यह 6 & 7 अक्टूबर 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।
1. मेडिसिन / फिजियोलॉजी के क्षेत्र में नोबेल प्राइज 2026 के विजेता का नाम बताएं?
Name the winner of Nobel Prize 2026 in the field of Medicine/Physiology?
a. विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन
b. कैटलिन कारिको और ड्रू वीसमैन
c. कार्ल डीसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागल
d. मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड रामस्डेल और शिमोन
Answer: c. कार्ल डीसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागल
विजेता वैज्ञानिक:
– कार्ल डिसेरोथ – अमेरिका
– पीटर हेगेमैन – जर्मनी
– जॉर्ज नागेल – जर्मनी
नोट –
Physiology: शरीर क्रिया विज्ञान
Medicine: चिकित्सा
नोबेल प्राइज इन 6 क्षेत्रों में दिया जाता है –
– शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा / Physiology or Medicine
– भौतिकी / Physics
– रसायन शास्त्र / Chemistry
– साहित्य / Literature
– शांति / Peace
– अर्थशास्त्र / Economics
नोबेल प्राइज के बारे में
– यह पुरस्कार वैज्ञानिक और इन्वेंटर अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल के नाम पर उनकी वसीयत के आधार पर दिया जाता है।
– उन्होंने वसीयत में यह निर्देश दिया कि उनकी विशाल संपत्ति का अधिकांश हिस्सा उन लोगों को पुरस्कार देने के लिए इस्तेमाल किया जाए जिन्होंने पिछले वर्ष के दौरान मानवता को सबसे अधिक लाभ पहुंचाया हो।
– 1901 में पहली बार नोबेल पुरस्कार दिए गए।
– अल्फ्रेड नोबेल के नाम आज 355 पेटेंट हैं, लेकिन लोग उन्हें डाइनामाइट की वजह से ज्यादा जानते हैं।
– शांति का नोबेल प्राइज नार्वे में प्रदान किया जाता है।
– जबकि बाकी सभी कैटेगरी के प्राइज, स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दिए जाते हैं।
अल्फ़्रेड बर्नहार्ड नोबेल के बारे में
– जन्म: 21 अक्टूबर 1833 को स्टॉकहोम, स्वीडन में
– परिवार: उनके पिता इमैनुएल नोबेल एक कुशल इंजीनियर और आविष्कारक थे, जो विस्फोटक और पुल बनाने के काम से जुड़े थे।
– 19वीं सदी के मध्य में ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ (Nitroglycerin) नामक विस्फोटक का इस्तेमाल होता था, जो बेहद खतरनाक था और ज़रा से झटके से ही फट जाता था।
– एक प्रयोग के दौरान हुए धमाके में अल्फ़्रेड के छोटे भाई एमिल की मृत्यु भी हो गई थी।
– इसके बाद अल्फ़्रेड ने इसे सुरक्षित बनाने पर शोध किया और 1867 में ‘डायनामाइट’ का आविष्कार किया। उन्होंने नाइट्रोग्लिसरीन को एक विशेष मिट्टी (Kieselguhr) के साथ मिलाकर एक सुरक्षित रूप दिया, जिसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता था।
– इसके अलावा उन्होंने 350 से अधिक पेटेंट अपने नाम किए, जिनमें सिंथेटिक रबर, कृत्रिम रेशम और कई अन्य प्रकार के विस्फोटक शामिल थे।
– डायनामाइट के आविष्कार से अल्फ़्रेड नोबेल ने दुनिया भर में खनन, सुरंग निर्माण और सड़कों के निर्माण में क्रांति ला दी, जिससे वे बहुत अमीर बन गए। लेकिन डायनामाइट का इस्तेमाल युद्धों में हथियारों के रूप में भी होने लगा।
– एक अखबार की गलती ने बदला जीवन: 1888 में अल्फ़्रेड के भाई लुडविग की मृत्यु हो गई, लेकिन एक फ्रांसीसी अखबार ने गलती से अल्फ़्रेड की मौत की खबर छाप दी। अखबार का शीर्षक था: “मौत के सौदागर की मौत” (The Merchant of Death is Dead)। इसमें लिखा था कि अल्फ़्रेड नोबेल ने लोगों को मारने के नए-नए तरीके खोजकर संपत्ति कमाई।
