यह 27 & 28 मार्च 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।
1. नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में किसने शपथ ली?
Who took the oath as the 47th Prime Minister of Nepal?
a. बालेन शाह
b. सुशीला काकी
c. केपी शाह ओली
d. रवि सुशांत
Answer: a. बालेन शाह
– नेपाल में जेन-Z ने सत्ता परिवर्तन की जो कसम खाई थी वो पूरी हो गई है।
– 35 वर्षीय बालेन शाह 27 मार्च 2026 को नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बने हैं।
– राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें शपथ दिलाई।
– वह देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं।
– वह एक रैपर थे।
– उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र ने 5 मार्च को हुए चुनाव में 275 में से 182 सीटें जीती।
– बालेन शाह ने चार बार के प्रधानमंत्री रहे केपी शर्मा ओली को उनके ही गढ़ झापा-5 में 49,614 वोटों से हराया।
– यह जीत 1991 के बाद से नेपाल के संसदीय इतिहास में सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जा रही है।

बालेन शाह
– बालेन शाह का जन्म 1990 को काठमांडू में बौद्ध मूल के एक मैथिली मधेशी परिवार में हुआ था।
– मधेशी नेपाल के तराई (मैदानी) क्षेत्र में रहने वाले लोगों को कहा जाता है, जिनकी भाषा, संस्कृति और सामाजिक परंपराएँ भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों से काफी मिलती-जुलती हैं।
– स्कूल एजुकेशन के दौरान ही 2010 के दशक की शुरुआत से ही बालेन शाह नेपाल की हिप-हॉप जगत से जुड़े गए।
– वह भारत में विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ले चुके हैं।
– इंजीनियरिंग में उनके एकेडमिक बैकग्राउंड ने उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और पब्लिक वर्क्स की प्रैक्टिकल समझ दी।
– वह काठमांडू महानगरपालिका के महापौर (मेयर) रहे।
भारत के प्रति क्या रुख है बालेन शाह का?
– वैसे तो एमटेक की पढ़ाई उन्होंने भारत में की है।
– वर्ष 2022 में बालेन शाह काठमांडू के मेयर बने थे। इसके बाद से ही भारत विरोधी रुख के लिए चर्चा में रहे हैं।
– उन्होंने अपनी छवि राष्ट्रवादी नेता के तौर पर बनाई है।
– 2022 में मेयर रहते हुए फिल्म ‘आदिपुरुष’ से नाराज होकर काठमांडू में भारतीय फिल्में बैन कर दी थीं।
– उनका आरोप था कि आदिपुरुष में सीता को भारत की बेटी बताया गया है, जो नेपाल का अपमान है।
– हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद बैन हट गया।
– बालेन शाह का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
– उन्होंने सोशल मीडिया पर नेपाल सरकार और कोर्ट का भारत का गुलाम बता दिया।

भारत के साथ चीन के भी विरोधी
– 2023 की बात है, जब भारत की नई संसद में एक भित्तिचित्र चर्चा में आई थी, यह ‘अशोक साम्राज्य’ के विस्तार को दर्शाने के लिए बनाई गई है।
– इसे मीडिया में अखंड भारत का नक्शा के तौर पर पेश किया गया।
– इसके जवाब में बालेन शाह ने अपने ऑफिस में ग्रेटर नेपाल का मैप लगा लिया।
– इसमें भारत की कई जगहों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।
– सबसे ज्यादा विवाद नवंबर 2025 में फेसबुक पर की उनकी पोस्ट के बाद हुआ।
– बालेन शाह ने भारत, चीन समेत कुछ और देशों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट किया। बाद में इसे डिलीट भी कर दिया। हालांकि, तब तक ये पोस्ट वायरल हो चुकी थी।
– बालेन शाह का रुख भले ही भारत विरोधी रहा हो, लेकिन नेपाल के लोग भारत से अच्छे रिश्ते चाहते है।
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ग्रेटर नेपाल क्या है?
