9 to 11 अप्रैल 2026 करेंट अफेयर्स

यह 9 to 11 अप्रैल 2026 2026 का करेंट अफेयर्स है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए डेली करेंट अफेयर्स के सवाल-जवाब यहां बता रहे हैं।

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1. ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अप्रैल 2026 में बेनतीजा रही शांति वार्ता का मेजबान शहर इनमें से कौन रहा?

a. दोहा, कतर
b. मस्‍कट, ओमान
c. जिनेवा, स्विट्जरलैंड
d. इस्‍लामाबाद, पाकिस्‍तान

Answer: d. इस्‍लामाबाद, पाकिस्‍तान

वार्ता के पीछे अमेरिका ने क्‍या किया?
– उधर चलती बातचीत के बीच अमरीका ने जंगी जहाज भेजकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से माइंस हटाने की नाकामयाब कोशिश की तो नेतनयाहू ने लगातार ईरान और तुर्किए के खिलाफ़ बयान जारी किए और लेबनॉन पर बम बरसाए।
– मामला कहाँ फँस रहा? लड़ाई फिर शुरू होगी? या बातचीत आगे बढ़ेगी? तुर्किए के राष्ट्रपति के जंगी बयान का मानी क्या है? सऊदी में पाकिस्तान ने क्यों जेट भेजे हैं?

– ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता (अप्रैल 2026) का मेजबान शहर पाकिस्‍तान की राजधानी रहा।
– 28 फरवरी 2026 में शुरू हुए भीषण संघर्ष के 40 दिन बाद युद्धविराम हुआ और फिर भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी/अप्रत्यक्ष बातचीत हुई।
– हालांकि 21 घंटे बाद ही बातचीत बेनतीजा रही।
– पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस प्रक्रिया को लीड कर रहे थे।

उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल:
– अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance), स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे हैं।
– ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ, विदेश मंत्री अरागची के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के शामिल हुआ।

बातचीत का फॉर्मेट
– इस्लामाबाद में बातचीत का जो फ़ॉर्मेट तय हुआ, उसे ‘प्रोक्सिमीटी टॉक्स’ भी कहा जाता है।
– इसका मतलब ये हुआ कि अमेरिका और ईरान के वार्ताकार दल एक ही होटल में होते हुए भी अलग अलग कमरों में।
– पाकिस्तानी मध्यस्थ का दल एक से बात कर दूसरे के पास गए, दूसरे से बात कर पहले के पास आया, फिर यही प्रक्रिया दोहरायी जाती रही।

इस्लामाबाद बातचीत बेनतीजा: अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं
– अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने शांति वार्मा के दूसरे दिन 12 अप्रैल की सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा: “हम अब तक 21 घंटे से इसमें लगे हुए हैं, और हमने कई सार्थक चर्चाएँ की, ये अच्छी खबर है। बुरी खबर है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए, उन्होंने हमारी शर्तें नहीं मानी हैं। हमने बहुत साफ़ कर दिया है कि हमारी red lines क्या हैं, उनकी किन बातों को हम मानने के लिए तैयार हैं और किन बातों को नहीं। उन्होंने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।”
– वेंस ने आगे कहा: “मैं सभी डिटेल्‍स में नहीं जाऊँगा, क्योंकि 21 घंटे तक निजी तौर पर बातचीत करने के बाद मैं सार्वजनिक तौर से बातचीत नहीं करना चाहता।
– लेकिन सीधी बात ये है कि हमें उनकी ओर से एक साफ़ वायदा चाहिए कि वो परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और ऐसे साधनों की भी तलाश नहीं करेंगे जिनसे वो जल्द परमाणु हथियार बना सकें।”
– “हम यहां से एक बहुत ही आसान प्रस्ताव देकर जा रहे हैं। इसे समझने का एक तरीक़ा हमारा आखिरी और सबसे अच्छा प्रस्ताव है। हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।”
– वेंस ने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान की कोशिशों की तारीफ की और कहा कि बातचीत में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तान की वजह से नहीं थीं। उन्होंने बहुत बढ़िया काम किया और सच में हमारी और ईरानियों की मदद करने की कोशिश की, ताकि हम दोनों के बीच की खाई भर सकें और किसी समझौते पर पहुंच सकें।
– इसके बाद वेंस ने कहा कि अमेरिकी दल अब वापस जा रहा है।

