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यह 22st June 2020 का करेंट अफेयर्स है, जो आपके कांपटीटिव एग्‍जाम्‍स में मदद करेगा। इसका PDF Download Link इस पेज के लास्‍ट में मौजूद है। Current Affairs PDF आप इस पेज के आखिरी हिस्‍से से Free में डाउनलोड करें।

1. कोरोना वायरस की पहली दवा, जिसे ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने मैनिफैक्‍चरिंग और मार्केटिंग की अनुमति दी?

a. Favipiravir
b. Remdesivir
c. Umifebovir
d. a और b

Answer a. Favipiravir

– फेविपिराविर, दवा का जेनरिक नाम है। जबकि मार्केट में यह दवा फैबीफ्लू नाम से मिलेगी।
– हालांकि इस एप्रूवल के अगले ही दिन एक और दवा के भी मैनिफैक्‍चरिंग और मार्केटिंग की पर्मिशन ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने दे दी।

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2. कोरोना वायरस के इलाज के लिए किन दवाओं के उत्‍पादन और मार्केटिंग की अनुमति ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने दी?

a. Favipiravir और Umifebovir
b. Favipiravir और Remdesivir
c. Umifebovir और ACQH
d. इनमें से कोई नहीं

Answer b. Favipiravir और Remdesivir
(फेविपिराविर और रेमडिसिविर)

– तो पहली दवा है – फेविपिराविर और दूसरी है रेमडिसिविर.
– यह दवा कोविफोर (Covifor) नाम से मार्केट में मिलेगी।

– अब तक कोविड-19 के इलाज के लिए इंडिया में ICMR की ओर से मलेरिया में काम आने वाली दवा हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्विन को रेकोमेंड किया जाता रहा है।
– लेकिन इसे ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया की ओर से इसे कोविड-19 के इलाज के लिए नहीं बताया गया।

– अब फैवीपिराविर पहली दवा बन चुकी है, जिसे कमर्शियल मार्केटिंग के लिए उपलब्‍ध रहेगा। दूसरी दवा है रेमेडिसिविर।


किस कंपनी को फेविपिराविर दवा के निर्माण और बेचने की अनुमति
– ग्‍लेनमार्क फार्मास्‍वीटिकल ने 19 जून को यह जानकारी दी कि वह भारत में पहली फार्मा कंपनी बन चुकी है, जिसे रेग्‍यूलेटरी एप्रूवल (ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से) मिल चुका है, फेविपिराविर के मैनिफैक्चिरिंग और मार्केटिंग के लिए।

कीमत
– 200mg के एक टैबलेट की कीमत 103 रुपया है।
– 34 टैबलेट की एक स्ट्रिप है, उसकी कीमत 3500 रुपया है।
– अगले सप्‍ताह से यह दवा मिलना शुरू हो जाएगी।


कब डेवलप हुई दवा?
– इस दवा को जापान में 2014 में डेवलप किया गया था।
– वहां इसे एबीगन नाम से मार्केट में बेचा जाता है।

2014 में ही कैसे विकसित हो गई?
– किसी भी दवा की खोज में कई सालों का रिसर्च का वक्‍त लगता है।
– बहुत सी प्रक्रियाओं से इसे गुजरना होता है।
– ऐसे में जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैला हुआ है, तो लोगों की जान बचाने के लिए तुरंत दवा चहिए।
– ऐसे में जब कोई नई बीमारी आती है, नई दवा के खोज के साथ-साथ पुरानी दवाओं का ट्रायल किया जाता है कि कितनी असरकारक है।
– तो दुनियाभर में दवाओं के ट्रायल का सिलसिला चल रहा है।
– लंबी लिस्‍ट है ऐसी दवाओं की।
– इनमें फैविपिराविर और रेमेडिसिविर कोरोना पेशेंट के इलाज में कारगर पाई गई है।
– रेमेडिसिविर दवा इंजेक्‍शन के तौर पर ली जाती है, जबकि फेविपिराविर टैबीलेट के फॉर्म में है।
– तो इस दवा को लेना आसान है, मरीज के लिए।