– जिस तरह से इंडिया में अखंड भारत की बात होती है। कुछ पॉलिटिकल पार्टी और संगठन के बारे में अक्सर बोलते हैं और यहां के युवा उत्साहित हो जाते हैं।
– उसी तरह से नेपाल में भी ग्रेटर नेपाल की बात वहां के पॉलिटिकल पार्टी करते हैं।
– इसके लिए 1805 का ब्रिटिश मैप दिखया जाता है, जिसमें अंग्रेजों और नेपाल किंगडम के युद्ध से पहले की स्थिति का मैप है।
– वे मानते हैं कि पूरा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश का कुछ हिस्सा, इधर सिक्किम उन्हीं का है, जो भारत के पास है।
– दरअसल, 2020 में केपी शर्मा ओली ने भारत के खिलाफ कदम उठाते हुए नेपाल का नया मैप जारी कर दिया था। उसमें भारतीय हिस्से, कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल में दिखाया गया था।
– ग्रेटर नेपाल की भावना नेपालियों में है इसी वजह से 2020 में नेपाल की संसद में नया मैप पास होने से वहां लोगों ने दीवाली मनाई थी। उन्हें लग रहा है कि जीत का पहला कदम पार कर लिया।
– इस पूरे मामले में चीन की भूमिका बेहद संदिग्ध है।
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2. अमेरिकी नेतृत्व वाले देशों ने प्रशांत महासागर क्षेत्र के किस देश में एम्यूनिशन असेंबली और प्रोडक्शन लाइन के लिए फंडिंग का आकलन करने पर सहमति जताई, जिसपर चीन ने चेतावनी जारी की?
In which Pacific Ocean nation did U.S.-led countries agree to assess funding for an ammunition assembly and production line—a move that prompted China to issue a warning?
a. मलेशिया
b. फिलिपींस
c. जापान
d. इंडोनेशिया
Answer: b. फिलिपींस
– दरअसल, मार्च 2026 में अमेरिकी नेतृत्व वाले एक अंतर-सरकारी रक्षा समूह ने फिलीपींस में अम्यूनिशन असेंबली और प्रोडक्शन लाइन के लिए फंडिंग का आकलन करने पर सहमति जताई।
– यह निर्णय ‘पार्टनरशिप फॉर इंडो-पैसेफिक इंडस्ट्रियल रेजिलिएंस’ के 16 सदस्य देशों द्वारा लिया गया।
– इसमें यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, जापान, साउथ कोरिया और फिलीपींस शामिल हैं।

चीन की चेतावनी
– एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक तनाव के बीच चीन ने अमेरिका (USA) को चेतावनी दी है कि वह क्षेत्र में “संघर्ष और युद्ध की अराजकता” न लाए।
– यह प्रतिक्रिया उस प्रस्ताव के बाद आई है जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगी फिलिपींस में हथियार/गोला-बारूद निर्माण सुविधा स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं।
– चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि इस तरह की सैन्य सुविधा क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है और इसका “उल्टा असर” होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई देश “बारूद का गोदाम” बनने को तैयार होता है, तो उसे इसके परिणाम खुद भुगतने होंगे।
चीन ने क्यों चेतावनी दी
– चीन और फिलीपींस के बीच हाल के वर्षों में साउथ चाइना सी को लेकर लगातार तनाव रहा है।
– चीन इस महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर दावा करता है, जबकि एक अंतरराष्ट्रीय फैसले में इस दावे को कानूनी आधारहीन बताया गया है।
– चीन ने दोहराया कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस घटनाक्रम से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
फिलिपींस
– राजधानी : मनीला
– राष्ट्रपति : बोंगबोंग मार्कोस
– मुद्रा : फिलीपीन पेसो
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3. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट (2024-25) के अनुसार, किस कानून के तहत केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2025 तक 1,11,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक किए?
According to the Ministry of Home Affairs report (2024-25), under which law did the Central Government block 111,185 instances of suspicious online content by March 31, 2025?