– दिल पर गहरा असर: जब अल्फ़्रेड ने खुद के बारे में यह पढ़ा, तो उन्हें गहरा सदमा लगा। वे नहीं चाहते थे कि इतिहास उन्हें एक ‘विनाशक’ के रूप में याद रखे।
– अपनी छवि और धन के सही उपयोग के लिए, अल्फ़्रेड नोबेल ने 27 नवंबर 1895 को अपनी अंतिम वसीयत (Will) पर हस्ताक्षर किए।
– उन्होंने अपनी विशाल संपत्ति का लगभग 94% हिस्सा एक फंड में रख दिया।
– आदेश दिया कि इस फंड के ब्याज से हर साल उन लोगों को सम्मानित किया जाए जिन्होंने भौतिकी (Physics), रसायन (Chemistry), चिकित्सा (Medicine), साहित्य (Literature) और शांति (Peace) के क्षेत्र में मानव जाति के लिए सर्वश्रेष्ठ काम किया हो।
– बाद में 1968 में इसमें अर्थशास्त्र (Economics) का नोबेल पुरस्कार भी जोड़ दिया गया।
– निधन: 10 दिसंबर 1896 को सैन रेमो (इटली) में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ।
भारतीय विजेता
– नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीयों में रवींद्रनाथ टैगोर (पहले भारतीय), सी.वी. रमन, मदर टेरेसा, अमर्त्य सेन और कैलाश सत्यार्थी शामिल हैं।
पिछले कुछ अवॉर्ड
– 2024 के विजेता फिजियोलॉजी/चिकित्सा : मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड रामस्डेल और शिमोन साकागुची, परिधीय प्रतिरक्षा सहिष्णुता (सहनशीलता) से संबंधित उनकी खोजों के लिए
– 2024 के विजेता फिजियोलॉजी/चिकित्सा : विक्टर एम्ब्रोस (अमेरिका) और गैरी रुवकुन (अमेरिका), माइक्रोआरएनए की खोज
– 2023 के विजेता (मेडिसिन / फिजियोलॉजी) – कैटलिन कारिको और ड्रू वीसमैन को मिला था। उन्होंने mRNA टीके के विकास को सक्षम बनाया। इसकी वजह से कोविड-19 का टीका तुरंत बन सका।
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2. मेडिसिन / फिजियोलॉजी के क्षेत्र में किस उपलब्धि (रिसर्च) के लिए कार्ल डीसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागल को नोबेल प्राइज 2026 के लिए चुना गया?
For which achievement (research) in the field of medicine were Karl Deisseroth, Peter Hegemann, and Georg Nagel selected for the 2026 Nobel Prize?
a. डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज के लिए
b. एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन तकनीक के विकास के लिए
c. ऑप्टोजेनेटिक्स (प्रकाश द्वारा तंत्रिका कोशिकाओं के नियंत्रण) की खोज के लिए
d. हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C) वायरस की खोज के लिए
Answer: c. ऑप्टोजेनेटिक्स (प्रकाश द्वारा तंत्रिका कोशिकाओं के नियंत्रण) की खोज के लिए
मुख्य रिसर्च का समय
– शुरुआती शोध: 2002 – 2003
– मुख्य सफलता और तकनीक का नामकरण: 2005 – 2006
– नोबेल पुरस्कार: 2026 (लगभग 20 साल के लगातार सफल परीक्षणों और मेडिकल उपयोगों के बाद)
तीनों ने क्या किया?
– आसान भाषा में कहें तो – इन तीनों वैज्ञाकनकों ने मिलकर एक ऐसी तकनीक खोजी है, जिससे रोशनी (Light) की मदद से दिमाग के न्यूरॉन्स को कंट्रोल (चालू/बंद) किया जा सकता है।
– इस तकनीक को ऑप्टोजेनेटिक्स (Optogenetics) कहा जाता है। इसने तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) के क्षेत्र में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, यादों, भावनाओं और विभिन्न बीमारियों के अध्ययन को एक नया आयाम दिया है।
ऑप्टोजेनेटिक्स क्या है और कैसे काम करती है?
