27th August 2021 Current Affairs, 27 August 2021 Current Affairs, Current Affairs 27th August 2021, 27 Aug 2021 Current Affairs, 27 Aug Current Affairs 2021,

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1. काबुल एयरपोर्ट पर बम धमाके में 12 अमेरिकी कमांडो सहित कई लोग मारे गए, इस हमले का जिम्‍मेदार किसे बताया जा रहा है?

a. तालिबान
b. इस्‍लामिक स्‍टेट खुरासान
c. अल कायदा
d. चीन

Answer: b. इस्‍लामिक स्‍टेट खुरासान

– अफगानिस्‍तान पर तालिबान के कब्‍जे के बाद से वहां के हालात बेहद खराब है।
– काबुल एयरपोर्ट अमेरिकी फौज के नियंत्रण में है और नाटो फौज वहां तैनात है।

– बम विस्‍फोट का फिदायीन हमला 26 अगस्‍त 2021 को हुआ।
– भारत ने इस हमले की निंदा की है।
– अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने इन हमलों के लिए इस्‍लामिक स्‍टेट (ISIS) समूह के अफगान सहयोगियों को जिम्‍मेदार ठहराया है।
– इसमें 12 अमेरिकी कमांडो और 60 अन्‍य लोग मारे गए। 200 से ज्‍यादा लोग घायल हुए हैं और मृतकों की संख्‍या बढ़ सकती है।
– खास बात है कि US प्रेसिडेंट ने कहा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि तालिबान के साथ IS की मिलीभगत है।
– मतलब कि अमेरिका मानता है कि काबुल एयरपोर्ट में जो हमले हुए, उसमें तालिबान का कोई हाथ नहीं है।
– आगे के हमले रोकने के लिए अमेरिकी सैन्‍य कमांडर तालिबान कमांडरों के साथ काम कर रहे हैं।
– मतलब साफ है कि अमेरिका एक तरह से तालिबान शासन को अघोषित रूप में मान्‍यता दे चुका है।
– ऐसे में इस्‍लामिक स्‍टेट खुरासान बहुत बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। यह कहां से आया इसके बारे में आगे बताते हैं।

कहां हुआ हमला
– काबुल एयरपोर्ट के ईस्‍ट गेट पर आत्‍मघाती बम विस्‍फोट हुआ।
– दूसरा विस्‍फोट एयरपोर्ट के अब्‍बे गेट के पास बैरन होटल के पास हुआ।

एयरपोर्ट से लगा नाला लाशों और घायलों से पटा
– सैंकड़ों लोग लोग एयरपोर्ट के अंदर जाने के लिए काबुल एयरपोर्ट ईस्‍ट गेट के से लगे नाले में खड़े थे।
– मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि बम विस्‍फोट के बाद नाले में लाशों और घायलों का ढेर लग गया।
– यहां पानी में शव पड़े हुए थे। लोग अपनों को ढूंढ़ रहे थे।

हमले की आशंका थी
– हमले के एक दिन पहले ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने काबुल एयरपोर्ट पर आतंकी हमले का बड़ा खतरा बताते हुए अपने नागरिकों से कहा था कि फिलहाल काबुल एयरपोर्ट पर नहीं जाएं और जो लोग एयरपोर्ट के बाहर मौजूद हैं वहां से तुरंत हट जाएं।
– काबुल स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि जो अमेरिकी काबुल एयरपोर्ट के अब्बे गेट, ईस्ट गेट या नॉर्थ गेट पर मौजूद हैं, वे फौरन वहां से हट जाएं और अगले निर्देश का इंतजार करें।
– ब्रिटेन ने आशंका जताई थी कि ISIS काबुल एयरपोर्ट पर हमला कर सकता है।

अमेरिका ने कहा, बदला लेंगे
– बम विस्‍फोट में जिम्‍मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और बदला लिया जाएगा।
– यूएस प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने कहा है कि अफगानिस्‍तान से जल्‍द से जल्‍द अमेरिकी लोगों को निकालने का काम होगा।
– अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का कहना है कि अभी भी डेढ हजार से ज्‍यादा अमेरिकी लोग अफगानिस्‍तान में हैं और वह निकलना चाह रहे हैं।