a. भारतीय दंड संहिता, 1860
b. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
c. डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
d. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
Answer: b. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 {आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79(3)(b)}
गृह मंत्रालय ने ऑनलाइन कंटेंट हटाने (takedown) के लिए औसतन प्रति दिन ~290 नोटिस जारी किए।
– 13 मार्च 2024 को इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया था।
– गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार 31 मार्च 2025 तक 1,11,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक किए गए।
– यह डेटा Indian Computer Emergency Response Team द्वारा ट्रैक किया जाता है, जो साइबर खतरों से निपटने वाली राष्ट्रीय एजेंसी है।
– इस डेटा की जानकारी केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में संसद को दी।
कानूनी प्रावधान
– सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(1) के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (social media intermediaries), यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं होते।
– धारा 79(3)(b) के तहत यदि सोशल प्लेटफॉर्म सरकार द्वारा चिन्हित कंटेंट नहीं हटाते तो उन्हें सेफ हार्बर (Safe Harbour) सुरक्षा नहीं मिलेगी
– सेफ हार्बर क्या है – इसका मतलब कि ऐसा कानूनी संरक्षण जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यूज़र्स के कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता (कुछ शर्तों के साथ)।
कंटेंट हटाने की समयसीमा
– पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 3 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना अनिवार्य था (न्यायालय या सरकार के आदेश पर)
– मार्च 2026 में नए नियम के तहत अब एक घंटे के भीतर कंटेंट हटाना होगा।
न्यायिक घटनाक्रम
– X ने इस प्रावधान और “सहयोग पोर्टल” को चुनौती दी
– मामला: Karnataka High Court
– 2025 में याचिका खारिज
– तथ्य: I4C द्वारा X को भेजे गए 66 नोटिस में से लगभग 1/3 नोटिस केंद्रीय मंत्रियों/एजेंसियों से जुड़े कंटेंट पर थे
कानून की आलोचना
– हाल के दिनों में भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट हटाने (takedown) और अकाउंट ब्लॉक करने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह मुद्दा विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े पोस्ट और कंटेंट को लेकर चर्चा में है।
– विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ऐसे पोस्ट, जिनमें व्यंग्य, आलोचना या AI-जनित सामग्री शामिल थी, को हटाया गया है या संबंधित अकाउंट्स को सीमित (withhold) किया गया है।
– कुछ मामलों में भ्रामक (misleading) या फर्जी (fake) कंटेंट, खासकर AI से बने वीडियो और तस्वीरों पर कानूनी कार्रवाई भी की गई है।
– सरकार का कहना है कि यह कदम फेक न्यूज, डीपफेक, और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरों को रोकने के लिए जरूरी हैं, खासकर चुनावी और संवेदनशील परिस्थितियों में।
– वहीं, आलोचकों का आरोप है कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ आलोचनात्मक या असहमतिपूर्ण आवाज़ों को दबाने के लिए भी किया जा सकता है। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल स्पेस की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।
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4. यूनाइटेड किंगडम में भारत के नए उच्चायुक्त मार्च 2026 में कौन नियुक्त हुए?
Who was appointed as India’s new High Commissioner to the United Kingdom in March 2026?
a. पेरियासामी कुमारन
b. विक्रम दोरैस्वामी
c. राजेंद्र चोल वर्मा
d. अजय कुमार शंख
Answer: a. पेरियासामी कुमारन
– वह इससे पहले विदेश मंत्रालय में विशेष सचिव (ईआर एवं डीपीए) के रूप में कार्य कर चुके हैं।
– पेरियासामी कुमारन की नियुक्ति से पहले यूनाइटेड किंगडम के उच्चायुक्त विक्रम दोरैस्वामी थे। उन्हें अब चीन का राजदूत नियुक्त किया गया है।
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5. नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन का अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है?
When is the International Day for the Elimination of Racial Discrimination observed?
a. 20 मार्च
b. 21 मार्च
c. 22 मार्च
d. 23 मार्च
Answer: b. 21 मार्च
– इसी दिन वर्ष 1960 में दक्षिण अफ्रीका के शार्पविले में पुलिस द्वारा रंगभेद कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने दौरान हुई 69 लोगों की हत्या हो गई थी।
– उसकी स्मृति में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह दिवस शुरू किया गया था, जो पूरी दुनिया में मनाया जाता है।
– संयुक्त राष्ट्र के महासचिव : एंटोनियो गुटेरेस
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6. उत्तराखंड के बाद आजाद भारत का दूसरा राज्य कौन बना, जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 2026 पास किया?