– दिमाग का नेटवर्क: हमारा दिमाग अरबों छोटी कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) से बना है। ये कोशिकाएं बिजली के छोटे-छोटे सिग्नलों के ज़रिए आपस में बात करती हैं, जिससे हम सोचते हैं, महसूस करते हैं, चलते हैं या यादें बनाते हैं।
– रोशनी से स्विच ऑन/ऑफ: वैज्ञानिकों ने एक खास शैवाल (Algae/पानी की काई) में प्रकाश-संवेदनशील (Light-sensitive) प्रोटीन पाया। इस प्रोटीन को जब दिमाग की कोशिकाओं में डाला जाता है, तो यह रिमोट या स्विच की तरह काम करता है।
– जब इस पर विशेष रोशनी डाली जाती है, तो कोशिका ‘चालू’ (Active) हो जाती है, और रोशनी हटाते ही ‘बंद’ हो जाती है।
इससे विज्ञान और इलाज में क्या फायदा होगा?
– मस्तिष्क को समझना: पहले वैज्ञानिक यह नहीं समझ पाते थे कि दिमाग का कौन सा हिस्सा किस भावना या व्यवहार (जैसे डर, दर्द, भूख, प्यास, ध्यान) के लिए जिम्मेदार है। अब रोशनी से किसी एक हिस्से को ऑन/ऑफ करके उसकी सही भूमिका का पता लगाया जा सकता है।
– अंधेपन का इलाज (Vision Restoration): जिन लोगों की आंखों की कोशिकाएं रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा जैसी बीमारी से नष्ट हो गई हैं, उन्हें विशेष चश्मों और रोशनी की मदद से दोबारा देखने योग्य बनाने का ट्रायल (परीक्षण) चल रहा है।
– सुनने की क्षमता (Cochlear Implants): कानों के कॉक्लियर इम्प्लांट में बिजली के सिग्नल्स के स्थान पर रोशनी का उपयोग करके और साफ़ आवाज सुनाने की कोशिश की जा रही है।
चिकित्सा विज्ञान पर असर (हम आज इसका उपयोग कैसे कर रहे हैं?)
– मस्तिष्क की बीमारियों को समझना: पहले अल्जाइमर, पार्किंसंस, डिप्रेशन, मिर्गी, और सिज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारियों में यह पता लगाना मुश्किल था कि दिमाग के कौन से न्यूरॉन्स सही काम नहीं कर रहे हैं। ऑप्टोजेनेटिक्स से वैज्ञानिक अब एक-एक कोशिका को ऑन/ऑफ करके देख रहे हैं कि बीमारी की असली जड़ कहाँ है।
– यादों, डर और न्यूरोलॉजी का सटीक नक्शा बनाना: वैज्ञानिकों ने यह समझ लिया है कि डर या पुरानी दर्दनाक यादें दिमाग के किस हिस्से में बनती हैं। ऑप्टोजेनेटिक्स के जरिए इन यादों से जुड़े न्यूरॉन्स को पहचानना आसान हो गया है।
– दवाइयों की खोज में तेज़ी : नई दवाओं का परीक्षण करने के लिए अब वैज्ञानिकों को पूरे दिमाग पर असर देखने की ज़रूरत नहीं होती। वे केवल प्रभावित न्यूरॉन्स पर दवा डालकर ऑप्टोजेनेटिक्स के ज़रिए सटीक असर देख सकते हैं।
शैवाल के प्रोटीन को कैसे दिमाग के न्यूरॉन्स तक पहुंचाया
– शैवाल (Algae) के प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन को दिमाग की न्यूरॉन्स में पहुँचाने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग और मॉडिफाइड वायरस की मदद ली जाती है।
– वैज्ञानिकों ने शैवाल के डीएनए (DNA) में से वह खास हिस्सा निकाला जो रोशनी से चलने वाला ‘स्विच’ (प्रोटीन) बनाता है। यह हमारी ‘चिट्ठी’ है।
– अब इस ‘चिट्ठी’ को सीधे दिमाग में नहीं भेजा जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक ‘एडिनो-एसोसिएटेड वायरस’ (AAV) जैसे एक बहुत ही सुरक्षित और निष्क्रिय वायरस का इस्तेमाल करते हैं।
– वायरस के अंदर की बीमारी फैलाने वाली चीज़ें निकाल दी जाती हैं।
– फिर उस वायरस के अंदर शैवाल वाला जीन रख दिया जाता है। यहाँ वायरस केवल एक ‘डाकिए’ का काम करता है, जो सामान पहुँचाने आता है।
– एक बहुत ही बारीक सुई (Micro-injection) के ज़रिए इस वायरस (डाकिए) को दिमाग के उसी हिस्से में डाला जाता है जहाँ की कोशिकाओं (Neurons) को कंट्रोल करना होता है।
– जब यह वायरस दिमाग की कोशिका के अंदर पहुँच जाता है, तो कोशिका उस शैवाल वाले कोड को पढ़कर खुद अपने ऊपर वह ‘लाइट वाला स्विच’ (प्रोटीन) बना लेती है।
यह काम कैसे करता है?