ईरान ने कहा –
– ईरान ने कहा कि प्रगति अमेरिका की “अच्छी नीयत” और ईरान के अधिकारों की मान्यता पर निर्भर करती है।
– ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा
– कई मुद्दों पर बातचीत हुई जिसमें ये शामिल है:
– न्यूक्लियर कार्यक्रम
– युद्ध का हर्जाना
– प्रतिबंधों हटाना
– होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा और
– ईरान ख़िलाफ़ युद्ध को पूरी तरह ख़त्म करना

ईरान में सरकारी TV ने Islamabad में अमेरिका ईरान बातचीत के नाकाम होने के कारण बताए:
1. अमेरिका ने बातचीत की मेज पर वो हासिल करने की कोशिश की जो वो युद्ध के जरिए हासिल नहीं कर सका.
2. अमेरिकियों ने मांग की कि ईरान अपना enriched uranium सौंप दे और Strait of Hormuz को खोल दे.

पाकिस्‍तान ने कहा –
– पाकिस्तान के विदेश मंत्री डार का बयान – उम्मीद है कि दोनों पक्ष ‘स्थायी शांति’ के लिए बातचीत जारी रखेंगे।

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शांति वार्ता का संदेश
– दरअसल, अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह मैसेज देने के लिए बातचीत में शामिल होना जरूरी था कि वह युद्धोन्मादी नहीं है।
– लेकिन बातचीत में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचाना उसकी मजबूरी थी, क्योंकि वह खुले तौर पर इजरायल द्वारा संचालित हो रहा था।

ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं चलाएगा यह समझौता क्या केवल अमेरिका के साथ संभव था?
– अगर ऐसा कोई समझौता चाहिए तो उसमें संयुक्त राष्ट्र की देखरेख जरूरी है। ‌साथ ही रूस चीन जैसे देशों का शामिल होना जरूरी है जो ईरान को भरोसा दे सके की आगे कभी भी इजरायल अमेरिका उस पर हमला नहीं करेंगे और करेंगे तो वे लोग उसके साथ खुले तौर पर आएंगे।

– अब बैक चैनल का दौर फिर शुरू होगा.

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2. UNSC में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लाए गए प्रस्‍ताव पर किन देशों ने वीटो (7 अप्रैल 2026) कर दिया?

a. USA और फ्रांस
b. जापान और चीन
c. चीन और रूस
d. ब्रिटेन और फ्रांस

Answer: c. चीन और रूस

– दरअसल, बहरीन ने इस संबंध में UNSC में प्रारंभिक प्रस्ताव दिया था।
– इसमें संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन सुनिश्चित करने और इसे बंद करने के प्रयासों को रोकने के लिए ”सभी आवश्यक साधनों” (संयुक्त राष्ट्र की शब्दावली में सैन्य कार्रवाई भी शामिल) का उपयोग करने का अधिकार देने की बात थी।
– कई बार मीटिंग टलने और प्रस्‍ताव में सुधार के बाद 7 अप्रैल 2026 को वोटिंग हुई। प्रस्ताव में बार-बार संशोधन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि ये दोनों देश इसपर मतदान से दूर रहेंगे।
– हालांकि रूस और चीन ने वीटो कर दिया।
– पंद्रह सदस्यीय यूनएसएससी में प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट और विरोध में दो वोट (वीटो) पड़े। वहीं, दो सदस्यों ने मतदान से दूरी बना ली। अनुपस्थित रहने वाले देशों में पाकिस्तान और कोलंबिया हैं।
– 13 -14 साल बाद चीन ने पहली बार वीटो पावर का इस्‍तेमाल किया।