– अमेरिकी प्रेसिडेंट के रुख से यही लग रहा है कि 20 साल तक अफगानिस्‍तान को अपने इशारों पर चलाने वाला अमेरिका, आईएसआईएस के घातक हमलों के बावजूद वह काबुल से पीछे हट रहा है।

कहां से आया इस्‍लामिक स्‍टेट खुरासान
– दरअसल, इस्‍लामिक स्‍टेट (ISIS), इराक से भगा दिया गया, सीरिया में भी उसकी नहीं चली। लेकिन उसकी विचारधारा चलती रही।
– इस्‍लामिक स्‍टेट ने दुनिया को अलग-अलग हिस्‍से को अपना नाम दिया है।
– इसमें मध्‍य एशिया के कई देशों को मिलकर खुरासान नाम दिया है।
– द हिन्‍दू की रिपोर्ट के अनुसार शुरू में पाकिस्‍तान तालिबान के सैंकड़ों लड़ाकों को पाकिस्‍तान में ट्रेनिंग मिली। बाद में पाकिस्‍तान में जब मिलिटरी अभियान चला, तो वे अफगानिस्‍तान चले गए।

– दूसरी ओर, तालिबान और अमेरिका के बीच दोहा (कतर) में कई महीने पहले वार्ता शुरू हुई, तब इससे नाराज होकर बहुत सारे कट्टर लड़ाके तालिबान के छोड़कर इस्‍लामिक स्‍टेट की ओर चले गए।
– क्‍योंकि तालिबान ने सिर्फ अफगानिस्‍तान में खुद को सीमित कर लिया।
– जबकि इस्‍लामिक स्‍टेट के उग्र विचारों वाले मानते थे कि वह अमेरिका से लड़ाई करके जगह हासिल करेंगे, वार्ता करके नहीं।
– यही तालिबान से अलग हुए उग्र लड़ाकों इस्‍लामिक स्‍टेट खुरासान के आतंकवादी बन गए।
– मतलब आतंक का बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

UN सेक्रेटरी जनरल ने सुरक्षा परिषद की स्‍थाई बैठक बुलाई
– एंटोनियो गुटेरिस ने सभी परमानेंट मेंबर – अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन को लेटर लिखकर मीटिंग बुलाई है।
– इसमें 10 नॉन परमानेंट मेंबर शामिल नहीं होंगे।
– जबकि भारत अगस्‍त महीने के लिए UNSC का अध्‍यक्ष है और भारत की अध्‍यक्षता में 16 अगस्‍त को आखिरी बार तालिबान के मुद्दे पर मीटिंग हुई थी।

तालिबान पर भारत का रुख
– भारत सरकार ने अफगानिस्‍तान के मुद्दे पर 26 अगस्‍त 2021 को ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई।
– इसमें विदेश मंत्री ने कहा कि वह अभी वेट एंड वॉच के मोड में है, लेकिन मुख्य फोकस लोगों को वहां से निकालने पर है।
– सरकार की ओर से बताया गया है कि अफगानिस्तान में भारत सरकार की हेल्प डेस्क पर करीब 15 हज़ार लोगों ने संपर्क किया।
– पूरी दुनिया अभी भी तालिबान को लेकर वेट एंड वॉच की पॉलिसी अपना रही है, भारत भी अभी इस मोड में है।

भारत पर भी आतंकी हमले की आशंका
– खूफिया एजेंसियों के मुताबिक यह हमला आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद कर सकता है।
– द हिन्‍दू न्‍यूजपेपर की रिपोर्ट के अनुसार तालिबान ने अफगानिस्‍तान के जेलों में बंद जैश-ए-मोहम्‍मद के लगभग 100 सदस्‍यों को रिहा कर दिया है।
– अब ये सब इंडिया में अटैक करने की प्‍लानिंग कर रहे हैं, खासतौर पर जम्‍मू कश्‍मीर में।