– दिमाग के अंदर रोशनी नहीं पहुँच सकती, इसलिए वैज्ञानिक बहुत ही पतली और मुड़ने वाली ऑप्टिक फ़ाइबर केबल (काँच या प्लास्टिक का एक बहुत बारीक धागा) को दिमाग के उस खास हिस्से तक बैठा देते हैं, जहाँ शैवाल का प्रोटीन डाला गया है।
– जब वैज्ञानिक इस फ़ाइबर केबल के ज़रिए नीले रंग की रोशनी (Blue Light) डालते हैं, तो कोशिकाओं पर लगा प्रोटीन तुरंत खुल जाता है।
– प्रोटीन खुलते ही कोशिका के अंदर इलेक्ट्रिक सिग्नल दौड़ने लगता है और वह कोशिका चालू (ON / Active) हो जाती है।
– जैसे ही वैज्ञानिक रोशनी को बंद कर देते हैं, प्रोटीन तुरंत बंद हो जाता है और न्यूरॉन्स वापस शांत यानी ‘ऑफ’ (OFF / Inactive) हो जाती है।
– कुछ मामलों में, कोशिकाओं को बंद करने के लिए पीले या लाल रंग की रोशनी का इस्तेमाल भी किया जाता है)
रियल एग्जांपल
– चूहे का चलना-फिरना: वैज्ञानिक जब चूहे के दिमाग के उस हिस्से पर नीली रोशनी डालते हैं जो चलने-फिरने को कंट्रोल करता है, तो चूहा तुरंत गोल-गोल घूमना या दौड़ना शुरू कर देता है। जैसे ही रोशनी बंद की जाती है, चूहा तुरंत रुक जाता है।
– सोना और जागना: जब सोने-जागने वाली कोशिकाओं पर रोशनी डाली जाती है, तो सोता हुआ चूहा तुरंत जाग जाता है।
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3. भौतिकी (Physics) के क्षेत्र में नोबेल प्राइज 2026 के विजेता का नाम बताएं?
Name the winner of the 2026 Nobel Prize in Physics.
a. विक्टर एम्ब्रोस
b. जॉन क्लार्क
c. कैटलिन कारिको
d. फ्रांसिस हाल्ज़ेन
Answer: d. फ्रांसिस हैल्जन (अमेरिका और बेल्जियम की दोहरी नागरिकता)
– फ्रांसिस हैल्जन अमेरिका और बेल्जियम की दोहरी नागरिकता रखते हैं।
– उनका जन्म बेल्जियम में हुआ था और बाद में उन्होंने अमेरिकी नागरिकता भी प्राप्त कर ली।
पिछले विजेता
– फिजिक्स नोबेल के वर्ष 2025 : जॉन क्लार्क (यूनाइटेड किंगडम), मिशेल एच. डेवोरेट (फ़्रांस), जॉन एम. मार्टिनिस (अमेरिका) को इलेक्ट्रिक सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटाइजेशन की खोज के लिए नोबेल प्राइज दिया गया था।
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4. फिजिक्स के क्षेत्र में किस उपलब्धि (रिसर्च) के लिए फ्रांसिस हैल्जन को नोबेल प्राइज 2026 के लिए चुना गया?