Which state became the second in independent India, after Uttarakhand, to pass the Uniform Civil Code (UCC) Bill 2026?
a. मध्य प्रदेश
b. राजस्थान
c. उत्तर प्रदेश
d. गुजरात
Answer: d. गुजरात
– उत्तराखंड ने इसी तरह का UCC बिल फरवरी 2024 में पारित किया था।
– इसके बाद गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को बिल पास किया है।
– हालांकि उत्तराखंड गोवा के बाद UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य है।
– लेकिन गोवा में UCC पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था।
– इसलिए उत्तराखंड आजादी के बाद UCC लागू करने वाला पहला और गुजरात दूसरा राज्य होगा।
– यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया था।
UCC क्या है?
– आमतौर पर देश में दो तरह के कानून होते हैं-
– क्रिमिनल कानून और सिविल कानून
क्रिमिनल कानून
– इसमें चोरी, लूट, मार-पीट, हत्या, धोखाधड़ी जैसे आपराधिक मामलों की सुनवाई की जाती है।
– इसमें सभी धर्मों या समुदायों के लिए एक तरह की कोर्ट, प्रोसेस और सजा का प्रावधान होता है।
सिविल कानून
– इसके तहत शादी-ब्याह और संपत्ति से जुड़ा मामला आता है।
– भारत के अलग-अलग धर्मों में शादी, परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में रीति-रिवाज, संस्कृति और परंपराओं का महत्व है।
– इस वजह से इस तरह के कानूनों को पर्सनल लॉ भी कहा जाता है।
– जैसे मुस्लिमों में शादी और संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के जरिए होता है।
– जबकि हिन्दुओं की शादी हिन्दू मैरिज एक्ट के जरिए होती है।
– इसी तरह ईसाई और सिखों के लिए भी अलग पर्सनल लॉ हैं।

UCC से राज्य में क्या बदलेगा-
– पर्सनल लॉ को खत्म करके सभी के लिए एक जैसा कानून बनाए जाने का प्रावधान है।
– यानी गुजरात में रहने वाले हर नागरिक के लिए निजी मामलों में भी एक समान कानून होगा, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो।
– जैसे, पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिम पुरुष 4 शादी कर सकते हैं, लेकिन हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना अपराध है।
– तो एक ही कानून बन जाएगा, जिसे दोनों धर्म के लोगों को मानना पड़ेगा।
गुजरात के UCC में खास बातें
– एकविवाह प्रथा को सख्ती से लागू
– सभी विवाहों के लिए 60 दिनों के भीतर सरकारी पंजीकरण अनिवार्य
– ‘ट्रिपल तलाक’ जैसी गैर-न्यायिक प्रथाओं पर प्रतिबंध
– ‘हलाला’ जैसी सशर्त पुनर्विवाह प्रथाओं को समाप्त
– लिव-इन रिलेशनशिप में आने वाले जोड़ों को 30 दिनों के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास औपचारिक रूप से पंजीकरण। यदि साथी की आयु 21 वर्ष से कम है, तो राज्य द्वारा माता-पिता को सूचित करना अनिवार्य है।
– उत्तराधिकार हस्तांतरण के संबंध में, इस ढांचे में लैंगिक भेदभाव को समाप्त
गुजरात
राजधानी: गांधीनगर
मुख्यमंत्री: भूपेंद्रभाई पटेल
राज्यपाल: आचार्य देवव्रत
आबादी: 7.15 करोड़
भाषा: गुजराती
पड़ोसी राज्य: राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव।
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7. इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) द्वारा जारी नई पात्रता नीति के अनुसार, महिला वर्ग में भाग लेने की अनुमति किसे है?
According to the new eligibility policy issued by the International Olympic Committee (IOC), who is permitted to participate in the women’s category?
a. सभी ट्रांसजेंडर एथलीट
b. केवल जैविक महिलाएँ
c. केवल DSD एथलीट
d. सभी महिला पहचान रखने वाले व्यक्ति
Answer: b. केवल जैविक महिलाएँ
– इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने मार्च 2026 में नई पात्रता नीति लागू की, जिसके अनुसार अब महिला वर्ग (Female category) में केवल बायालॉजिकल महिलाओं को ही भाग लेने की अनुमति होगी।
– अगला ओलंपिक वर्ष 2028 में अमेरिका में लॉस एंजल्स में होगा।
– यह नीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के अनुरूप है। आदेश की वजह से IOC को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ा।
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8. इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) द्वारा महिला एथलीट की पात्रता निर्धारित करने के लिए किस वैज्ञानिक परीक्षण का उपयोग किया जाएगा?