तालिबान ने 140 हिन्‍दू और सिख अफगान को काबुल में रोक लिया
– ये सभी इंडिया जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन एयरपोर्ट के बाहर ही तालिबान ने उन्‍हें रोक लिया।

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2. भारत ने मालाबार नौसैन्‍य अभ्‍यास (26 से 29 अगस्‍त 2021 तक) किन देशों के साथ किया?

a. यूएसए, चीन और जापान
b. जापान, यूएसए और यूके
c. वियतनाम और जापान
d. यूएसए, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया

Answer: d. यूएसए, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया

– वर्ष 2021 में मालाबार नेवल एक्‍सरसाइज का 25वां संस्‍करण है।
– इसकी मेजबानी अमेरिकी नौसेना (USN) ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में की। इसे गुआम में आयोजित किया जा रहा है।
– गुआम वेस्‍टर्न पैसेफिक ओसेन में एक अमेरिकी आईलैंड टेरेटरी है।
– गुआम, माइक्रोनेशिया क्षेत्र का एक हिस्‍सा है।

किन भारतीय जहाजों और विमान ने हिस्‍सा लिया
– INS शिवालिक और INS कदमत के साथ-साथ पी8आई गश्ती विमान।

क्‍या है मालाबार नेवल एक्‍सरसाइज?
– मालाबार नौसैनिक युद्धाभ्‍यास सबसे पहले 1992 में भारत और अमेरिका के बीच शुरू हुआ था।
– वर्ष 2015 में इसमें जापान को शामिल किया गया।
– इसके बाद वर्ष 2020 में इस नेवल एक्‍सरसाइज में ऑस्‍ट्रेलिया को भी शामिल कर दिया गया है।
– इस तरह से क्‍वाड ग्रुप के सभी देश मालाबार नेवल एक्‍सरसाइज करेंगे।
– वर्ष 2020 में पहली बार QUAD के सभी सदस्य एक साथ सैन्य अभ्यास में शामिल हुए। वर्ष 2021 में दूसरी बार।
– चारों देशों का साझा उद्देश्य मुक्त और स्वतंत्र हिंद प्रशांत क्षेत्र (इंडो-पैसेफिक रीजन) है।

क्वाड क्या है?
– क्‍वाड : Quadrilateral Security Dialogue (क्‍वाड्रिलेटरल सिक्‍योरिटी डायलॉग)
– जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत और अमेरिका के बीच एक बहुपक्षीय समूह का नाम है क्वाड।

युद्धाभ्‍यास में क्‍या हो रहा है-
– मालाबार-21 में लाइव वेपन फायरिंग ड्रिल होंगे।
– इसके तहत सतह रोधी (anti-surface), वायु रोधी (anti-air) और पनडुब्बी रोधी (anti-submarine) युद्ध अभ्यास और अन्य सैन्य व्यूह अभ्यास तथा सामरिक अभ्यास (tactical exercises) सहित कई जटिल अभ्यास किये जायेंगे।

– जापान के नेवल सिक्‍योरिटी फोर्स का नाम : जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल (Japan Maritime Self-Defense Force)
– ऑस्‍ट्रेलिया की नेवी का नाम : रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नेवी
– यूएसए की नेवी का नाम : यूएस नेवी

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3. नौसैन्‍य अभ्‍यास ‘जायर-अल-बहर’ भारत और किस देश के बीच 9 से 14 अगस्‍त 2021 को आयोजित हुआ?

a. फ्रांस
b. यूएई
c. कतर
d. ईरान

Answer: c. कतर

– नेवल एक्‍सरसाइज फारस की खड़ी (पर्सियन गल्‍फ) में आयोजित हुई।
– वर्ष 2021 में ‘जायर-अल-बहर’ (Zair-Al-Bahar) का दूसरा संस्‍करण आयोजित हुआ। पहला संस्‍करण वष 2019 में हुआ था।
– इसमें समुद्री डकैती रोधी अभ्यास, एयर डिफेंस, समुद्री निगरानी, बोर्डिंग संचालन और एसएआर (SAR) अभ्यास शामिल हैं।