For which achievement (research) in the field of physics was Francis Halzen selected for the 2026 Nobel Prize?
a. आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में योगदान और उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज
b. ब्लैक होल के गठन का सैद्धांतिक अनुमान
c. क्वांटम एंटैंगलमेंट और फोटोन प्रयोग
d. इनमें से कोई नहीं
Answer: a. आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में योगदान और उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज
– फ्रांसिस हैल्जन को अंटार्कटिका में बर्फ के भीतर निर्मित IceCube Neutrino Observatory के निर्माण में उनके नेतृत्व और ब्रह्मांडीय उत्पत्ति वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (High-Energy Neutrinos) की खोज के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।
– IceCube अंटार्कटिका की बर्फ में बना एक विशाल “न्यूट्रिनो कैमरा” है, जिसने हमें ब्रह्मांड के दूर-दराज के ब्लैक होल और अन्य अत्यधिक शक्तिशाली स्रोतों को एक बिल्कुल नए तरीके से देखने का रास्ता दिया है।
प्राइज मनी: उन्हें 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग $1.2 मिलियन) की राशि मिलेगी।
अंतरिक्ष को देखने के लिए कितने तरह के वेधशाला होते हैं?
– सामान्य टेलिस्कोप : प्रकाश देखकर ब्रह्मांड समझता है
– रेडियो टेलिस्कोप : रेडियो तरंगों से ब्रह्मांड समझता है
– ग्रैविटेशनल-वेव डिटेक्टर : गुरुत्वीय तरंगों से घटनाएँ समझता है
– आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: न्यूट्रिनो के जरिए ब्रह्मांड को देखता है।
नोट –
वेधाशाला से वैज्ञानिक ब्लैक होल के आसपास की चरम परिस्थितियाँ, सक्रिय आकाशगंगाएँ, सुपरनोवा जैसी घटनाएँ और कॉस्मिक रे (cosmic rays) कहाँ तथा कैसे पैदा होते हैं, इन सवालों की जाँच कर सकते हैं।
– एक और महत्वपूर्ण फायदा है : न्यूट्रिनो वहाँ से भी बाहर निकल सकता है जहाँ से प्रकाश आसानी से बाहर नहीं आ पाता। इसलिए धूल, गैस या अत्यधिक घने पदार्थ के पीछे होने वाली कुछ घटनाओं की जानकारी भी न्यूट्रिनो दे सकते हैं।
आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी
– यह अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर बर्फ के अंदर बनाया गया दुनिया के सबसे बड़े न्यूट्रिनो डिटेक्टरों में से एक है।
– इसका उद्देश्य अंतरिक्ष से आने वाले अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो का पता लगाकर यह समझना है कि ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली स्रोतों में ऊर्जा कैसे पैदा होती है।
– IceCube का डिटेक्टर लगभग 1 घन किलोमीटर बर्फ के क्षेत्र में फैला है। इसके लगभग 5,160 Optical Modules बर्फ के अंदर लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर लगाए गए हैं। ये सेंसर 86 लंबी स्ट्रिंग्स पर लगाए गए हैं।
सेंसर बर्फ में लगाए कैसे गए?
– पहले विशेष मशीनों से बहुत गर्म पानी की तेज धार छोड़कर बर्फ में लगभग 2.5 किलोमीटर गहरा और करीब 60 सेंटीमीटर चौड़ा छेद बनाया गया।
– इसके बाद ऑप्टिकल मॉड्यूल्स से लगी पूरी स्ट्रिंग को उस छेद में नीचे उतार दिया गया। फिर पानी दोबारा जम गया और सेंसर हमेशा के लिए बर्फ के अंदर स्थापित हो गए।
आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी कैसे काम करता है?
– न्यूट्रिनो ऐसे बेहद छोटे और लगभग बिना विद्युत आवेश वाले कण हैं जो पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। इसलिए वे पृथ्वी और बर्फ के आर-पार आसानी से निकल सकते हैं।
– कभी-कभी कोई न्यूट्रिनो बर्फ में किसी परमाणु से टकराता है। इससे म्यूऑन (Muon) या इलेक्ट्रॉन (Electron) जैसे आवेशित कण पैदा हो सकते हैं।
– ये बर्फ में बहुत तेज गति से चलते हुए चेरेनकोव प्रकाश (Cherenkov Light) नाम की बेहद हल्की चमक पैदा करते हैं।
– IceCube के Optical Modules इस प्रकाश को पकड़ लेते हैं।
– प्रकाश के समय और दिशा का विश्लेषण करके वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि न्यूट्रिनो किस दिशा से आया और उसकी ऊर्जा कितनी थी।
इसका खर्च किसने उठाया?