क्‍या सभी प्रकार के कोविड-19 पेशेंट में कारगर है?
– नहीं।
– केवल माइल्‍ड टू मॉडरेट – अगर हल्‍के लक्षण हैं तो ही यह कारगर है।
– जिनमें सीवियर लक्षण पाए जाते हैं और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है, उनमें यह दवा कामयाब नही है।

कैसे मिलेगी दवा?
– यह डॉक्‍टर के पर्चे पर ही मिलेगी।
– आपको सेल्‍फ प्रेस्‍क्राइब नहीं करना है।
– इस दवा को तभी खाना है, जब डॉक्‍टर प्रेस्‍क्राइब करे।
– एक और बात कि डॉक्‍टर भी पेशेंट की कंसेंट के बिना दवा नहीं दे सकते।
– यानी डॉक्‍टर को भी अगर दवा देना होगा, मरीज को, तो लिखित में लेना होगा कि मैं तुम्‍हें फैवीपिराविर दे रहा हूं।
– अगर पेशेंट कहता है हां, तभी यह दी जाएगी।
– ग्‍लैनमार्क कंपनी का कहना है कि अगर कोविड-19 मरीज को डायबिटीज और हार्ट डिजीज है, तो उन केस में भी दी जा सकती है।
– दवा चार दिन में असर दिखाना शुरू करती है।

क्‍या नुकसान है फेविपिराविर दवा का?
– हा, इस दवा का नुकसान भी है। जापान और अन्‍य देशों में कड़ी निगरानी में दवा दी जाती  है।
– यह teratogen (टैरेटोजेन) का काम करती है।
– यह मां से बच्‍चे के शरीर में जा सकती है, फीटस के माध्‍यम से।
– इसकी वजह से बर्थ डिफेक्‍ट देखने को मिले हैं।
– जब बच्‍चा मां के गर्भ में होता है, तो इसे फीटस कहते हैं।
– जब बच्‍चा फीटस में होता है, तो सेल्‍स बहुत तेजी से ग्रो करती हैं।
– लेकिन यह दवा जिस तरह से वायरस के ग्रोथ को रोकता है, उसी तरह से यह दवा सेल्स के ग्रोथ को भी रोक सकता है।
– इस वजह से यह प्रेगनेंट महिला में नहीं दी जानी चाहिए।

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रेमेडिसिविर
– इस दवा को भी ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने कोविड-19 दवा के तौर पर पर्मिशन दी है।
– संदिग्‍ध और कन्‍फर्म मरीजों में गंभीर स्‍टेज पर यह दवा यूज की जाएगी।
– इस दवा को इंडियन बेस्‍ड कंपनी हेटेरो (Hetero) मैनिफैक्‍चरिंग और मार्केटिंग करेगी।
– मार्केट में यह दवा कोविफोर (Covifor) नाम से मिलेगी।
– इसका साइडइफेक्‍ट लिवर पर पड़ता है। लिवर के एंजाइम में गड़बड़ी हो जाती है।

कौन देता है एप्रूवल
– भारत में दवा को अप्रूवल देता है सेंट्रल ड्रग स्‍टैंडर्ड कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO).
– यह डायरेक्‍टरेट जनरल ऑफ हेल्‍थ सर्विसेज, मिनिस्‍ट्री ऑफ हेल्‍थ एंड फैमेली वेलफेयर के अंतर्गत आता है।
– CDSCO के चीफ को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया कहते हैं।

—-
– इसके अलावा दो और दवाएं हैं, – ACQH, Umifebovir (यूमिफेनोविर) माइकोबैटीरियम W – एंटी लेप्रोसी ड्रग का भी ट्रायल चल रहा है।

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3. कोरोना पेशेंट के इलाज के लिए दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19 सेंटर किस शहर में बनाया गया है?