कौन से जहाज ने हिस्‍सा लिया
– इसमें इंडियन नेवी के स्टील्थ फ्रिगेट INS त्रिकंद ने हिस्‍सा लिया।
– जबकि कतर की (Qatar Emiri Naval Force – QENF) की ओर से बारजान (Barzan) और दमसाह (Damsah) श्रेणी की मिसाइल शिप, एमआरटीपी 34 वर्ग के फास्ट-अटैक शिल्प और राफेल लड़ाकू विमानों ने भाग लिया।

क्‍या होता है स्‍टेल्‍थ तकनीक
– INS त्रिकंद स्‍टील्‍थ फ्रिगेट है।
– स्‍टेल्‍थ, रडार से बचने की तकनीक को कहते हैं।
– दरअसल, रडार, रेडियो वेव छोड़ते हैं, जैसे ही कोई ऑब्‍जेक्‍ट टकराता है, तो वापस रेडियो वेव लौटकर रडार को बता देता है।
– लेकिन ऐसा डिजाइन जिससे रेडियोवेव टकराकर, रडार के पास न जाकर दूसरी तरफ चली जाए, इसे स्‍टेल्‍थ कहेंगे।
– फ्रिग्रेट का मतलब युद्धक हमलों से बचाने वाला जहाज।

कतर
– राजधानी: दोहा (Doha);
– मुद्रा: कतरी रियाल (Qatari riyal)
– प्रधान मंत्री: शेख खालिद बिन खलीफा बिन अब्दुलअज़ीज़ अल थानी (Sheikh Khalid bin Khalifa bin Abdelaziz Al Thani)

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4. किस मंत्रालय ने ‘सुजलम’ अभियान शुरू किया, जिसके तहत गांवों में 100 दिनों में दस लाख सोख गड्ढों (Soak pits) का निर्माण का लक्ष्‍य है?

a. जल शक्ति मंत्रालय
b. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
c. ग्रामीण विकास मंत्रालय
d. कपड़ा मंत्रालय

Answer: a. जल शक्ति मंत्रालय

– जल शक्ति मंत्रालय (Water resources ministry) ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह के अंतर्गत 25 जुलाई 2021 को ‘सुजलम’ अभियान की शुरुआत की।

उद्देश्‍य –
– दस लाख सोख गड्ढों (Soak pits) का निर्माण 100 दिनों में करना।
– ग्रामीण टॉइलट की मरम्‍मत और नए हाउसहोलड को टॉइलट उपलबध करवाना है।
– ताकि खुले में शौच मुक्‍त (ODF) प्‍लस गांवों की संख्‍या बढ़े।

– जल शक्ति मंत्रालय के मंत्री – गजेंद्र सिंह शेखावत

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5. दुनिया का सबसे ऊंचा ऑब्जर्वेशन व्हील (observation wheel) किस शहर में स्‍थापित किया गया है?

a. दिल्‍ली
b. पेरिस
c. लंदन
d. दुबई

Answer: d. दुबई (UAE)

– इस ऑब्‍जर्वेशनल व्‍हील को ‘ऐन दुबई (Ain Dubai)’ कहा जाएगा।
– इसकी ऊंचाई 250 मीटर है।
– यह दुबई के ब्लूवाटर्स (Bluewaters) द्वीप पर स्थित है।
– ‘ऐन दुबई’ ने अमेरिका के लास वेगास शहर में स्थित ऑब्‍जर्वेशनल व्‍हील का रिकॉर्ड तोड़ा है, जो 167.6 मीटर ऊंचा है।

‘ऐन दुबई’
250 मीटर ऊंचा
1750 पिपुल कैपेसिटी
48 हाई-टेक केबिन
192 केबिन

UAE
– राजधानी: अबू धाबी;
– मुद्रा: संयुक्त अरब अमीरात दिरहम (dirham);
– राष्ट्रपति: खलीफा बिन ज़ायेद अल नहयान (Khalifa bin Zayed Al Nahyan)