– IceCube मुख्य रूप से अमेरिका के नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) की फंडिंग से बनाया गया, लेकिन यह एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, जिसमें कई देशों के वैज्ञानिक और संस्थान जुड़े हैं।
इससे क्या बड़ी जानकारी मिली?
– 2013 में IceCube ने पहली बार स्पष्ट रूप से ब्रह्मांड के बाहर से आने वाले अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो का पता लगाया। इससे यह साबित हुआ कि अंतरिक्ष में अत्यंत शक्तिशाली स्रोत ऐसे कण पैदा कर रहे हैं।
– 2017 में एक लगभग 300 TeV ऊर्जा वाला न्यूट्रिनो पकड़ा गया। उसकी दिशा का पता लगाने पर वह TXS 0506+056 नामक Blazar की दिशा से आया पाया गया। यह लगभग 3.7 अरब प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक सक्रिय आकाशगंगा है, जिसके केंद्र में विशाल सुपरमैसिव ब्लैक होल है। इससे ऐसे शक्तिशाली ब्लैक-होल स्रोतों और उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो के बीच महत्वपूर्ण संबंध स्थापित हुआ।
– 2023 में IceCube ने Milky Way Galaxy का न्यूट्रिनो मानचित्र भी बनाया। यानी अब वैज्ञानिक हमारी आकाशगंगा को प्रकाश के अलावा न्यूट्रिनो के माध्यम से भी देख सकते हैं।
– इसके अलावा IceCube ने 6.3 PeV ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो से संबंधित Glashow Resonance का अवलोकन किया, जिससे लगभग 60 वर्ष पुरानी एक सैद्धांतिक भविष्यवाणी की पुष्टि हुई।
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5. विश्व शिक्षक दिवस कब मनाया जाता है?
When is World Teachers Day celebrated?
a. 6 अक्टूबर
b. 7 अक्टूबर
c. 5 अक्टूबर
d. 4 अक्टूबर
Answer: c. 5 अक्टूबर
वर्ष 2026 थीम:
– शिक्षकों के साथ खड़े रहना: पेशे की रक्षा, इसकी स्थिति को आगे बढ़ाने और हमारे भविष्य को आकार देने के 60 वर्ष
– Standing with teachers: 60 years of protecting the profession, advancing its status and shaping our futures.
यह थीम क्यों?
– इस थीम का मुख्य उद्देश्य न केवल शिक्षकों को मान्यता देना है, बल्कि यह भी जांचना है कि क्या शिक्षा प्रणाली उन्हें अपना काम करने के लिए आवश्यक व्यावसायिक और भौतिक सहायता प्रदान कर रही है।
दिवस के बारे में
– यह दिवस यूनेस्को और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के द्वारा घोषित है।
– विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। लेकिन देश स्तर पर अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता है।
– जैसे, भारत में 5 सितंबर को मनाया जाता है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर।
– सिंगापुर में सितंबर के पहले शुक्रवार को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
– चीन में 10 सितंबर को यह दिवस मनाया जाता है।
2030 तक दुनिया में 4.4 करोड़ शिक्षकों की आवश्यकता
– यूनेस्को का अनुमान है कि सार्वभौमिक बुनियादी शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2030 तक दुनिया को 44 मिलियन (4.4 करोड़) और प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की आवश्यकता होगी।
– इनमें से लगभग 15 मिलियन (1.5 करोड़) शिक्षकों की आवश्यकता उप-सहारा अफ्रीका में है।
– दक्षिण एशिया में, जहां भारत स्थित है, यूनेस्को के विश्लेषण के अनुसार शिक्षकों की कमी 78 लाख है।
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6. किस देश के प्रसिद्ध लेखक और राजनीतिज्ञ जेफरी आर्चर का निधन 5 अक्टूबर 2026 को हो गया?
The famous writer and politician Jeffrey Archer, from which country, passed away on October 5, 2026?
a. भारत
b. ऑस्ट्रेलिया
c. यूनाइटेड किंगडम
d. सऊदी अरब
Answer: c. यूनाइटेड किंगडम
– वह बेस्टसेलर उपन्यासों की श्रृंखला के लेखक, कंजर्वेटिव सांसद के रूप में कार्य करने वाले राजनीतिज्ञ थे।
– हालांकि एक झूठी गवाही के दोषी भी ठहराए गए थे।
– उनके उपन्यास की 30 करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
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7. किन देशों ने हूती विद्रोही के हमले के खिलाफ ‘मक्का रक्षा गठबंधन’ के तहत अपनी सेना सऊदी अरब में तैनात करने का फैसला किया?