Which scientific test will be used by the International Olympic Committee (IOC) to determine the eligibility of female athletes?
a. DNA फिंगरप्रिंटिंग
b. हार्मोन स्तर परीक्षण
c. SRY जीन स्क्रीनिंग
d. ब्लड ग्रुप एनालेसिस
Answer: c. SRY जीन स्क्रीनिंग
– इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने मार्च 2026 में नई पात्रता नीति लागू की, जिसके अनुसार अब महिला वर्ग (Female category) में केवल बायालॉजिकल महिलाओं को ही भाग लेने की अनुमति होगी।
– इससे पहले IOC, ट्रांसजेंडर महिलाओं को टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होने की शर्त पर खेलने की अनुमति देता था या फैसला व्यक्तिगत खेल संघों पर छोड़ दिया जाता था।
SRY जीन क्या है?
– यह टेस्ट डीएनए का एक हिस्सा जांचता है जो पुरुष विकास से जुड़ा होता है।
– यह टेस्ट जीवन में सिर्फ एक बार करना होगा।
– यह टेस्ट थूक, गाल के स्वैब या ब्लड सैंपल से किया जा सकता है।
– वहीं, जो एथलीट जन्म के समय महिला थे, लेकिन अब खुद को ट्रांसजेंडर पुरुष मानते हैं, वे महिला स्पर्धाओं में खेलना जारी रख सकते हैं।

SRY जीन क्या है?
– SRY (Sex-determining Region Y) जीन, वाई गुणसूत्र (Y क्रोमोसोम) पर पाया जाता है।
– यह जीन पुरुष जैविक विकास (male biological development) को प्रारंभ (ट्रिगर) करता है।
– IOC के अनुसार, इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाएगा कि कोई खिलाड़ी जैविक रूप से महिला है या नहीं।
IOC ने अपनी नीति के समर्थन में तीन प्रमुख आधार दिए:
– Fairness (न्यायसंगत प्रतिस्पर्धा): पुरुषों में टेस्टोरॉन लेवेल अधिक होते हैं, इससे स्ट्रेंथ, स्पीड और सहनशक्ति में प्राकृतिक बढ़त मिलती है
– सुरक्षा (Safety): कुछ खेलों (जैसे मुक्केबाज़ी, कुश्ती) में, शारीरिक अंतर के कारण चोट का जोखिम बढ़ सकता है।
– खेलों की अखंडता (Integrity of Sports): महिला वर्ग की प्रतिस्पर्धा की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना। मतलब कि महिला वर्ग में समान और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना।
वैज्ञानिक तर्क (IOC रिपोर्ट)
– IOC के अनुसार, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के 3 प्रमुख शिखर (peaks) होते हैं: गर्भावस्था के दौरान (गर्भ में), शैशव अवस्था (मिनी-प्यूबर्टी) और किशोरावस्था से वयस्कता तक (यौवनावस्था)
– यह उन्हें स्थायी शारीरिक लाभ (irreversible advantages) देता है।
– इन चरणों के कारण पुरुषों में अधिक मांसपेशीय शक्ति (muscle strength), अधिक गति (speed), अधिक सहनशक्ति (endurance) विकसित होती है।
इस नीति से प्रभाव
– ट्रांसजेंडर महिलाएं अब ओलिंपिक महिला वर्ग से बाहर
– DSD एथलीट (लिंग विकास में अंतर) वाले पर भी इन पर भी प्रतिबंध या अतिरिक्त नियम लागू होंगे।
आलोचना
– मानवाधिकार संबंधी चिंता : ओलंपिक चार्टर कहता है: “खेल एक मानव अधिकार है”, यह नीति ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के अधिकारों का उल्लंघन है।
– वैज्ञानिक जटिलता: जेंडर सिर्फ जैविक नहीं, सामाजिक भी है, SRY जीन पर आधारित ओवरसिम्प्लीफिकेशन हो सकता है।
पेरिस ओलिंपिक में उठे थे सवाल
– पेरिस ओलिंपिक 2024 के दौरान दो महिला बॉक्सरों की भागीदारी को लेकर विवाद सामने आया था।
– 66 किलोग्राम वर्ग में अल्जीरिया की इमान खलीफ और 57 किलोग्राम वर्ग में ताइवान की लिन यू टिंग के खेलने पर अन्य खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई थी।
– ताइवानी बॉक्सर लिन यू-टिंग को 2023 में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (IBA) द्वारा किए गए जेंडर संबंधी जांच में असफल घोषित किया गया था।
– इसके बावजूद IOC ने उन्हें पेरिस ओलिंपिक में महिला 57 किलोग्राम वर्ग में भाग लेने की अनुमति दी, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीता।
– उनकी पात्रता को लेकर कुछ खिलाड़ियों और IBA ने सवाल उठाए थे।
– हालांकि IOC ने इन प्रक्रियाओं को विश्वसनीय नहीं माना।
– इसी तरह, इमान खलीफ को भी 2023 में IBA द्वारा जेंडर संबंधी जांच में अयोग्य घोषित किया गया था।
– IBA ने उन्हें 2023 में दिल्ली में आयोजित महिला विश्व चैंपियनशिप के गोल्ड मेडल मुकाबले में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी थी।
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9. ब्रिक्स CCI WE एनुअल वूमेन समिट 2026′ में ‘वूमेन एम्पावरमेंट ट्रेलब्लेज़र अवार्ड’ से किसे सम्मानित किया गया?