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6. भारत की पहली ‘ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्‍ट्रोलाइजर गीगाफैक्‍ट्री’ किस जगह स्‍थापित हुई?

a. मुंबई
b. सोनीपत
c. लखनऊ
d. बेंगलुरु

Answer: d. बेंगलुरु

किस कंपनी ने गीगाफैक्‍ट्री स्‍थापित की
– इसकी स्‍थापना अमेरिका स्थित ओहमियम इंटरनेशनल (Ohmium International) ने की।
– गीगाफैक्‍ट्री को अगस्‍त 2021 में शुरू किया गया।
– यह भारत की पहली ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर (green hydrogen electrolyzer) निर्माण इकाई है।

कितनी क्षमता?
– इस फैक्‍ट्री में हर साल 500 मेगावाट प्रारंभिक विनिर्माण क्षमता होगाी।
– बाद में इसे दो गीगावॉट (2000 मेगावाट) तक बढ़ाने की योजना है।

हाइड्रोजन का उपयोग
– हाइड्रोजन फ्यूल सेल (कार)
– स्‍पेस रॉकेट फ्यूल
– वेल्‍डिंग
– पेट्रोलियम रिफाइनरी
– फर्टिलाइजर प्रोडकशन

सरकार का ‘नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन’ (NHEM)
– वित्‍त बजट 2021-22 में निर्मला सीतारमण ने और फिर बाद में स्‍वतंत्रता दिवस (15 अगस्‍त 2021) पर भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का नया वैश्विक केंद्र बनाने और इसका सबसे बड़ा निर्यातक बनने के लिए इस मिशन का ऐलान किया था।
– इसके तहत देश को हाइड्रोजन इकोनॉमी में तब्‍दील करने की योजना है।
– जीवाश्‍म ईंधन के विकल्‍प के तौर पर इस्‍तेमाल होगा।
– खासतौर पर परिवहन में इसका इस्‍तेमाल करने की बड़ी योजना है।
– भारत ने पेरिस जलवायु समझौता किया था। इसके तहत 2050 तक भारत को कार्बन उत्‍सर्जन को कम करना का लक्ष्‍य है।
– 2022 तक 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा प्राप्‍त करना है।
– हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन के लिए 1500 करोड़ का आवंटन किया गया।

गीगाफैक्‍ट्री का मतलब
– सबसे पहले इस शब्‍द का इस्‍तेमाल टेस्‍ला और स्‍पेस एक्‍स के सीईओ एलन मस्‍क ने वर्ष 2013 में किया था।
– गीगाफैक्‍ट्री का मतलब बैटरी मैनिफैक्‍चरिंग प्रॉसेस के लिए बहुत बड़े पैमाने पर गीगावॉट एनर्जी पैदा करना।

कैसे ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ का उत्‍पादन होगा?
– ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्‍ट्रोलाइजर, Renewable energy (अक्षय ऊर्जा) से चलेगा। मतलब विंड एनर्जी या सोलर एनर्जी।
– यह पानी (H2O) से हाइड्रोजन (H2) और ऑक्‍सीजन को अलग करेगा।
– हाइड्रोजन (H2) को टैंक में स्‍टोर किया जाएगा।

हाइड्रोजन क्‍या है
– एक तत्‍व है, जो आवर्त सारणी में पहले और सबसे हल्‍का तत्‍व (Element) है।
– यह गैरविषैला, गंधहीन, स्‍वादहीन, रंगहीन और अत्‍यंत दहनशील है।
– यह द्विपरमाण्विक (H2) संरचना है
– हाइड्रोजन के दो एटम का युग्‍म (pair) करेंगे, तभी हम इसे हाइड्रोजन के एलिमेंट के रूप में मानेंगे।