वीटो से क्‍या फर्क पड़ा
– इससे होर्मुज स्‍ट्रेट को लेकर ईरान कानूनी दबाव से बच गया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को जानें
– संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिसका मुख्य कार्य दुनिया में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।
– संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना 1945 में की गई थी। इसके पांच स्थायी (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। हालांकि, सिर्फ स्थायी सदस्यों के पास ‘वीटो’ शक्ति होती है।
– संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 10 अस्थायी सदस्य 2 साल के लिए चुने जाते हैं। वर्तमान में अस्थायी सदस्यों में बहरीन, कोलंबिया, डीआर कांगो, डेनमार्क, ग्रीस, लातविया, लाइबेरिया, पाकिस्तान, पनामा और सोमालिया शामिल हैं।

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3. भारत की पहली ‘ओपनली क्वीयर’ (Openly Queer) सांसद कौन बनीं?

a. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी
b. डॉ. मेनका गुरुस्वामी
c. अप्सरा रेड्डी
d. सत्य श्री शर्मिला

Answer: b. डॉ. मेनका गुरुस्वामी (राज्‍य सभा सांसद)

– उन्‍होंने 6 अप्रैल 2026 को राज्‍यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली।
– वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) से राज्‍यसभा सदस्‍य हैं।

कौन हैं डॉ. मेनका गुरुस्वामी?
– डॉ. मेनका गुरुस्वामी देश की एक बेहद प्रसिद्ध वरिष्ठ वकील (Senior Advocate) हैं।
– उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक केस लड़े हैं, जिनमें सबसे प्रमुख Section 377 को खत्म करने की लड़ाई थी (जिसने भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया)।
– डॉ. मेनका गुरुस्वामी की पहचान और उनकी निजी जिंदगी के बारे में बात करें, तो वह लेस्बियन (Lesbian) के रूप में पहचानी जाती हैं।
– इसका मतलब यह है कि वह एक महिला हैं और महिलाओं के प्रति ही आकर्षित होती हैं। उनके जीवन और करियर के बारे में कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:
– साझेदार (Partner): डॉ. गुरुस्वामी और उनकी पार्टनर अरुंधति काटजू (जो खुद भी एक बहुत बड़ी वकील हैं) ने मिलकर ही सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 को हटाने की कानूनी लड़ाई का नेतृत्व किया था।
– सार्वजनिक स्वीकारोक्ति – 2018 में जब सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया, उसके कुछ समय बाद एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था कि यह जीत उनके लिए सिर्फ एक वकील के तौर पर नहीं, बल्कि एक जोड़े (Couple) के तौर पर भी बहुत बड़ी थी।

“पहली ओपनली क्वीयर (Openly Queer) MP” का क्या अर्थ है?
– क्वीयर (Queer): यह एक व्यापक शब्द है जो उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है, जो ‘हेट्रोसेक्सुअल’ (विषमलिंगी) नहीं हैं। इसमें LGBTQ+ समुदाय के लोग आते हैं।
– ओपनली (Openly): इसका मतलब है कि उन्होंने अपनी पहचान को दुनिया से छिपाया नहीं है। वह सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान (Identity) को स्वीकार करती हैं।

यह खबर ऐतिहासिक क्यों है?
– भारतीय राजनीति में अब तक कई सांसद रहे होंगे जो अपनी निजी जिंदगी में LGBTQ+ समुदाय से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन डॉ. गुरुस्वामी पहली ऐसी व्यक्ति हैं जिन्होंने अपनी पहचान के साथ खुले तौर पर संसद में कदम रखा है।
– प्रतिनिधित्व (Representation): इससे LGBTQ+ समुदाय को देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) में अपनी बात रखने के लिए एक आवाज मिली है।

क्या क्वीयर का मतलब सिर्फ समलैंगिक है?
– नहीं। ‘समलैंगिक’ (Gay/Lesbian) का मतलब सिर्फ उन लोगों से है जो अपने ही लिंग के प्रति आकर्षित होते हैं।
– क्वीयर (Queer) एक ‘अम्ब्रेला टर्म’ (Umbrella Term) है। इसका मतलब है कि यह एक ऐसा बड़ा शब्द है जिसके नीचे वो सभी लोग आते हैं जो समाज के बनाए हुए पुराने “स्त्री-पुरुष” के खांचे (Heterosexuality) में फिट नहीं बैठते। इसमें शामिल हैं:

‘क्वीयर’ शब्द का इतिहास
– दिलचस्प बात यह है कि अंग्रेजी में “Queer” का पुराना मतलब ‘अजीब’ या ‘टेढ़ा’ होता था। पहले इसका इस्तेमाल लोगों को चिढ़ाने या अपमानित करने के लिए किया जाता था।
– लेकिन 1980 और 90 के दशक में, इस समुदाय के लोगों ने इस शब्द को ‘अपना’ बना लिया। उन्होंने कहा—”हाँ, हम अलग हैं और हमें इस पर गर्व है।” आज यह शब्द अपमान का नहीं, बल्कि एकता और गर्व (Pride) का प्रतीक है।

यह शब्द इतना लोकप्रिय क्यों है?
– कई लोग खुद को ‘Gay’ या ‘Transgender’ जैसे किसी एक खास लेबल में नहीं बांधना चाहते। उन्हें लगता है कि उनकी पहचान इससे कहीं ज्यादा जटिल है। ऐसे लोग खुद को ‘क्वीयर’ कहना पसंद करते हैं क्योंकि:
– यह उन्हें अपनी पहचान बताने की आजादी देता है बिना यह बताए कि उनकी पसंद एकदम सटीक क्या है।
– यह रूढ़िवादी सामाजिक नियमों को चुनौती देने का एक तरीका है।

शब्द अर्थ
– समलैंगिक : एक विशिष्ट पहचान (सिर्फ समान लिंग के प्रति आकर्षण।
– क्वीयर : एक व्यापक पहचान (हर वो व्यक्ति जो समाज के पारंपरिक ‘स्त्री-पुरुष’ नियमों से अलग है)

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4. विश्व होम्योपैथी दिवस कब मनाया जाता है?

a. 10 अप्रैल
b. 11 अप्रैल
c. 12 अप्रैल
d. 13 अप्रैल

Answer: a. 10 अप्रैल

2026 की थीम
– होम्योपैथी के माध्यम से सामंजस्य: सीमाओं से परे उपचार

क्‍यों मनाया जाता है
– इसी दिन 10 अप्रैल 1755 को होम्‍योपैथी दवा पद्धति के आविष्‍कारक और महान जर्मन चिकित्सक डॉ. क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हैनीमेन (Christian Friedrich Samuel Hahnemann) का जन्‍म हुआ था।
– उनकी जयंती के उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है।

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5. ISRO द्वारा किया गया IADT-02 (इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-2) परीक्षण किस मिशन से संबंधित है?

a. चंद्रयान-3
b. आदित्य-L1
c. गगनयान
d. मंगलयान

Answer: c. गगनयान

गगनयान मिशन की बड़ी तैयारी: ISRO का एयर ड्रॉप टेस्ट सफल
– इसरो ने 10 अप्रैल को अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के तहत ‘दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट’ (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा किया।
– यह परीक्षण सतीश धवन स्‍पेस सेंटर के द्वारा श्रीहरीकोटा के पास किया गया।

क्या हुआ टेस्ट में?
– इस परीक्षण में अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले क्रू मॉड्यूल (कैप्सूल) का एक डमी मॉडल इस्तेमाल किया गया।
– करीब 5.7 टन वजनी इस कैप्सूल को इंडियन एयरफोर्स के चिनूक हेलीकॉप्टर से लगभग 3 किलोमीटर ऊंचाई तक ले जाया गया और फिर समुद्र के ऊपर हवा में छोड़ दिया गया।

पैराशूट सिस्टम की जांच, नेवी ने किया रिकवरी ऑपरेशन
– कैप्सूल के नीचे गिरते समय उसमें लगे 10 पैराशूट एक तय क्रम (सीक्वेंस) में खुले।
– इन पैराशूट्स ने कैप्सूल की गति को धीरे-धीरे कम किया, जिससे वह सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतर सका (स्प्लैशडाउन)।
– लैंडिंग के बाद Indian Navy ने कैप्सूल को समुद्र से सफलतापूर्वक बाहर निकाला।
– इसरो के अनुसार, इस टेस्ट ने पैराशूट आधारित डीसलेरेशन सिस्टम को पूरी तरह प्रमाणित (वैलिडेट) कर दिया है।