a. चंडीगढ
b. दिल्‍ली
c. मुंबई
d. चेन्‍नई

Answer b. दिल्‍ली

– यह सेंटर दिल्‍ली के छतरपुर इलाके में राधा स्‍वामी सत्‍संग व्‍यास का एक विशाल परिसर में स्थित है।
– तीन सौ एकड़ में फैले इस परिसर में अब दुनिया का सबसे बड़ा सेंटर होगा।
– फिलहाल इसे तैयार किया जा रहा है।
– परिसर के अंदर 12 लाख 50 हजार वर्ग फुट का शेड है, इसमें कोरोना पेशेंट के लिए दस हजार बेड लगाए जा रहे हैं।
– यह 22 फुटबॉल मैदानों से भी बड़ा क्षेत्र का है।
– इस शेड का इस्‍तेमाल सालों से सत्‍संग के लिए होता रहा है।
– इसके विशाल आकार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, यहां पर एक साथ तीन लाख लोग बैठकर सत्‍संग सुन चुके हैं।
– कोविड सेंटर में लगने वाले बेड को सैनिटाइज करने की जरूरत भी नहीं होगी। ये पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल होंगे।

– उपराज्‍यपाल अनिल बैजल ने इसकी तैयारी का जायजा भी लिया है।
– यहां पर कुल दस हजार बेडों में से एक हजार ऐसे होंगे, जिनके साथ ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगे होंगे।
– इसके साथ ही पैथोलॉजी लैब भी बनाई जाएंगी, जिससे कि मरीजों की जांच आसानी से हो सके।
– स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह केंद्र अकेले ही करीब 20 ऐसे अस्पतालों का काम करेगा, जहां पांच सौ मरीजों की व्यवस्था होती है।

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4. 21 जून को हुए सूर्य ग्रहण (solar eclipse) इनमें से किस तरह का था?

a. Partial
b. Total
c. Annular
d. इनमें से कोई नहीं

Answer c. Annular (ऐन्यलर)

– इस बार का सूर्य ग्रहण रिंग ऑफ फायर कहा गया है।

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5. इस सदी का सबसे गहरा सूर्य ग्रहण (deepest annular solar eclipse) कब हुआ?

a. 21 जून 2020
b. 20 जून 2020
c. 10 जून 2019
d. 21 जून 2018

Answer a. 21 जून 2020

– यह सूर्य ग्रहण बहुत इंपॉर्टेंट है, एग्‍जाम के लिए।
– क्‍योंकि यह इस सेंच्‍यूरी का डीपेस्‍ट सोलर इक्‍लिप्‍स था।
– साइंटिस्‍ट का कहना है कि 98.8 प्रतिशत ढंक लिया। तो इसे डिपेंस्‍ट एन्‍यलर सोलर इक्लिप्‍स कहते हैं।

बेसिक बातें
– इक्लिप्‍स का मतलब – एस्‍ट्रोनॉमिक टर्म के रूप में कहते हैं कि जब दो सेलेस्टियल (Celestial) बॉडी (खगोलीय पिंड) के बीच में तीसरी बॉडी आ जाती है और वहां पर व्‍यूइंग नहीं हो पाता।
– तो इस सेचुएशन को बेसिकली इक्लिप्‍स कहते हैं।

– बेस‍िक मतलब हुआ कि सन और अर्थ के बीच में मून आ जाता है और सन की रोशनी को ढंक लेता है, तो इसे सोलर इकलिप्‍स कहते हैं।

तीन तरह के सूर्य ग्रहण?
– पार्शियल – जब चंद्रमा सूरज को थोड़ा सा ढंकता है। इस तरह से।
– टोटल – जब चंद्रमा सूरज को पूरी तरह से ढंक लेता है और किरणें पृथ्‍वी पर नहीं आ पाता है, तो यह टोटल इक्लिप्‍स कहते हैं। डायमंड रिंग इफेक्‍ट टोटल सोलर इक्लिप्‍स में दिखता है। इस तरह से। डायमंड की तरह छोटी चमकदार रोशनी होती है।
– तीसरा है ऐन्यलर सोलर इक्लिप्‍स, जो 21 जून को देखा।
– चंद्रमा, सूर्य को तो ढंक लेता है, लेकिन इसमें पूरी तरह से नहीं ढंक पाता है और इसे कहते हैं रिंग ऑफ फायर।