हाइड्रोजन के प्रकार
– ग्रे हाइड्रोजन
– ब्‍लू हाइड्रोजन
– ग्रीन हाइड्रोजन

ग्रे हाइड्रोजन
– भारत में सबसे ज्‍यादा उत्‍पादन इसी का होता है।
– इसका उत्‍पादन हाइड्रोकार्बन जैसे, फॉसिल फ्यूल (जीवाश्‍म ईंधन) और नेचुरल गैस से किया जाता है।
– फॉसिल फ्यूल की वजह से इससे कार्बन डाई ऑक्‍साइड का उत्‍सर्जन होता है।

ब्‍लू हाइड्रोजन
– यह भी फॉसिल फ्यूल से उत्‍पादन होता है।
– लेकिन अंतर यह है कि इससे निकलने वाले बाइप्रोडक्‍ट का भंडारण होगा।
– ऐसे में यह पर्यावरण के लिए ज्‍यादा बेहतर होगा।

ग्रीन हाइड्रोजन
– यह ग्रीन एनर्जी से प्राप्‍त किया जाता है, जैसे – सोलर एनर्जी या विंड एनर्जी।
– इलेक्ट्रिसिटी के जरिए हाइड्रोजन को पानी से अलग कर लिया जाएगा।
– इससे बाकियों की तुलना में यह हाइड्रोजन किफायती और पर्यावरण फ्रेंडली होगा।
– खास बात है कि इसके जरिए बाइप्रोडक्‍ट के तौर पर केवल पानी और भाप निकलता है।

हाइड्रोजन ही क्‍यों?
– ब्राह्मांड में प्रचूर मात्रा में उपलब्‍ध है।
– पेट्रोल से दो से तीन गुना ज्‍यादा बेहतर ऊर्जा मिलती है।
– जीवाश्‍म ईंधन की जगह लेगा।
– भारत की अर्थव्‍यवस्‍था जीवाश्‍म ईंधन के बहुत ज्‍यादा आयात पर निर्भर है।
– जब हाइड्रोजन का इस्‍तेमाल करेंगे, तो अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ाएगा।
– उपयोग परिवहन, लोहा और इस्‍पात और रसायनिक क्षेत्र में।

कितने तरह के इलेक्‍ट्रिक वाहन
– हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (HEV) – ऊर्जा ईंधन कुशल और कम उत्‍सर्जन। अन्‍य ईंधन का भी उपयोग और बैटरी का भी।
– प्‍लग-इन हाइब्रिड वाहन (PHEVs) – इलेक्ट्रिक भी और पेट्रोल भी
– बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहन (BEVs) – ई रिक्‍शा या इलेक्ट्रिक कार
– फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEVs) – हाइड्रोजन + ऑक्‍सीजन (पूरी तरह से इलेक्ट्रिक) और रिफ्यूल। इसे रिचार्ज नहीं किया जा सकता है। हाइड्रोजन को पहले टैंक में रखा जाएगा। इसके बाद इससे इलेक्ट्रिक तैयार होगा और वाहन चलेगा।

हाइड्रोजन ईंधन वाहन की खसियत
– रेंज : 550 किलोमीटर प्रति चार्ज
– लगभग शून्‍य कार्बन उत्‍सर्जन
– भारी लिथियम आयन बैटरियों से हल्‍का
– 5 मिनट में रीफ्यूल हो सकता है।
– 2020 में लगभग 25 हजार वाहन ही सड़कों पर
– वैश्विक स्‍तर पर 500 हाइड्रोजन फिलिंग स्‍टेशन
– हाइड्रोजन टैंक का यात्रियों के नजदीक होना

हाइड्रोजन ईंधन वाहन की के चैलेंजेज
– इसके वाहन बहुत महंगे हैं।
– आने वाले समय में तकनीक अच्‍छी होने से कीमत कम हो सकती है
– अत्‍यंत ज्‍वलनशील है।
– उत्‍पादन, ट्रांसपोर्टेशन और स्‍टोरेज की चुनौती
– अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर इसके वाहन का बाजार बहुत ज्‍यादा नहीं है।
– यहां तक कि भारत की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी ‘हुंडई’ ने हाइड्रोजन कार बनाने का फैसला किया था। लेकिन कुछ महीने बाद ही उसने इस आयडिया को ड्रॉप कर दिया।
– वजह बताई गई कि हाइड्रोजन की उपलब्‍धता का अभाव।