क्यों है यह टेस्ट महत्वपूर्ण?
– गगनयान मिशन के दौरान जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटेंगे, तो उनका कैप्सूल इसी तरह पैराशूट के जरिए समुद्र में उतरेगा।
– ऐसे में यह परीक्षण उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
– इससे पहले पहला एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-01) अगस्त 2025 में सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
– इसरो ने यह साबित कर दिया है कि अंतरिक्ष से लौटते समय भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों का कैप्सूल सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर उतारा जा सकता है।

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6. भारतीय सेना ने किस राज्‍य में “ऑपरेशन हिमसेतु” के तहत बर्फबारी और तूफान से भूस्खलन में फंसे लोगों को निकाला गया?

a. अरुणाचल प्रदेश
b. उत्तराखंड
c. आंध्र प्रदेश
d. सिक्किम

Answer: d. सिक्किम

– इंडियन आर्मी की ईस्‍टर्न कमांड ने ‘ऑपरेशन हिमसेतु’ के तहत उत्तर सिक्किम में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला।
– दरअसल, अप्रैल 2026 में भारत-चीन सीमा के पास उत्तर सिक्किम के लाचेन क्षेत्र में लगातार बर्फबारी और तूफानों के कारण भारी भूस्खलन हुआ।
– इस दौरान तारुम चू के पास बना नया पुल और सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे इलाके का संपर्क पूरी तरह टूट गया।
– इसकी वजह से 1,321 पर्यटक और 84 स्थानीय निवासी फंस गए थे। कुल मिलाकर 1400 से अधिक लोग दुर्गम क्षेत्र में फंस गए थे।

कैसे चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन?
– सेना ने कठिन मौसम और बर्फबारी के बीच घटनास्थल पर अस्थायी फुट ब्रिज तैयार किया।
– फंसे लोगों को पैदल सुरक्षित पार कराया गया
– इसके बाद उन्हें वाहनों से गंगटोक भेजा गया
– जगह-जगह राहत केंद्र बनाकर भोजन, आश्रय और चिकित्सा सुविधा दी गई
– इस अभियान में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने सड़क साफ करने और बर्फ हटाने का काम किया, जबकि सिविल प्रशासन ने भी सहयोग किया।

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7. महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती 11 अप्रैल 2026 को मनाई गई, उन्‍होंने 1873 में किस संस्था की स्थापना की थी?

a. आर्य समाज
b. सत्यशोधक समाज
c. प्रार्थना समाज
d. ब्रह्म समाज

Answer: b. सत्यशोधक समाज

महात्मा ज्योतिबा फुले
– जन्म: 11 अप्रैल 1827, पुणे (महाराष्ट्र)।
– मुख्य विचारधारा: उन्होंने जाति प्रथा, छुआछूत और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उन्हें ‘भारतीय सामाजिक क्रांति का जनक’ माना जाता है।
– शिक्षा का प्रसार: फुले का मानना था कि शिक्षा ही दलितों और महिलाओं की मुक्ति का एकमात्र साधन है। उन्होंने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल खोला।
– सत्यशोधक समाज: 24 सितंबर 1873 को उन्होंने ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शोषित वर्गों और दलितों को मानवाधिकार दिलाना था।
– महात्मा की उपाधि: उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए 1888 में एक विशाल जनसभा में उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी गई।
– प्रमुख रचनाएँ: ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्याचा आसूड’ (किसान का कोड़ा) और ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।
– सत्यशोधक समाज का मुख्य उद्देश्य: शोषित वर्गों (दलितों, पिछड़ों और महिलाओं) को शिक्षा के माध्यम से जागरूक करना और उन्हें पुरोहितों के धार्मिक व मानसिक शोषण से मुक्त कराना।
– मुख्य सिद्धांत और विचारधारा: ईश्वर एक है: फुले का मानना था कि ‘निर्मिक’ (सृष्टिकर्ता) एक है और उसकी भक्ति के लिए किसी बिचौलिए या पुजारी की आवश्यकता नहीं है।
– शिक्षा पर जोर: “शिक्षा के बिना मति गई, मति के बिना नीति गई…”—फुले का मानना था कि शिक्षा ही प्रगति का एकमात्र मार्ग है।

