को UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) और UN-Habitat का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
– यह चयन अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस (30 मार्च) को किया गया।

चयनित शहर निम्नलिखित हैं:
– अकरा (घाना), बोलोग्ना (इटली), शेफचौएन (मोरक्को), दार एस सलाम (तंजानिया), देहीवाला सिटी (श्रीलंका), फ्लोरिअनोपोलिस (ब्राजील), गाजियांटेप (तुर्की), जॉर्ज टाउन (मलेशिया), हांग्जो सिटी (चीन), इलोइलो सिटी (फिलीपींस), किसुमु (केन्या), कुआलालंपुर (मलेशिया), लिलोंग्वे (मलावी), सैन फर्नांडो (फिलीपींस), सैन फ्रांसिस्को (संयुक्त राज्य अमेरिका), सान्या शहर (चीन), सूज़ौ शहर (चीन), वर्कला (भारत), योकोहामा शहर (जापान) और जैपोपन (मेक्सिको)।

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9. किसकी अगुआई में होर्मुज जलडमरूमध्य संकट को लेकर वर्चुअल इमरजेंसी मीटिंग हुई, जिसमें भारतीय विदेश सचिव ने हिस्‍सा लिया?
Under whose leadership was a virtual emergency meeting held regarding the Strait of Hormuz crisis, in which the Indian Foreign Secretary participated?

a. फ्रांस
b. ब्रिटेन
c. जर्मनी
d. यूएसए

Answer: b. ब्रिटेन

– स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों पर बढ़ते हमलों और बढ़ते तनाव के बीच, ब्रिटेन ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर वर्चुअल मीटिंग आयोजित की।
– 2 अप्रैल 2026 को आयोजित इस बैठक ने अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को नई दिशा दी है।
– इसमें सैन्‍य अभियान की जगह बातचीत को लेकर फोकस किया गया।
– भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हिस्सा लिया। उन्होंने इस जलमार्ग को लेकर उत्पन्न संकट पर भारत का पक्ष रखा।
– भारत ने संकट से निकलने के लिए तनाव कम करने और कूटनीतिक रास्ता निकालने पर जोर दिया। भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) इस जलमार्ग से जुड़ी है, इसलिए जहाजों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
– इस बैठक की सबसे बड़ी चर्चा का विषय अमेरिका का शामिल न होना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं:

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10. भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित आधिकारिक समय-सीमा क्या थी, जिसके एक दिन पूर्व गृह मंत्री ने देश के ‘नक्सल-मुक्त’ होने की घोषणा की?
What was the declared deadline for ridding India of Naxalism—a deadline one day prior to which Home Minister Amit Shah announced that the country had become free of it?

a. 15 अगस्त 2026
b. 31 मार्च 2026
c. 26 जनवरी 2026
d. 31 दिसंबर 2025

Answer: b. 31 मार्च 2026

– भारत नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है।
– केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च 2026 को लोकसभा में यह ऐतिहासिक ऐलान किया।
– सरकार द्वारा तय 31 मार्च 2026 की समयसीमा से ठीक एक दिन पहले शाह ने सदन में आंकड़ों के साथ दावा किया कि दशकों पुराना लाल आतंक इतिहास बन चुका है।
– उन्होंने सुरक्षा बलों के शौर्य और मोदी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को इस सफलता का श्रेय दिया।
– शाह ने कहा कि रेड कॉरिडोर के नाम से पहचाने जाने वाले क्षेत्र से नक्सलवाद करीब-करीब मिटाया जा चुका है।
– बस्तर भी मुक्त है।
– 2024 से पूर्व बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र की एक-एक तहसील और झारखंड का एक जिला छोड़ शेष राज्य नक्सल मुक्त हो चुका था।
– 2024 से 2026 में अब तक 706 नक्सली मारे गए, 2218 गिरफ्तार हुए, 4839 ने सरेंडर किया।

नक्सलवाद का इतिहास
– नक्सलवाद का इतिहास भारतीय राजनीति और आंतरिक सुरक्षा का एक जटिल अध्याय है। इसकी शुरुआत एक किसान विद्रोह से हुई थी, जो समय के साथ एक बड़े सशस्त्र उग्रवाद में बदल गया।
– नक्सलबाड़ी विद्रोह (1967) – शुरुआत : नक्सलवाद की जड़ें पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गाँव में हैं।
– कारण: स्थानीय जमींदारों द्वारा किसानों का शोषण और भूमि सुधार कानूनों की विफलता।
– घटना: 25 मई 1967 को पुलिस की गोलीबारी में 11 ग्रामीणों (जिनमें महिलाएँ और बच्चे शामिल थे) की मौत हो गई। इसके विरोध में भड़का विद्रोह ही ‘नक्सलवाद’ कहलाया।

वैचारिक आधार
– नक्सलवाद माओत्से तुंग (माओवाद) की विचारधारा से प्रेरित है।
– इनका मानना है कि केवल “सशस्त्र क्रांति” के जरिए ही सत्ता पर कब्जा किया जा सकता है। इनका भारतीय लोकतंत्र पर विश्‍वास नहीं था।
– इनका नारा था— “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है।”


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