इलेक्ट्रिक वाहन-
– 8 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर
– हाइड्रोजन वाहनों की तुलना में अधिक सुरक्षित
– चार्जिंग में अधिक समय
– कम शक्तिशाली

हाइड्रोजन ईंधन के लाभ
– स्‍वच्‍छ ईंधन है – कार्बन मोनोऑक्‍साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुल मैटर का उत्‍सर्जन नहीं
– अपशिष्‍ट के रूप में जल का उत्‍सर्जन
– अंतरिक्ष वाहनों में उपयोग संभव
– बड़े और मालवाहक वाहनों में उपयोग हो सकता है

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7. केंद्र सरकार ने समृद्ध (SAMRIDH) स्‍कीम अगस्‍त 2021 में लांच की, इसका लाभ किसे दिया जाना है?

a. किसान
b. स्‍टार्टअप
c. वैज्ञानिक
d. रेलवे

Answer: b. स्‍टार्टअप

– इसकी शुरुआत रेलवे, आईटी और टेलीकम्‍यूनिकेशन मिनिस्‍टर अश्विनी वैष्‍णव ने 25 अगस्‍त 2021 को की।
– SAMRIDH : स्टार्ट-अप एक्सेलेरेटर्स ऑफ MeitY फॉर प्रोडक्ट इनोवेशन, डेवलपमेंट एंड ग्रोथ.

– meity : Ministry of Electronics and Information Technology

स्‍कीम के तहत क्‍या होगा?
– इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है।
– इसके तहत IT सेक्टर के 300 स्‍टार्टअप का चयन किया जाएगा, जिनमें भविष्‍य की संभावनाएं होंगी।
– मेइटी, चुनी गई स्टार्ट-अप कंपनियों को 40 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी तथा छह माह तक मेंटॉरशिप उपलब्ध कराएगा।
– वह स्टार्टअप्स को सीड कैपिटल, यानी शुरुआती पूंजी, मेंटॉरशिप, यानी मार्गदर्शन देने के साथ ही बाजार तक पहुंच हासिल करने में मदद भी करेगी।
– इस कार्यक्रम को देश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाला प्रोग्राम ‘मैती स्टार्टअप हब’ लागू कर रहा है।
– इस स्‍कीम को अमेरिका के सिलिकन वैली के एक्सेलेटर वाईकॉम्बिनेटर की तर्ज पर विकसित किया गया है।

स्‍कीम के तहत लक्ष्‍य
– इसके तहत सरकार का लक्ष्‍य 100 नए यूनिकॉर्न तैयार करना है।
– यूनिकॉर्न से मतलब ऐसे स्‍टार्टअप से है, जिसका बाजार मूल्‍यांकन एक अरब डॉलर (एक बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया हो।
– अमेरिकी और चीन के बाद भारत यूनिकॉर्न के मामले में तीसरे पायदान पर है।
– रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अगस्त 2021 के अपने बुलेटिन में कहा था कि भारत में इस समय करीब 100 यूनिकॉर्न हैं।

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8. भारत की चौथी कंपनी का नाम बताएं, जिसने बाजार पूंजीकरण (Market capitalization) 100 बिलियन डॉलर की रकम को पार कर लिया?

a. रिलायंस इंडस्‍ट्रीज
b. टीसीएस
c. एचडीएफसी
d. इंफोसिस

Answer: d. इंफोसिस

– इन्‍फोसिस यह उपलब्धि हासिल करने वाली चौथी भारतीय कंपनी है।
– इस क्‍लब में पहले से रिलायंस इंडस्‍ट्रीज (140 बिलियन डॉलर एम-कैप), टाटा कंसल्‍टेंसी सर्विसेज (115 बिलियन डॉलर एम-कैप) और एचडीएफसी बैंक (100.1 बिलियन डॉलर एम-कैप) थी।
– इन्‍फोसिस भारत में तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में से एक है।
– यह बिजनेस आईटी, बिजनेस कंसल्‍टेशन, और आउटसोर्सिंग सर्विसेज उपलब्‍ध करवाती है।