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8. किस देश के हवाई द्वीप पर स्थित किलाउआ ज्वालामुखी दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है, जो फिर से फट गया?

a. जर्मनी
b. जापान
c. न्‍यूजीलैंड
d. यूएसए

Answer: d. यूएसए

– किलाऊआ, जिसे माउंट किलाऊआ (हवाई में “अधिक फैलाने वाला”) भी कहा जाता है।
– यह संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई द्वीप के दक्षिण-पूर्वी भाग पर हवाई ज्वालामुखी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है।
– इसे विश्व के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में स्थान प्राप्त है तथा इसका आकार गुंबद के समान है।
– यह 10 अप्रैल 2026 को फिर से फट पड़ा।
– अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, किलाउआ ज्वालामुखी 1952 से अब तक दर्जनों बार फट चुका है । पिछले विस्फोटों की अवधि दो सप्ताह से लेकर एक वर्ष से अधिक तक रही है।

ज्वालामुखी क्या है और कैसे फटता है?
– ज्‍वालामुखी विस्‍फोट के बारे में बात करने से पहले यह जानना जरूरी है कि ज्वालामुखी क्या है।
– ज्‍वालामुखी पृथ्‍वी की सतह में एक उद्घाटन या टूटना है, जो मैग्‍मा – जो गर्म तरल और अर्ध-तरल चट्टान के रूप में निकलता है – ज्‍वालामुखीय राख और गैसों को बाहर निकालता है।
– अन्‍य शब्‍दों में कहें, तो ज्‍वालामुखी पृथ्‍वी की सतह पर उपस्थित ऐसी दरार या छिद्र (वेंट) होता है, जिसके माध्‍यम से पृथ्‍वी के आंतरिक भाग से लावा, राख, पिघली चट्टानें और गैसें बाहर निकलती हैं।

– पृथ्‍वी के मेंटल (पृथ्‍वी के तीन हिस्‍सों में से एक) में एक कमजोर क्षेत्र होता है, जिसे एस्‍थेनोस्‍फीयर (asthenosphere) कहा जाता है और मैग्‍मा इसमें मौजूद पदार्थ होता है।
– ज्‍वालामुखीय हॉटस्‍पॉट वे स्‍थान होते हैं, जो ऐसे स्‍थान पर पाए जाते हैं, जहां पृथ्‍वी की टेक्‍टोनिक प्‍लेट्स आपस में मिलती हैं।
– समुद्र के भीतर अनुमानित एक मिलियन ज्‍वालामुखी हैं, और उनमें से अधिकांश टेक्‍टोनिक प्‍लेटों के पास स्थित हैं।
– जब टेक्‍टोनिक प्‍लेट आपस में टकराती हैं, तो इससे तापमान और दबाव बढ़ता जाता है। इसके बाद फिर मैग्‍मा बनता है, जो कि पृथ्‍वी की सतह के अंदर पिघला हुआ पदार्थ होता है।
– जब यही मैग्‍मा पृथ्‍वी की आंतरिक परत से बाहर आता है, तो उसे लावा कहा जाता है।

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भारत में ज्वालामुखी
– बैरन द्वीप, अंडमान द्वीप समूह (भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी)
– नारकोंडम, अंडमान द्वीप समूह (निष्‍क्रिय ज्‍वालामुखी)
– बारातांग, अंडमान द्वीप समूह (निष्‍क्रिय ज्‍वालामुखी)
– डेक्कन ट्रैप्स, महाराष्ट्र (निष्‍क्रिय ज्‍वालामुखी)
– धिनोधर हिल्स, गुजरात (निष्‍क्रिय ज्‍वालामुखी)
– धोसी हिल, हरियाणा (निष्‍क्रिय ज्‍वालामुखी)

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9. भारत ने अप्रैल 2026 में UN ECOSOC के तहत किन निकायों के चुनावों में निर्विरोध जीत हासिल की?

a. आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति (CESCR)
b. विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग (CSTD)
c. गैर-सरकारी संगठनों पर समिति (NGO कमेटी) और कार्यक्रम और समन्वय समिति (CPC)
d. उपरोक्‍त सभी

Answer: d. उपरोक्‍त सभी (आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति (CESCR), विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग (CSTD), गैर-सरकारी संगठनों पर समिति (NGO कमेटी), कार्यक्रम और समन्वय समिति (CPC)

ECOSOC
– UN ECOSOC full form: United Nations Economic and Social Council (संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद)
– UN ECOSOC, संयुक्‍त राष्‍ट्र के चार्टर द्वारा स्‍थापित संयुक्‍त राष्‍ट्र प्रणाली के छह प्रमुख अंगों में से एक है।
– UN के अन्‍य अंग – सुरक्षा परिषद, महासभा, ट्रस्‍टशिप काउंसिल और सेक्रेटेरियट।

निकायों के बारे में
– आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति (CESCR – Committee for Economic, Social and Cultural Rights): यह 18 विशेषज्ञों का समूह है जो यह देखता है कि देश अपने नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य और काम के अधिकार जैसे बुनियादी हक दे रहे हैं या नहीं।
– विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग (CSTD): यह तकनीकी और डिजिटल विकास के लिए सलाह देने वाला मुख्य निकाय है, जो विकासशील देशों में विज्ञान के सही उपयोग को बढ़ावा देता है।
– गैर-सरकारी संगठनों पर समिति (Committee on NGOs): यह समिति तय5r करती है कि किन NGOs को संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ काम करने और बैठकों में शामिल होने का आधिकारिक दर्जा मिलना चाहिए।
– कार्यक्रम और समन्वय समिति (CPC): यह UN के बजट और कार्यक्रमों की योजना बनाती है ताकि अलग-अलग विभागों के काम आपस में टकराएं नहीं और पैसा सही जगह खर्च हो।

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10. UN ECOSOC के निकाय ‘आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति’ (CESCR) में किस भारतीय राजनयिक को फिर से निर्वाचित किया गया?

a. विनोद वर्मा
b. रजनी प्रभा
c. प्रीति सरन
d. अंजलि दास

Answer: c. प्रीति सरन

– अनुभवी राजनयिक प्रीति सरन को 2027 से शुरू होने वाले तीन साल के नए कार्यकाल के लिए प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार समिति (CESCR – Committee for Economic, Social and Cultural Rights)में फिर से से चुना गया है।
– राजदूत सरन वर्तमान में CESCR की अध्‍यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
– यह संयुक्त राष्ट्र की वह संस्था है जो इस बात की निगरानी के लिए जिम्मेदार है कि सदस्य देश आर्थिक और सामाजिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों को कैसे लागू करते हैं।

UN में भारतीय स्‍थाई प्रतिनिधि
– UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि/राजदूत (न्यूयॉर्क) : पी. हरीश (P. Harish)
– जेनेवा में: अरिंदम बागची

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11. भारत ने अप्रैल 2026 में किस देश को ‘ग्रीन पार्टनरशिप’ के तहत 90 इलेक्ट्रिक बसें सौंपी?

a. मॉरीशस
b. श्रीलंका
c. USA
d. फ्रांस

Answer: a. मॉरीशस

– भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अप्रैल 2026 में अपनी मॉरीशस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम को 90 इलेक्ट्रिक बसों की खेप सौंपी।
– महत्व: यह पहल दोनों देशों के बीच टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन और कार्बन उत्सर्जन कम करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जयशंकर ने इन बसों को “ग्रीन पार्टनरशिप का चलता-फिरता प्रतीक” बताया है।
– ये बसें भारत सरकार द्वारा मॉरीशस को उपहार के रूप में दी जाने वाली कुल 100 बसों के ऑर्डर का हिस्सा हैं।
– इनका निर्माण भारत की ‘स्विच मोबिलिटी’ (हिंदुजा ग्रुप) द्वारा किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता को भी प्रदर्शित करता है।
– अन्य सहयोग: इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए एक ‘रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट’ (Renal Transplant Unit) का भी उद्घाटन किया गया।