– दरअसल, यह सब होता है चंद्रमा के पृथ्‍वी से दूर या नजदीक होने से।
– चांद अगर दूर होगा, तो टोटल सोलर इक्लिप्‍स देखने को मिलेगा। जिसमें डायमंड रिंग बनता है।
– थोड़ा नजदीक हुआ तो यह एन्‍यलर सोलर इल्किप्‍स हुआ।
– चांद जितना नजदीक होगा, उतना कम एरिया में पृथ्‍वी पर सूर्य की किरण नहीं आ पाएगी।


इस बार के एन्‍यलर सोलर इक्लिप्‍स को ‘नेक्‍लेस ऑफ पियर्स’ भी कहा गया है।
– वैसे तो सूर्य ग्रहण भारत में दिखा, लेकिन एन्‍यलर सोलर इक्लिप्‍स का बेहतर नजारा, तीन राज्‍य, राजस्‍थान, हरियाणा और उत्‍तराखंड में दिखाई दिया।


डीपेस्‍ट एन्‍यलर सोलर इक्लिप्‍स क्‍यों?
– डीपेस्‍ट का मतलब- चांद पूरी तरह से सूरज को ढंक नहीं पाता।
– यहां पर रिंग ऑफ फायर का शेप क्रिएट करते हुए, डीपेस्‍ट कहते हैं।
– साइंटिस्‍ट का कहना है कि 98.8 प्रतिशत ढंक लिया। तो इसे डिपेंस्‍ट एन्‍यलर सोलर इक्लिप्‍स कहते हैं।

– भारत में अगला सूर्य ग्रहण 11 साल बाद 21 मई 2031 को दिखेगा।
– इस शताब्‍दी में पांच और इक्लिप्‍स देखने को मिलेगा।

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6. सामाजिक कार्यकर्ता विद्या बेन शाह का निधन 19 जून 2020 को हो गया, उन्‍हें पद्मश्री अवार्ड कब मिला था?

a. वर्ष 2019
b. वर्ष 2015
c. वर्ष 1990
d. वर्ष 1992

Answer d. वर्ष 1992

– वह 98 वर्ष की थीं।
– 1970 के दशक में वह नई दिल्ली नगरपालिका परिषद की प्रमुख बनने वाली पहली गैर-सरकारी अधिकारी भी बनीं।
– Indian Council for Child Welfare (ICCW) की प्रेसिडेंट (1976 से 1978 तक) भी रह चुकी थीं।

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7. रजिंदर गोयल का निधन 21 जून 2020 को हो गया, वह किस वजह से प्रसिद्ध थे?

a. संगीत
b. क्रिकेट
c. फुटबॉल
d. इनमें से कोई नहीं

Answer b. क्रिकेट

– वह बाएं हाथ के स्पिनर रह चुके थे।
– गोयल ने 157 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिनमें से अधिकांश हरियाणा के लिए थे, और अपने करियर में 750 विकेट लिए।
– 2017 में, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने राजिंदर गोयल को CK नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया था।

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8. अमेरिकी सीनेट ने किस भारतीय अमेरिकी वैज्ञानिक को वहां के राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (NSF) का निदेशक नियुक्‍त किया है?

a. डॉ. सेतुरामन पंचनाथन
b. डॉ. अजय विक्रम सेठ
c. डॉ. राकेश मारिया
d. प्रो. अरविंद वस्‍तुगल

Answer a. डॉ. सेतुरामन पंचनाथन

– पंचनाथन दूसरे भारतीय-अमेरिकी हैं, जिसे प्रतिष्ठित विज्ञान पद के लिए नामित किया गया है।
– इससे पहले डॉ. सुभ्रा सुरेश भी अक्टूबर 2010 से मार्च 2013 तक निदेशक रह चुकी हैं।

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9. गालवन घाटी में चीन की सेना से हिंसक झड़प के बाद सरकार ने सेना को कितनी रकम तक के हथियार खरीदने के अधिकार दिए हैं?