Which countries decided to deploy their troops to Saudi Arabia under the ‘Mecca Defense Coalition’ against attacks by Houthi rebels?
a. पाकिस्तान और तुर्किये
b. चीन और तुर्की
c. यूएसए और भारत
d. तुकिये और मिस्र
Answer: a. पाकिस्तान और तुर्किये
– पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 5 अक्टूबर, 2026 को अपनी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को तुरंत लागू करने और सऊदी अरब में सहमत सैन्य बलों और क्षमताओं की “तेजी से तैनाती” सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।
– यह बात तीनों देशों ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में यह बात कही।
– दरअसल, यमन के हुती विद्राहियों से लड़ रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने 1 अक्टूबर, 2026 को कहा था कि ईरान समर्थित समूह ने सऊदी शहर मदीना में एक बिजली वितरण स्टेशन पर हमला किया था, जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक, पैगंबर की मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है।
मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट
– पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए डिफेंस पैक्ट साइन किया था।
– इसे ‘मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट’ कहा जा रहा है।
– इसे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का में साइन किया।
– तीनों देश आपस में रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे।
– पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने इस समझौते के साथ ‘मुस्लिम नाटो’ की दिशा में बढ़ा कदम उठाया है।
– यह समझौता NATO की तरह मुस्लिम देशों के बीच साथ मिलकर सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश है।
– तीनों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सैन्य मदद करेंगे।
ये हैं पैक्ट के नियम
– किसी एक पर हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
– किसी बाहरी हमले की स्थिति में तीनों देश सुरक्षा के लिए साथ खड़े रहेंगे।
– सैन्य तालमेल और रक्षा सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
– तीनों देशों की सीमा मिलकर जवाब देने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम करेगी।
– आतंकवाद और दूसरे सुरक्षा खतरों से निपटने में सहयोग करेंगे।
क्यों नए संयुक्त रक्षा समझौते
– नए सैन्य गठजोड़ की जरूरत ऐसे समय में और बढ़ी है, जब अमेरिका की सुरक्षा नीति को लेकर दूसरे देशों में सवाल उठ रहे हैं।
– सऊदी अरब और कुछ हद तक तुर्किये लंबे समय से अमेरिका को अपना अहम सुरक्षा सहयोगी मानते रहे हैं।
– लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कई देश दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।
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8. बिहार के मुख्य सूचना आयुक्त, अक्टूबर 2026 में कौन बनें?
Who will become the Chief Information Commissioner of Bihar in October 2026?
a. आलोक कुमार
b. विनय कुमार
c. राकेश पासवान
d. अजय निषाद
Answer: b. विनय कुमार (पूर्व डीजीपी)
– राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने एक अक्टूबर 2026 को पूर्व डीजीपी विनय कुमार को बिहार के मुख्य सूचना आयुक्त पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
– विनय कुमार 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी थे।
– कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्होंने वीआरएस ले लिया था।
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005
– सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 भारत में सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया एक ऐतिहासिक कानून है।
– इसके तहत कोई भी भारतीय नागरिक सरकारी विभागों से सवाल पूछ सकता है और दस्तावेज या जानकारी प्राप्त कर सकता है।
– आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर जन सूचना अधिकारी (PIO) को जवाब देना अनिवार्य होता है।
प्रमुख हालिया बदलाव (संशोधन)
RTI संशोधन अधिनियम, 2019
– कार्यकाल व सेवा शर्तें: मूल कानून में केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों का कार्यकाल 5 वर्ष (या 65 वर्ष की आयु तक) निश्चित था। 2019 के संशोधन के बाद इनका कार्यकाल तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास आ गया।
– वेतन और भत्ते: पहले मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन चुनाव आयुक्त के समान तय था। अब सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के तहत बदलाव
– धारा 8(1)(j) में संशोधन: पहले RTI के तहत किसी व्यक्तिगत जानकारी को केवल तब रोका जा सकता था जब उसका कोई सार्वजनिक हित न हो। DPDP कानून के लागू होने के बाद अब सभी प्रकार की “व्यक्तिगत जानकारी” को प्रकटीकरण से पूरी तरह छूट दे दी गई है।
– गोपनीयता को प्राथमिकता: इस बदलाव से व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा तो बढ़ी है, लेकिन आलोचकों के अनुसार जनहित से जुड़ी कई अहम जानकारियाँ भी “निजी डेटा” बताकर खारिज की जा सकती हैं।
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9. बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026 के तहत वर्ष 2047 तक अपारंपरिक ऊर्जा का उत्पादन कितना फीसदी तक करने का लक्ष्य है?