मॉरीशस
– राजधानी: पोर्ट लुइस
– प्रधानमंत्री: डॉ. नवीन रामगुलाम
– राष्ट्रपति: धरम गोखूल
– मुद्रा: मॉरीशियाई रुपया
– स्थिति (Location): यह हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है। भौगोलिक रूप से यह अफ्रीका महाद्वीप के अंतर्गत आता है और मेडागास्कर के पूर्व में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
– मॉरीशस की लगभग 67% जनसंख्या भारतीय मूल की है, इसलिए इसे अक्सर ‘मिनी इंडिया’ भी कहा जाता है।
– भोजपुरी: मॉरीशस दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहाँ भोजपुरी को सांस्कृतिक पहचान प्राप्त है।
– चागोस द्वीप समूह: 2025-26 के दौरान ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसके तहत ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह (Chagos Archipelago) की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने पर सहमत हुआ है।

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12. भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) कौन बने?

a. रॉबर्ट जे. रवि
b. संजय खन्ना
c. विकास कौशल
d. जी. कृष्णकुमार

Answer: b. संजय खन्ना

– केंद्रीय कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने 9 अप्रैल 2026 को संजय खन्ना की नियुक्ति को मंज़ूरी दी।
– वह 31 मई, 2029 तक कंपनी का नेतृत्व करेंगे।

BPCL
– स्थापना: 1952 (पहले Burmah Shell के रूप में)
– मुख्यालय: मुंबई
– क्षेत्र: तेल और गैस (Oil & Gas)
– स्थिति: भारत की प्रमुख सरकारी कंपनी (PSU)
– भारत की महानवरत्न कंपनियों में शामिल

मुख्य कार्य:
– कच्चे तेल का रिफाइनिंग (Refining)
– पेट्रोल, डीज़ल, LPG आदि का मार्केटिंग और वितरण
– देशभर में पेट्रोल पंप नेटवर्क संचालन

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13. पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसीना किदवई का निधन 8 अप्रैल, 2026 को हो गया, वह किस राजनीतिक दल से जुड़ी थीं?

a. कांग्रेस
b. भाजपा
c. सपा
d. जदयू

Answer: a. कांग्रेस

– 94 वर्षीय कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसीना किदवई का बीमारी से निधन हो गया।
– उनका जन्‍म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में हुआ।
– पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में उनके पास कई मंत्रालयों की जिम्‍मेदारी थी।
– उनके पास श्रम, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ग्रामीण विकास, परिवहन और शहरी विकास सहित कई मंत्रालय रहे।
– 2022 में, उन्होंने अपनी आत्मकथा, ‘ माई लाइफ इन इंडियन पॉलिटिक्स’ प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने अपनी लंबी राजनीतिक यात्रा का वर्णन किया है।

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14. कर्नल सोनम वांगचुक (रिटायर्ड) का 11 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, उन्‍हें कारगिल युद्ध के दौरान कौन सा सर्वोच्‍च वीरता पुरस्‍कार मिला था?

a. अशोक चक्र
b. वीर चक्र
c. परमवीर चक्र
d. महावीर चक्र

Answer: d. महावीर चक्र

– 61 वर्ष के सोनम वांगचुक को “लद्दाख का शेर” के नाम से जाना जाता था।
– उन्होंने 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान लद्दाख स्काउट्स की 4वीं बटालियन का नेतृत्व किया था।
– उन्होंने हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन में 40 सैनिकों की एक यूनिट को लीड करने के बाद, गहरी बर्फ में तीन दिन की लड़ाई में 136 पाकिस्तानी सैनिकों को सफलतापूर्वक खदेड़ दिया।
– इसके लिए उन्हें महावीर चक्र मिला।
– कर्नल वांगचुक का जन्म 11 मई, 1964 को लद्दाख के लेह जिले के शंकर गांव में हुआ था।
– उन्होंने 30 से ज़्यादा साल मिलिट्री सर्विस को दिए और 2018 में रिटायर हुए।
– कर्नल वांगचुक ने कारगिल युद्ध के दौरान चोरबाट ला दर्रे पर कब्जा कर भारत को महत्वपूर्ण रणनीतिक जीत दिलाई थी।


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