Who was honored with the ‘Women Empowerment Trailblazer Award’ at the ‘BRICS CCI WE Annual Women Summit 2026’?
a. गायत्री देवी
b. दीपिका पांडे सिंह
c. कल्पना सोरेन
d. अरुणा जैमन
Answer: c. कल्पना सोरेन
– कल्पना सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेई की विधायक हैं।
– कार्यक्रम 23-24 मार्च 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित किया गया था।
– यह पुरस्कार महिला सशक्तिकरण, समावेशी विकास और ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी के रूप में प्रोत्साहित करने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।
– उन्होंने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और जमीनी स्तर के उद्यमों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
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10. किस राज्य सरकार ने 9वीं से 12वीं के छात्रों के डिजिटल इस्तेमाल को लेकर ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की, जिसमें शाम के बाद इंटरनेट बंद करने की भी सिफारिश की गई?
Which state government released a draft policy regarding the digital usage of students in grades 9 through 12, which also recommended suspending internet access after the evening?
a. आंध्र प्रदेश
b. कर्नाटक
c. तमिलनाडु
d. केरल
Answer: b. कर्नाटक
– कर्नाटक सरकार ने 24 मार्च 2026 को ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की।
– पॉलिसी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कर्नाटक स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी, निमहांस और शिक्षा विभाग ने मिलकर तैयार की।
– इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि छात्रों को सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रखा जाए।
– मोबाइल के लिए ‘चाइल्ड प्लान’ का सुझाव दिया गया है, जिसमें ऑडियो-ओनली विकल्प और तय समय के बाद इंटरनेट बंद करने की व्यवस्था होगी।
– यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 6 मार्च को जारी बजट में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्ती के ऐलान से अलग है।
ये हैं पॉलिसी की मेन बातें
– स्कूलों में डिजिटल वेल-बीइंग और ऑनलाइन सुरक्षा पढ़ाई का हिस्सा बनेंगी।
– साइबर बुलिंग, प्राइवेसी और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार पढ़ाया जाएगा।
– हर स्कूल डिजिटल उपयोग नीति लागू करेगा।
– डिजिटल डिटॉक्स डे और टेक-फ्री पीरियड होंगे।
– छात्रों से संपर्क के लिए वॉट्सऐप की जगह डायरी अपनाई जाएगी।
– स्कूलों में काउंसलिंग मजबूत होगी।
– शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे डिजिटल लत के संकेत पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर बच्चों को विशेषज्ञों तक पहुंचाया जा सके।
– शिक्षक बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखेंगे और मार्गदर्शन देंगे। – अभिभावक घर में स्क्रीन टाइम तय करेंगे।
– नो-फोन जोन बनाएंगे और खुद उदाहरण पेश करेंगे।
– स्कूल AI के उपयोग पर नियम तय करेंगे।
– होमवर्क में इसके इस्तेमाल को नियंत्रित करेंगे और नकल रोकने के लिए सिस्टम विकसित करेंगे।
– कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान किया था। – कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।
कर्नाटक
राजधानी – बेंगलुरू
सीएम – सिद्धारमैया