इन्‍फोसिस
– स्‍थापना : 7 जुलाई 1981
– सीईओ : सलिल पारेख
– मुख्‍यालय : बेंगलुरु (कर्नाटक)

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9. वैश्विक विनिर्माण जोखिम सूचकांक 2021 (Global Manufacturing Risk Index) में भारत का स्‍थान बताएं?

a. पहला
b. दूसरा
c. तीसरा
d. चौथा

Answer: b. दूसरा

– यह सूचकांक अमेरिका स्थित संपत्ति सलाहकार कुशमैन एंड वेकफील्ड (Cushman & Wakefield) द्वारा जारी किया जाता है।

– ग्‍लोबल मैन्‍युफैक्‍चरिंग रिस्‍क इंडेक्‍स 2021 में पहले स्‍थान पर चीन है।
– भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्‍थान प्राप्‍त किया है।
– कामकाज के माहौल और लागत प्रतिस्पर्धी होने के कारण भारत ने यह मुकाम हासिल किया है।
– अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मुकाबले मैन्युफैक्चरर्स भारत में रुचि दिखा रहे हैं।
– पिछली रिपोर्ट यानी वर्ष 2020 में अमेरिका, दूसरे और भारत, तीसरे स्‍थान था।

इंडेक्स में 47 देश होते हैं शामिल
– यह इंडेक्स यूरोप, अमेरिका और एशिया-प्रशांत (एपीएसी) के 47 देशों में से वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग के लिए आकर्षक जगहों का आकलन करता है।

रैंकिंग
1. चीन
2. भारत
3. अमेरिका
4. कनाडा
5. चेक गणराज्‍य
6. इंडोनेशिया
7. लिथुआनिया
8. थाइलैंड
9. मलेशिया
10. पोलैंड

रिपोर्ट में रैंकिंग का निर्धारण चार प्रमुख मापदंडों के आधार पर किया जाता है:
– मैन्‍युफैक्‍चरिंग (विनिर्माण) को पुनः शुरू करने के मामले में देश की क्षमता,
– कारोबारी माहौल (प्रतिभा/श्रम की उपलब्धता, बाज़ारों तक पहुँच),
– संचालन लागत,
– जोखिम (राजनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय)।

भारत में मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में सुधार के पहल:
– राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)
– मेक इन इंडिया
– स्किल इंडिया
– सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिये ऋण गारंटी योजना
– इनोवेशन, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता (entrepreneurship) को बढ़ावा देने के लिए योजना (ASPIRE)
– प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
– औद्योगिक गलियारे

———————-
10. काजिंद-21 संयुक्‍त सैन्‍य प्रशिक्षण अभ्‍यास का 5वां संस्‍करण भारत और किस देश के साथ 30 अगस्‍त से 11 सितंबर तक आयोजित होगा?

a. रूस
b. चीन
c. ताजिकिस्‍तान
d. कजाकिस्‍तान

Answer: d. कजाकिस्‍तान

– इसका आयोजन कजाकिस्तान (Kazakhstan) में होगा।
– यह अभ्यास भारत और कजाकिस्तान के Armed Forces के लिए संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत पहाड़ी, ग्रामीण परिदृश्यों में काउंटर इंसर्जेंसी / काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित करने का एक मंच भी है।

कजाकिस्‍तान
– इसकी सीमा रूस, उज्‍बेकिस्‍तान, किर्गिस्‍तान और चीन से सटी हुई है।
– पीएम: अस्कर मामिन (Askar Mamin),
– राजधानी: नूर-सुल्तान (Nur-Sultan),
– मुद्रा: कजाकिस्तानी तेंगे (Kazakhstani Tenge)।


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