Under the Bihar Green Hydrogen Policy 2026, what is the target percentage for the production of non-conventional energy by the year 2047?
a. 25%
b. 40%
c. 50%
d. 75%
Answer: c. 50%
– बिहार मंत्रिमंडल ने 29 सितंबर 2026 को बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी।
– इसका मकसद पवन और सौर ऊर्जा के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करना है।
– बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026 के तहत वर्ष 2047 तक अपारंपरिक ऊर्जा का उत्पादन 50 फीसदी तक करने का लक्ष्य है।
– केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक कुल ऊर्जा खपत में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
– इसी दिशा में बिहार में भी स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए हरित हाइड्रोजन क्षेत्र को विकसित किया जाएगा।
– हरित हाइड्रोजन के उपयोग और इससे जुड़ी परियोजनाओं के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन में करीब 10 लाख टन घटाने का लक्ष्य है।
– हरित हाइड्रोजन से संबंधित गतिविधियों के लिए बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (ब्रेडा) को नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
– इस नीति के तहत हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग को प्रोत्साहित करने को आवश्यक ढांचा विकसित करने तथा निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।
ग्रीन हाइड्रोजन क्या होता है
– ग्रीन हाइड्रोजन वह स्वच्छ हाइड्रोजन गैस है जिसका उत्पादन अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलीसिस (Electrolysis) द्वारा किया जाता है।
– इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के कार्बन उत्सर्जन या प्रदूषण का उत्पादन नहीं होता।
यह कैसे बनती है? (उत्पादन प्रक्रिया)
– नवीकरणीय ऊर्जा: सौर ऊर्जा (Solar) या पवन ऊर्जा (Wind Energy) से बिजली बनाई जाती है।
– इलेक्ट्रोलीसिस (Electrolysis): इस पर्यावरण-अनुकूल बिजली को इलेक्ट्रोलाइज़र (Electrolyzer) नामक मशीन के माध्यम से पानी में प्रवाहित किया जाता है।
– विभाजन: यह प्रक्रिया पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग कर देती है।
– उपोत्पाद: इसमें उपोत्पाद (By-product) के रूप में केवल ऑक्सीजन और जलवाष्प निकलते हैं, जो वातावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं।
हाइड्रोजन के विभिन्न प्रकार
– ग्रीन हाइड्रोजन : पानी का इलेक्ट्रोलीसिस (सौर/पवन ऊर्जा द्वारा) : शून्य (Zero Emission)
– ग्रे हाइड्रोजन : प्राकृतिक गैस (Methane) से : अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन
– ब्लू हाइड्रोजन (Blue) : प्राकृतिक गैस से (कार्बन कैप्चर तकनीक के साथ) : कम कार्बन उत्सर्जन
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10. सबसे कम पारी में वनडे में 15 हजार रन पूरे करने वाले खिलाड़ी का नाम बताएं?
Name the player who completed 15,000 runs in ODIs in the fewest number of innings.
a. रोहित शर्मा
b. विराट कोहली
c. हार्दिक पंड्या
d. भुवनेशन कुमार
Answer: b. विराट कोहली
– क्रिकेटर विराट कोहली ने सितंबर 2026 में वनडे इंटनेशनल में 303 पारियों में अपने 15 हजार रन पूरे कर लिए।
– उन्होंने तिरुवनंतपुरम में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच खेलते हुए यह मुकाम हासिल किया।
– वह सबसे कम पारियों में इस मुकाम तक पहुंचने वाले खिलाड़ी बन गए।
– उन्होंने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा। सचिन ने 2007 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 377 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी।
– हालांकि सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर से पीछे हैं।
– सचिन के पास 463 मैचों में 18,426 रन का रिकॉर्ड है।