a. 100 करोड़
b. 500 करोड़
c. 800 करोड़
d. 1000 करोड़

Answer b. 500 करोड़

– सेना ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हथियारों के इस्‍तेमाल के नियमों में बदलाव किया है।
– न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नियमों में बदलाव के तहत फील्ड कमांडरों को यह अधिकार दिया गया है कि वे विशेष परिस्थितियों में अपने जवानों को हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत दे सकते हैं।
– गलवान में हुई झड़प के दौरान भारतीय जवानों ने इसलिए हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया था, क्योंकि 1996 और 2005 में हुए समझौते में ऐसा ना करने पर चीन और भारत में सहमति बनी थी।
– दोनों देशों में इस बात पर भी समझौता हुआ था कि उनकी सेनाएं एलएसी के 2 किलोमीटर के दायरे में विस्फोटकों और हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगी।

– चीन लगातार गलवान घाटी को अपनी सीमा में बता रहा है।
– भारत सरकार का कहना है कि गलवान घाटी पर चीन के दावे मंजूर नहीं हैं। ये चीन के खुद के पहले के रुख के उलट हैं।

– इधर, चीन ने ग्‍लोबल टाइम्‍स के जरिए कहा है कि अगर LAC पर हथियार का इस्‍तेमाल हुआ तो बुरे अंजाम होंगे।

– भारत और चीन सेना के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्‍तर की बातचीत 22 जून को हो रही है।
– लद्दाख में चाउशुल के सामने चाइनीज साइड में हो रही है।
– यह पैंगोंग त्‍सो लेक के कुछ किलोमीटर पर है।

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10. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून को ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ की शुरुआत की, यह योजना के तहत कितनी रकम खर्च होगी?

a. 10 हजार करोड़ रुपए
b. 50 हजार करोड़ रुपए
c. 60 हजार करोड़ रुपए
d. 80 हजार करोड़ रुपए

Answer b. 50 हजार करोड़ रुपए

– इस स्कीम के तहत छह राज्यों के 116 जिलों में लोगों को रोजगार मिलेगा।
– बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के 116 जिलों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
– इस स्कीम के तहत फिलहाल 125 दिनों तक श्रमिकों को काम दिया जाएगा।
– कोरोना संकट की वजह से अपने शहरों को लौटे श्रमिकों को इस स्कीम से फायदा होगा।
– इस योजना के तहत लोगों को 25 तरह के काम मिलेंगे।
– ‘इन 25 कार्यों में आंगनवाड़ी केंद्र, ग्रामीण सड़कें, ग्रामीण आवास, रेलवे के काम, ग्रामीण क्षेत्रों में RURBAN मिशन, सोलर पम्पसेट, फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने आदि काम शामिल हैं।’

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11. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने 2020 के 100 टेक्नोलॉजी कंपनियों की लिस्ट जारी की, जिसमें भारत की कितनी कंपनियों को जगह मिली है?

a. तीन
b. दो
c. चार
d. पांच

Answer b. दो

– भारतीय स्टार्टअप कंपनियां ‘स्टेलऐप्स’ और ‘जेस्टमनी’ ने ये कामयाबी हासिल की।
– इससे पहले गूगल, एयरबीएनबी, किकस्टार्टर, मोजिला, स्पॉटिफाई, ट्विटर और विकीमीडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं।
– वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (wef) 100 संस्थाओं की सूची तैयार करता है।
– जो अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ वैश्विक मुद्दों को संबोधित करते हैं।

– पांच साल पुराने स्टार्टअप जेस्टमनी की स्थापना लिजी चैपमन, प्रिया शर्मा और आशीष अनंथरमण ने की थी।
– यह स्टार्टअप कंज्यूमर को उधार देता है।
– स्टेलऐप्स को 2011 में स्थापित किया गया था।
– यह फार्म-टू-कंज्यूमर चेन को डिजिटाइज़ करता है।
– और अपने एडवांस्ड एनालिटिक्स के माध्यम से डेयरी इकोसिस्टम पार्टनरशिप को सक्षम करने के लिए फुल-स्टैक IoT प्लेटफ़ॉर्म को एआई तकनीक की मदद से चलाता है।
– यह प्लेटफार्म छोटे डेयरी किसानों को डिजिटल भुगतान और आसान लोन और बीमा की सुविधा भी देता है।


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